केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरिद्वार में संत समाज के बीच पहुंचकर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि 1937 में मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम् के टुकड़े किए गए थे, जिसने आगे चलकर देश के विभाजन की नींव रखी. शिवराज सिंह चौहान ने संतों के सामने इस ऐतिहासिक गीत की पूरी कहानी रखते हुए आह्वान किया कि अब राष्ट्रगीत का कोई बंटवारा सहन नहीं होगा और इसे पूरा ही गाया जाना चाहिए. इस पर वहां मौजूद संपूर्ण संत समाज ने भी 'वंदे मातरम्' को पूरा गाने का संकल्प दोहराया.
लगातार होने वाले चुनाव विकास में बाधा हैं। चुनावी ड्यूटी में शिक्षक, कर्मचारी, पुलिस और प्रशासन का बहुमूल्य समय लगता है, पैसा खर्च होता है और विकास के काम प्रभावित होते हैं। pic.twitter.com/3FTINGxIZc
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) August 23, 2026
संन्यासी विद्रोह और 'आनंदमठ' का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
केंद्रीय मंत्री ने संतों के सामने वंदे मातरम् की उत्पत्ति का इतिहास के बारे में बात करते हुए कहा कि यह गीत किसी राजनीतिक दल की धरोहर नहीं है. बंगाल में आए भीषण अकाल और अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ जब गरीब जनता पिस रही थी, तब अन्याय के विरोध में भारत का संत समाज ही सबसे पहले खड़ा हुआ था.
शिवराज सिंह ने कहा, उसी संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर ऋषिवर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी ने 'आनंदमठ' उपन्यास रचा.
उन्होंने कहा कि जब उपन्यास के पात्र भवानंद संन्यासी ने महेंद्र जमींदार से मुलाकात की, तो उन्होंने मग्न होकर 'वंदे मातरम्' गाया. इस गीत में मां दुर्गा के स्वरूपों और मातृभूमि की संपूर्ण वंदना है. जब महेंद्र ने पूछा कि यह किसकी वंदना है, तो भवानंद जी का उत्तर था कि यह हमारी भारत माता है, हमारी मातृभूमि है. संन्यासियों के लिए देश ही सर्वोच्च माता-पिता और परिवार है.
'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर भी मांगा आशीर्वाद
शिवराज सिंह चौहान ने संतों से 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के समर्थन की भी अपील की. उन्होंने कहा कि देश में लगातार होने वाले चुनाव विकास कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं. बार-बार चुनाव कराने से शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों, पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का कीमती समय बर्बाद होता है तथा भारी भरकम वित्तीय संसाधन खर्च होते हैं.
उन्होंने संत समाज से आग्रह किया कि वे जनमानस को इसके प्रति प्रेरित करें और ऐसा वातावरण बनाएं ताकि देश का हर नागरिक इसके समर्थन में खड़ा हो सके.
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