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'थोपा गया, बोझिल', थरूर को आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरा वंदे मातरम गाए जाने पर ऐतराज

कांग्रेस सांसद शशि थरूर का कहना है कि पूरा वंदे मातरम गाया जाना किसी भी कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए बहुत ही बोझ भरा हो सकता है और इसकी जरूरत भी नहीं है.

'थोपा गया, बोझिल', थरूर को आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरा वंदे मातरम गाए जाने पर ऐतराज
पूरा वंदे मातरम गाए जाने पर शशि थरूर ने उठाए सवाल.
  • कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वंदे मातरम के सभी पांच अंतरे गाने की अनिवार्यता को गैरजरूरी और बोझिल बताया है
  • थरूर के अनुसार वंदे मातरम राष्ट्रगीत है और इसे समारोह की शुरुआत में एक बार सम्मानपूर्वक गाना परंपरा है
  • केरल में यूडीएफ कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह में पूरा वंदे मातरम गाने को लेकर वामपंथी दलों ने आलोचना की थी
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत में वंदे मातरम के सभी पांच अंतरे बजाने की अनिवार्यता पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि यह प्रथा श्रोताओं के लिए 'गैरजरूरी और बोझिल है. थरूर ने ये बात केरल में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर जारी विवाद के बीच कही. कांग्रेस सांसद ने कहा कि सभी लोग वंदे मातरम का सम्मान करते हैं, लेकिन हर समारोह में इसके सभी अंतरे बजाने को अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं है.

वंदेमातरम कार्यक्रम की शुरुआत में एक बार गाया जाता है

शशि थरूर ने कहा कि वंदे मातरम राष्ट्रगीत है और जब इसे गाया जाता है तो हम सम्मानपूर्वक खड़े हो जाते हैं. इसका पहला अंतरा या शुरुआती दो अंतरे, ज्यादातर लोगों को मुंह जुबानी याद होते हैं. उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से यह गीत किसी कार्यक्रम की शुरुआत में एक बार गाया जाता है, जबकि राष्ट्रगान अलग से, अक्सर अंत में बजाया जाता है.

ये गैर जरूरी और थोपा हुआ नियम

उन्होंने कहा कि अब वे चाहते हैं कि हर कार्यक्रम की शुरुआत में और अंत में पांचों अंतरे गाए जाएं. मुझे लगता है कि यह एक अनावश्यक थोपा हुआ नियम है. हालांकि थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें राष्ट्रगीत से कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने कहा कि हम सभी वंदे मातरम का सम्मान करते हैं. वह खुशी-खुशी इसे गा सकते हैं. 

केरल में लेफ्ट ने भी उठाया था पूरा वंदे मातरम गाने पर सवाल

बता दें कि वंदे मातरम पर ये विवाद केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह के बाद से उठा है. दरअसल समारोह में वंदे मातरम का पूरा गायन किया गया था, जो कि दक्षिणी राज्य में विवाद की वजह बन गया. वामपंथी दलों ने पूरा वंदे मातरम गाए जाने की आलोचना की थी. उन्होंने इसे गलत कदम बताया था. उन्होंने कहा था कि यह बहुलतावादी समाज के लिए अनुपयुक्त है. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने कम्युनिस्टों पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वे ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्यों कि वे जमात-ए-इस्लामी और SDPI जैसी कट्टरपंथी वोट बैंक ताकतों को खुश करना चाहते हैं. 

हालांकि केरल की कांग्रेस सरकार के सूत्रों ने विवाद से खुद को अलग करते हुए कहा था कि कार्यक्रम में उनकी कोई भूमिका नहीं थी. इसका आयोजन लोक भवन की तरफ से किया गया था. अब सांसद शशि थरूर ने भी इसे लेकर सवाल उठाए हैं. 

इनपुट- भाषा के साथ

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