विज्ञापन

साइकिल पर रॉकेट से मंगल तक का सफर... स्पेस डे पर जानें भारतीय स्पेस प्रोग्राम पर गर्व करने वाली 10 बातें

1962 को भारत-चीन युद्ध के कारण याद किया जाता है. लेकिन इसी साल भारत ने अपना स्पेस रिसर्च प्रोग्राम भी शुरू किया था. तब साइकिल और बैलगाड़ी से रॉकेट पार्ट्स ढोए गए थे. लेकिन आज भारत मंगल-चांद तक अपनी पहुंच बना चुका है.

साइकिल पर रॉकेट से मंगल तक का सफर... स्पेस डे पर जानें भारतीय स्पेस प्रोग्राम पर गर्व करने वाली 10 बातें
आज भारत अपना तीसरा स्पेस डे मना रहा है, जानें भारत के स्पेस मिशन की खास बातें.
NDTV
नई दिल्ली:

National Space Day: 200 सालों से अधिक की गुलामी के बाद भारत जब 1947 में आजाद हुआ तो गरीबी, भूखमरी सुरसा जैसा मुंह बाए खड़ी थी. देश की एक बड़ी आबादी को भरपेट खाना तक नहीं नसीब हो रहा था. लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियां बदलीं, अर्थव्यवस्था पटरी पर आई. भारत ने अपनी प्रतिभा के दम पर धरती से लेकर आसमान तक कामयाबी एक बड़ी लकीर खींची. साइकिल-बैलगाड़ी पर रॉकेट ढोने वाला भारत आज मंगल-चांद तक अपना पहुंच बना चुका है. आज राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर आईए जानते हैं, भारतीय स्पेस प्रोग्राम पर गर्व करने वाली 10 बातें. 

नेशनल स्पेस डे पर जान लीजिए भारतीय स्पेस प्रोग्राम पर 10 गर्व करने वाली बातें

1. हॉलीवुड फिल्म के बजट में मंगल और चांद पर पहुंचा भारत 

भारत के स्पेस मिशन की सबसे खास बात इसकी कास्टिंग को लेकर है. भारत सबसे कम खर्चे में स्पेस मिशन को पूरा करता आया है. इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि हॉलीवुड फिल्मों से कम बजट में भारत मंगल, चांद तक पहुंचा. 

  • मिशन मून - ₹386 करोड़ 
  • मिशन मंगल - ₹450 करोड़ 
  • हॉलीवुड फिल्म ग्रेविटी - ₹ 700 करोड़ 
Latest and Breaking News on NDTV

2. साइकिल-बैलगाड़ी से अंतरिक्ष तक का सफ़र

1963 में जब भारत अपने पहले रॉकेट की लॉन्चिंग में जुटा था, तब रॉकेट के पार्ट्स को लॉन्च पैड तक एक साइकिल पर ले जाया गया था. उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि ये देश एक दिन चांद पर तिरंगा फहराएगा. इसकी तस्वीरें आज भी वायरल होती है.  

1981 में सैटेलाइट को बैलगाड़ी पर रखकर ले जाया गया था. कारण कोई मजबूरी नहीं, बल्कि विज्ञान था! बैलगाड़ी लकड़ी की थी और धातु न होने के कारण सैटेलाइट के एंटीना टेस्टिंग में कोई मैग्नेटिक रुकावट नहीं आती थी. 

Latest and Breaking News on NDTV

3. पहली ही कोशिश में मंगल फतह 

अमेरिका और रूस जैसे सुपरपावर भी मंगल ग्रह पर जाने में कई बार फेल हुए थे. लेकिन भारत दुनिया का पहला और इकलौता देश है जिसने अपनी पहली ही कोशिश में मंगल की कक्षा में कामयाबी के साथ एंट्री मारी थी. ISRO ने 5 नवंबर 2013 को मिशन मंगल के लिए मंगलयान-1 लॉन्च किया. इस ग्रह पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाला अमेरिका और रूस के बाद भारत तीसरा देश बना. इस मिशन की सबसे खास बात ये रही कि ISRO ने यह कामयाबी पहली ही कोशिश में हासिल की. यानी अपनी पहली ही कोशिश में भारत मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया. इस मिशन को सिर्फ 400 करोड़ रुपये में पूरा किया गया. 
 

Latest and Breaking News on NDTV

4. साउथ पोल पर भारत की ‘शिव-शक्ति' 

चंद्रयान-3 की सफलता के साथ भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) के पास सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का सबसे पहला देश बन गया. इस ऐतिहासिक जगह का नाम अब 'शिव-शक्ति पॉइंट' है. चांद के इस कोने पर अब तक कोई भी देश नहीं पहुंच पाया है. चंद्रयान-3 ने चांद के साउथ पोल पर जहां लैंडिंग की थी, उस जगह को पीएम मोदी ने शिव शक्ति बिंदु नाम दिया है. 

5. चांद पर पानी हमने खोजा! 

पूरी दुनिया दशकों से चांद पर जा रही थी, लेकिन चांद की सतह पर पानी के कणों (Water Molecules) की सबसे पहली और पक्की खोज भारत के चंद्रयान-1 (2008) ने की थी. नासा ने भी इस बात का लोहा माना था. भारत के पहले चंद्र मिशन के ‘मून मिनरलॉजी मैपर' उपकरण ने पहली बार चंद्रमा की सतह पर पानी के कणों (हाइड्रॉक्सिल और पानी) की मौजूदगी के पुख्ता संकेत खोजे.

6. भारत का अपना 'GPS'

कारगिल युद्ध के समय अमेरिका ने भारत को GPS डेटा देने से मना कर दिया था. आज भारत का अपना स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम है जिसे 'NavIC' कहा जाता है, जो आम GPS से कहीं ज्यादा सटीक है. मई 2006 में भारत सरकार ने GPS या ग्लोनास जैसी विदेशी सिस्टम पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अपना नेविगेशन सिस्टम विकसित करने का फैसला किया. NavIC भारत को अपने नेविगेशन और टाइमिंग डेटा पर बेहतर कंट्रोल देता है.

7. अब सूरज की स्टडी करने निकल पड़े हैं हम! 

चांद फतह करने के बाद ISRO ने सूरज का रुख किया. 'आदित्य-L1' भारत का पहला सोलर मिशन है, जिसे सूरज और धरती के बीच 'Lagrange Point 1 (L1)' पर तैनात किया गया है, जहां से यह लगातार सूरज की हरकतों पर नजर रखता है. 

8. 1 साल की लाइफ, 7 साल चल Orbiter! 

Chandrayaan-2 का Orbiter सिर्फ 1 साल के लिए डिज़ाइन किया गया था. लेकिन precise mission management की वजह से यह करीब 7 साल तक operational रहा. 

Latest and Breaking News on NDTV

9. भारत का पहला मानव स्पेस मिशन: 'गगनयान' और 'व्योममित्र' 

'गगनयान' भारत का पहला ऐतिहासिक मिशन है, जिसके जरिए ISRO पहली बार भारतीयों को अपने रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजने जा रहा है. लेकिन असली एस्ट्रोनॉट्स से पहले अंतरिक्ष में 'व्योममित्र' नाम की एक फीमेल ह्यूमनॉइड को भेजा जा रहा है. यह रोबोट सिर्फ डमी नहीं है, बल्कि इंसानों की तरह बात करने से लेकर स्पेसक्राफ्ट का पूरा कंट्रोल पैनल संभालने तक में माहिर है. 

Latest and Breaking News on NDTV

10.  आज ही चांद पर पहुंचे थे हम 

23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने जब चांद के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग की थी. भारत की इस महा-सफलता को हमेशा के लिए अमर बनाने के लिए ही प्रधानमंत्री ने 23 अगस्त को 'नेशनल स्पेस डे' घोषित किया था. स्पेस डे के मौके पर कमेंट कर भारतीय वैज्ञानिकों के जज्बे को आप भी करें सलाम!

यह भी पढ़ें - बैलगाड़ी-साइकिल से रॉकेट ढोने वाले इसरो से दुनिया दंग, ISRO के लिए उपग्रह छोड़ना पक्षी उड़ाने जैसा

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
ISRO, ISRO Mission, National Space Day, India Space Mission, Chandrayaan
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com