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लक्षद्वीप में शुरू होंगी सीप्लेन सेवाएं, दूर-दराज इलाकों तक कनेक्टिविटी बढ़ा रही सरकार: राम मोहन नायडू

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन बाजारों में शामिल हो चुका है और अब देश खुद को वैश्विक एविएशन फाइनेंसिंग और एयरक्राफ्ट लीजिंग हब के रूप में भी स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

लक्षद्वीप में शुरू होंगी सीप्लेन सेवाएं, दूर-दराज इलाकों तक कनेक्टिविटी बढ़ा रही सरकार: राम मोहन नायडू
नई दिल्ली:

भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है और आने वाले सालों में विमान लीजिंग और फाइनेंसिंग के क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं. केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजारापु ने कहा कि भारतीय एयरलाइंस के पास वर्तमान में 1,640 विमानों की डिलीवरी लंबित है, जो अगले एक दशक में देश के लिए 50 अरब डॉलर के एयरक्राफ्ट लीजिंग अवसर पैदा करेगी. उन्होंने यह बात गांधीनगर के गिफ्ट सिटी में आयोजित इंडिया एयरक्राफ्ट लीजिंग एंड फाइनेंसिंग समिट 2.0 के दौरान कही.

इस दौरान, केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि लक्षद्वीप में जल्द ही सीप्लेन सेवाएं शुरू की जाएंगी. उन्होंने कहा कि भारत अब केवल पारंपरिक विमान सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हेलीकॉप्टर, छोटे रीजनल एयरक्राफ्ट और सीप्लेन के जरिए दूर-दराज और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

राम मोहन नायडू ने बताया कि सरकार 40 से 100 सीट वाले छोटे विमानों के लिए भी लीजिंग फ्रेमवर्क को बढ़ावा दे रही है, ताकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हो सके. इसके अलावा एविएशन सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए फ्रैक्शनल ओनरशिप मॉडल और एयरक्राफ्ट को इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट मानने जैसे नए नीति विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन बाजारों में शामिल हो चुका है और अब देश खुद को वैश्विक एविएशन फाइनेंसिंग और एयरक्राफ्ट लीजिंग हब के रूप में भी स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

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उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय एयरलाइंस के पास 1,640 विमानों की लंबित डिलीवरी है. यह आने वाले 10 वर्षों में करीब 50 अरब डॉलर के लीजिंग अवसरों में बदल सकती है. उन्होंने कहा कि भारत का कमर्शियल विमान बेड़ा 2027 तक बढ़कर 1,100 विमानों तक पहुंच सकता है, जबकि 2035 तक यह संख्या 2,250 से अधिक होने का अनुमान है.

मंत्री ने आगे कहा कि एविएशन सेक्टर के इस बड़े विस्तार को समर्थन देने के लिए मजबूत घरेलू फाइनेंसिंग और लीजिंग इकोसिस्टम की जरूरत है. सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है ताकि भारतीय एयरलाइंस को वैश्विक स्तर की सुविधाएं और वित्तीय सहायता मिल सके.

उन्होंने बताया कि पहले आयोजित इंडिया एयरक्राफ्ट लीजिंग एंड फाइनेंसिंग समिट में किए गए कई बड़े वादों को सरकार ने पूरा कर दिया है. इसी क्रम में 'प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स इन एयरक्राफ्ट ऑब्जेक्ट्स एक्ट 2025' लागू किया गया है, जो भारत के कानूनी ढांचे को केप टाउन कन्वेंशन के अनुरूप बनाता है.

मंत्री ने कहा कि पहले एयरक्राफ्ट लीजिंग कंपनियों को विमान डी-रजिस्ट्रेशन और एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन जैसे मामलों में लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिससे एयरलाइंस की लागत बढ़ती थी और अंततः यात्रियों को महंगे हवाई किराए का सामना करना पड़ता था. अब सरकार ने इस समस्या का समाधान कर दिया है.
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उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने एयरलाइंस को राहत देने के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में बढ़ोतरी को 25 प्रतिशत तक सीमित रखा है. साथ ही एयरपोर्ट पर लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25 प्रतिशत की कटौती की गई है और एयरलाइंस के लिए क्रेडिट सपोर्ट भी बढ़ाया गया है.

नायडू ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5,000 करोड़ रुपए की 'क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम' को मंजूरी दी है, जिससे एयरलाइंस को नकदी संकट से राहत मिलेगी. उन्होंने दावा किया कि दुनिया में शायद ही किसी सरकार ने एविएशन सेक्टर के लिए इस तरह की पहल की हो.

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