- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति या जनजाति का लाभ नहीं मिलेगा.
- न्यायमूर्ति पी.के. मिश्र एवं एन.वी. अंजारिया की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.
- धर्मांतरण के साथ ही SC-ST का दर्जा समाप्त हो जाता है और संबंधित आरक्षण लाभ भी खत्म हो जाते हैं.
धर्मांतरण और अनुसूचित जाति (SC) दर्जे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अपना रुख साफ कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर कोई और धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को SC का लाभ नहीं मिल सकता. न्यायमूर्ति पी.के. मिश्र और एन.वी. अंजारिया की दो‑जजों वाली पीठ ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि एक व्यक्ति जब खुद को ईसाई के रूप में घोषित करता है और उसका अभ्यास भी करता है, तो वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं रह सकता.
कौन‑कौन से तर्क दिए गए?
1. व्यक्ति ने 10 वर्षों तक सक्रिय रूप से ईसाई धर्म का पालन किया
अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा, 'अपीलकर्ता 10 वर्षों तक ईसाई धर्म का प्रचार करता रहा, संडे प्रेयर कराता रहा और स्वयं को ईसाई पादरी की तरह प्रस्तुत करता रहा.' ऐसे स्पष्ट प्रमाण यह दिखाते हैं कि वह अब SC समुदाय का हिस्सा नहीं माना जा सकता.
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2. सुप्रीम कोर्ट के 1950 के फैसले का क्लॉज-3
कोर्ट ने कहा, 'हिंदू, सिख और बौद्ध के अलावा कोई व्यक्ति SC नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने 1950 के क्लॉज-3 का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रतिबंध पूर्ण (absolute) है, इसमें कोई अपवाद नहीं है.
3. धर्मांतरण का अर्थ- SC स्टेटस का तत्काल अंत
पीठ ने साफ किया कि ईसाई धर्म अपनाते ही व्यक्ति का SC स्टेटस तुरंत समाप्त हो जाता है, चाहे जन्म से वह किसी SC जाति में रहा हो. इसके बाद वह SC Act, 1989 सहित किसी कानूनी, संवैधानिक या आरक्षण से जुड़े लाभ का दावा नहीं कर सकता.
4. एक साथ दो धार्मिक पहचान नहीं रखी जा सकतीं
कोर्ट ने कहा, कोई व्यक्ति एक धर्म का पालन करते हुए दूसरे धर्म का आरक्षण लाभ नहीं ले सकता. यह दोहरा दर्जा कानून में मान्य नहीं है.
फैसले की बड़ी बातें
ईसाई धर्म अपनाने पर SC दर्जा तुरंत खत्म
धर्मांतरण के बाद SC Act की सुरक्षा, आरक्षण और सभी SC लाभ स्वतः समाप्त हो जाते हैं.
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AP हाई कोर्ट का फैसला सही, SC स्टेटस नहीं मिल सकता
अदालत ने कहा कि सक्रिय रूप से ईसाई धर्म का अभ्यास करने वाले व्यक्ति को SC नहीं माना जा सकता.
पुन: हिंदू/सिख/बौद्ध बनने पर तीन शर्तें अनिवार्य
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई ‘वापस' धर्म अपनाने का दावा करे, तो उसे साबित करना होगा कि वह वास्तव में पुनः धर्म में लौटा, उस समुदाय ने उसे स्वीकार किया. सामाजिक प्रथाओं में भी वह उसी समुदाय का हिस्सा बन गया है. बिना इन तीन साबितियों के SC दर्जा बहाल नहीं किया जा सकता.
कोई भी राज्य या कानून SC लाभ विस्तार नहीं कर सकता
कोर्ट के अनुसार, 'SC स्टेटस पर लगा संवैधानिक प्रतिबंध पूर्ण है. कोई राज्य, कानून या नीति इसे बदल नहीं सकती.'
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला क्या था?
सुप्रीम कोर्ट ने जिस फैसले को बरकरार रखा है, वह आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के 2025 के महत्वपूर्ण निर्णय पर आधारित है. मई 2025 में हाई कोर्ट ने साफ कहा था कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा नहीं मिल सकता, और वह SC/ST Act की सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता.
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