Bridge Collapsed in Bhagalpur: बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु पर रविवार की रात एक बड़ा हादसा हो गया. रविवार की देर रात करीब 1:10 बजे पुल का एक पिलर ध्वस्त हुआ और उस पर टिका स्लैब पूरी तरह गंगा नदी में समा गया. देर रात पुल टूटने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई, हालांकि गनीमत रही कि समय रहते पुलिस और प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए आवाजाही रोक दी थी, जिससे स्लैब गिरने के दौरान कोई वाहन उसकी चपेट में नहीं आया और बड़ा नुकसान टल गया.
पुल टूटने से नवगछिया और भागलपुर के बीच का संपर्क टूट गया है. घटना के बाद प्रशासन भी मौके पर पहुंचा और पुलिस के जवानों ने लोगों से सावधानी बरतने की हिदायत दी. देर रात वहां मौजूद भागलपुर जिले के थाना बिहपुर निवासी ऋषव मिश्रा ने NDTV को बताया कि पुल के दिन में ही हल्का क्षतिग्रस्त होने की सूचना आ रही थी और देर रात पुल का एक बड़ा हिस्सा (स्पैन) नदी में समा गया.

रात 11:33 बजे से ही हादसे की शुरुआत
हादसे की शुरुआत रविवार रात करीब 11:33 बजे हुई जब पाया नंबर 133 अचानक बैठना शुरू हुआ. रात 11:55 बजे तक पाया काफी हद तक झुक गया था. सेतु पर तैनात पुलिस जवानों ने तुरंत इसकी सूचना वरीय अधिकारियों को दी. सूचना मिलते ही भागलपुर रेंज के आईजी विवेक कुमार ने SSP प्रमोद कुमार यादव और नवगछिया SP राजेश कुमार को तत्काल प्रभाव से वाहनों की आवाजाही रुकवाने का निर्देश दिया. आवाजाही रोकने के बाद पिलर और उसके आसपास का हिस्सा खाली करा लिया गया. आखिरकार, देर रात 1:10 बजे वो पिलर पाया पूरी तरह ध्वस्त होकर गंगा में विलीन हो गया.

विक्रमशिला सेतु: एक नजर में
- उद्घाटन: तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने साल 2001 में इसका उद्घाटन किया था.
- लंबाई: यह पुल 4.7 किलोमीटर लंबा है.
- संपर्क: उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला पुल.
- महत्व: हर दिन हजारों वाहन, एक लाख से ज्यादा लोगों की आवाजाही का माध्यम.
जिला प्रशासन ने उठाए एहतियाती कदम
पुल टूटने के बाद भागलपुर शहर की सड़कों पर दबाव न बढ़े, इसके लिए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं. भारी वाहनों को शहर में प्रवेश करने से पहले ही घोंघा, सबौर, जगदीशपुर और कजरेली जैसे इलाकों में रोक दिया गया है.

क्या लापरवाही की भेंट चढ़ा पुल?
इस पुल का उद्घाटन करीब 26 साल पहले हुआ था. बिहार के एक बड़े हिस्से को भागलपुर के रास्ते झारखंड से जोड़ने में इस पुल की बड़ी भूमिका रही है. पुल टूटने के बाद स्थानीय स्तर पर इस हादसे को लेकर पुल प्रबंधन और रख-रखाव पर सवाल उठ रहे हैं.
लोगों के बीच प्रोटेक्शन वॉल की अनदेखी की चर्चा है. लगभग एक महीने पहले ही पिलर की प्रोटेक्शन वॉल टूट गई थी, जिससे मुख्य स्ट्रक्चर के टूटने का खतरा पैदा हो गया था. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते मरम्मत की गई होती, तो शायद ये नौबत नहीं आती. बताया जा रहा है कि पिछले आठ वर्षों से सेतु की बड़े स्तर पर मरम्मत नहीं हुई थी, जिससे पाया नंबर 133 पहले से ही कमजोर हो चुका था.
फिलहाल पुल पर आवाजाही पूरी तरह बंद है, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार का एक मुख्य संपर्क मार्ग टूट गया है. प्रशासन अब स्थिति का जायजा लेकर मरम्मत की आगामी रणनीति तैयार कर रहा है.
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