विज्ञापन
This Article is From Mar 23, 2026

'जमीन के बदले नौकरी' केस में CBI को कोर्ट का नोटिस, राबड़ी देवी की याचिका पर मांगा जवाब

'जमीन के बदले नौकरी' का यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री के कार्यकाल का है. आरोप है कि लालू के समय भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप डी की नियुक्तियां उन उम्मीदवारों को दी गईं, जिन्होंने राजद प्रमुख के परिवार या सहयोगियों के नाम पर भूखंड उपहार में दिए थे.

'जमीन के बदले नौकरी' केस में CBI को कोर्ट का नोटिस, राबड़ी देवी की याचिका पर मांगा जवाब
राबड़ी देवी की याचिका पर CBI को कोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली: जमीन के बदले नौकरी के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की एक याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया है. सीबीआई को यह नोटिस राबड़ी देवी की उस याचिका पर दिया गया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 1,600 अप्रयुक्त दस्तावेज देने से इनकार कर दिया गया था. जस्टिस मनोज जैन ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई एक अप्रैल के लिए सूचीबद्ध की है.

निचली अदालत ने खारिज की थी याचिका

निचली अदालत ने 18 मार्च को राबड़ी देवी और उनके पति, पूर्व रेल मंत्री एवं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें अप्रयुक्त दस्तावेजों की मांग की गई थी. अदालत ने कहा कि ये दस्तावेज एक साथ उपलब्ध कराना न केवल 'बैलगाड़ी को घोड़े के आगे रखने' (उल्टा काम करने) जैसा होगा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को 'पूरी तरह से अव्यवस्थित' भी कर देगा. 

बता दें कि अप्रयुक्त दस्तावेज वे होते हैं, जिन्हें जांच एजेंसियां जब्त तो करती हैं, लेकिन आरोपपत्र में उनका उपयोग नहीं किया जाता. निचली अदालत ने दो अन्य आरोपियों द्वारा दायर इसी तरह के आवेदनों को भी खारिज कर दिया. इनमें लालू प्रसाद के निजी सचिव आर.के. महाजन द्वारा एक अप्रयुक्त दस्तावेज और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक एवं पूर्व नियुक्ति प्राधिकारी महीप कपूर द्वारा 23 अप्रयुक्त दस्तावेजों की मांग की गई थी.

लालू के रेल मंत्री रहने के दौरान का मामला

सीबीआई के अनुसार, 'जमीन के बदले नौकरी' का यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में की गई ग्रुप डी नियुक्तियों से संबंधित है. आरोप है कि ये नियुक्तियाँ उन उम्मीदवारों को दी गईं, जिन्होंने राजद प्रमुख के परिवार या सहयोगियों के नाम पर भूखंड उपहार में दिए या स्थानांतरित किए थे. 

सीबीआई के अनुसार, उम्मीदवारों या उनके रिश्तेदारों ने कथित तौर पर बाजार दर से कम कीमतों पर जमीन हस्तांतरित की, जो विभिन्न रेलवे जोन में नौकरियों के बदले में दी गई थी. हालांकि, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने इन आरोपों से इनकार किया है और खुद को निर्दोष बताया है. उन्होंने कहा है कि वे इस मामले को इसके गुण-दोष के आधार पर लड़ेंगे.

इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में सीबीआई को एक नोटिस जारी किया. यह नोटिस लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर एक याचिका पर दिया गया था, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें इस मामले में आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था. जनवरी में ट्रायल कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए थे. कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे एक आपराधिक गिरोह के हिस्से के तौर पर काम कर रहे थे और कथित तौर पर सरकारी नौकरी को अचल संपत्तियां हासिल करने का एक जरिया बना रहे थे.

यह भी पढे़ं- बिहार विधान परिषद में हंगामा, मंत्री ने MLC को ‘लफंगा' कहा, MLC ने मंत्री को ‘टपोरी'; जानें पूरा मामला

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Land For Jobs Case, Lalu Yadav, Lalu Yadav Land For Job Case, Lalu Yadav Land Scam, Rabri Devi Land For Job Case
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com