Republic Day Parade 2026: देश सोमवार 26 जनवरी को 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. हर साल की तरह पारंपरिक तौर पर गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि को बुलाया जाता है. कर्तव्य पथ(राजपथ) पर गणतंत्र दिवस की भव्य परेड आयोजित की जाएगी. क्या आपको पिछले 76 सालों में किन-किन देशों के राष्ट्राध्यक्ष, शासनाध्यक्ष के तौर पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या अन्य नेता हमारी रिपब्लिक डे परेड में शामिल हुए हैं. आपको जानकर ताज्जुब होगा कि दो बार पाकिस्तान के नेता भी हमारे गणतंत्र परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए हैं. पाकिस्तान के नेता 1965 के युद्ध के पहले दो बार गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि बने थे. इसके बाद पाकिस्तान को कभी न्योता नहीं दिया गया. चीन से सिर्फ एक बार 1958 में मार्शल ये जियानयिंग गणतंत्र दिवस परेड में चीफ गेस्ट बने थे.सीमा विवाद को लेकर 1962 के युद्ध के पहले की ये घटना है.
गणतंत्र दिवस मुख्य अतिथि कौन
पाकिस्तान के नेता 1955 और फिर 1965 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह का हिस्सा बन चुके हैं.भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद 1947-48 के कश्मीर युद्ध के तनाव को कम करने के लिए भारत ने ये पहल की थी. 1955 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनके उत्तराधिकारी लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 में गणतंत्र दिवस पर पड़ोसी मुल्क के नेता को यह सोचकर बुलाया कि शायद पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधर जाएं. 1965 में तो जनवरी में गणतंत्र दिवस के कुछ महीनों बाद ही भारत और पाकिस्तान में भयंकर युद्ध हुआ.
1955 में पाकिस्तानी नेता गणतंत्र दिवस समारोह में आए
पाकिस्तानी नेता को गणतंत्र दिवस समारोह पर बुलाने का पहला वाकया जनवरी 1955 में आया, जब पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद गणतंत्र दिवस में शामिल हुए. उसी साल गणतंत्र दिवस की सैन्य परेड राजपथ पर शुरू हुई थी, जिसे अब कर्तव्यपथ नाम दिया गया है. 1955 से पहले गणतंत्र दिवस परेड इरविन स्टेडियम में होती रही थी. इस मैदान को अब अब मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम कहा जाता है.
पाकिस्तान के गवर्नर जनरल को मौका
मलिक ने पाकिस्तान में 1951 से 1955 तक तीसरे गवर्नर जनरल के तौर पर काम किया.मलिक विभाजन के पहले भारतीय सिविल सेवा अधिकारी थे. मलिक को 1946 में अंग्रेजों ने नाइट की उपाधि दी थी.हालांकि पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथ के हावी होने के साथ ऐसे नेताओं की पकड़ ढीली होती गई. गवर्नर जनरल तौर पर मलिक ने 1953 में प्रधानमंत्री ख्वाजा नाजिमुद्दीन की सरकार को बर्खास्त कर दिया था. मलिक ने पाकिस्तानी संसद और न्यायपालिका को कमजोर करने का पहला प्रहार किया.
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1965 में पाकिस्तान के कृषि मंत्री गणतंत्र दिवस परेड में शामिल
10 साल बाद जनवरी 1965 में गणतंत्र दिवस परेड में पाकिस्तान के खाद्य एवं कृषि मंत्री राणा अब्दुल हामिद मुख्य अतिथि थे. उस वक्त लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे. हामिद पंजाबी जमींदार और राणा वंश से ताल्लुक रखते थे. राणा वंश का रिश्ता सिंध के उमरकोट के हिंदू राजपूतों से था. उनका कनेक्शन राजस्थान से भी था.
पाकिस्तान ने की दगाबाजी
हालांकि गणतंत्र दिवस राजपथ के सलामी मंच पर हामिद होने के दो महीने में ही पाकिस्तान ने दगाबाजी दिखाई. उसने अप्रैल में कच्छ के रण में सैन्य घुसपैठ करते हुए ऑपरेशन डेजर्ट हॉक छेड़ दिया.इससे दो महीने में दोनों सेनाओं के बीच झड़प हुईं और मई 1965 में भारत और पाकिस्तानी सेना के बीच बड़ा टकराव शुरू हो गया. जून 1965 में दोनों देशों के बीच अस्थायी शांति आई.10 जनवरी 1966 को दोनों देशों के बीच ताशकंद समझौता हुआ था.
ऑपरेशन जिब्राल्टर
पाकिस्तान ने अगस्त 1965 में जम्मू और कश्मीर में घुसपैठ की योजना के तहत ऑपरेशन जिब्राल्टर शुरू किया. उसका मकसद सादी वर्दी में सैनिकों की घुसपैठ कराना था ताकि वहां बड़े पैमाने पर विद्रोह भड़काया जा सके. लेकिन स्थानीय कश्मीरियों ने घुसपैठियों को भारतीय सेना के हवाले कर दिया. फिर सितंबर 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच करीब तीन हफ्ते युद्ध चला.
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गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि की परंपरा
गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर विदेशी मेहमान को बुलाने की परंपरा 26 जनवरी 1950 से हुई. पहले गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो थे. तब रिपब्लिक डे परेड दिल्ली के इर्विन स्टेडियम में हुई थी. वर्ष 1952 और 1953 में कोई विदेशी मुख्य अतिथि नहीं था.
रिपब्लिक डे चीफ गेस्ट कैसे चुना जाता है?
गणतंत्र दिवस के चीफ गेस्ट के चुनाव की लंबी प्रक्रिया लगभग छह महीने पहले प्रारंभ हो जाती है. संभावित देशों को छांटा जाता है. विदेश मंत्रालय उन संबंधित देश या संगठनों के साथ भारत के राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक रिश्तों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाता है.
77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के नेता
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के मुख्य नेता मुख्य अतिथि होंगे. यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेएन 25 से 27 जनवरी तक भारत की यात्रा पर हैं. दोनों नेता गणतंत्र दिवस समारोह और भारत-EU शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे.
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