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सेना के बहादुरों को सम्‍मान: जवानों को कीर्ति और शौर्य चक्र सहित कई वीरता पुरस्‍कार, राष्‍ट्रपति ने दी मंजूरी

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों की वीरता और उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए वीरता पुरस्‍कार देने की मंजूरी दी है.

सेना के बहादुरों को सम्‍मान: जवानों को कीर्ति और शौर्य चक्र सहित कई वीरता पुरस्‍कार, राष्‍ट्रपति ने दी मंजूरी
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय सेना के वीरता पुरस्कारों की मंजूरी दी है.
  • कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र सहित विभिन्न पुरस्कारों को देश की सुरक्षा में अदम्य साहस के लिए प्रदान किया गया है.
  • 2 कीर्ति चक्र और 10 शौर्य चक्र प्रदान करने की मंजूरी दी गई है, जिसमें एक शौर्य चक्र मरणोपरांत है.
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नई दिल्‍ली:

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों और जवानों को वीरता और उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए कई पुरस्‍कार देने की मंजूरी दी है. यह वीरता पुरस्‍कार विभिन्न सैन्य अभियानों के दौरान अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और लगातार बेहतरीन सेवा के लिए हैं. यह सम्‍मान देश की सुरक्षा में हर वक्‍त मुस्‍तैद रहने वाले और अपनी वीरता से दुश्‍मनों के दांत खट्टे कर देने वाले योद्धाओं के असाधारण योगदान का सम्‍मान है. 

वीरता पुरस्कार

  • चक्र श्रेणी में 2 कीर्ति चक्र और 10 शौर्य चक्र प्रदान किए गए हैं, जिनमें एक शौर्य चक्र मरणोपरांत है. 
  • सेना मेडल (वीरता) पर एक बार और 44 सेना मेडल (वीरता) प्रदान किए गए हैं, जिनमें 5 मरणोपरांत शामिल हैं. 

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विशिष्ट सेवा पुरस्कार

  • 19 परम विशिष्ट सेवा मेडल
  • 4 उत्तम युद्ध सेवा मेडल
  • 35 अति विशिष्ट सेवा मेडल
  • 7 युद्ध सेवा मेडल 
  • सेना मेडल (विशिष्ट) 2 बार
  • 43 सेना मेडल (विशिष्ट) 
  • 85 विशिष्ट सेवा मेडल

इसके साथ ही ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, ऑपरेशन हिफाजत, ऑपरेशन ऑर्किड, ऑपरेशन मेघदूत सहित विभिन्न अभियानों, बचाव कार्यों और हताहत निकासी अभियानों में अपने बेहतरीन योगदान के लिए 81 मेंशन-इन-डिस्पैच भी दिए गए हैं. 

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ये हैं कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र विजेताओं की उपलब्धियां 

कीर्ति चक्र

मेजर अर्शदीप सिंह (1 असम राइफल्स)
14 मई 2025 को भारत-म्यांमार सीमा पर एक विशेष गश्ती दल का नेतृत्व करते हुए अचानक हुए हमले में उन्होंने घने जंगल के बीच ऊंचाई पर मौजूद दुश्मन के ठिकाने पर साहसिक हमला किया. भारी गोलीबारी के बावजूद उन्होंने कई सशस्त्र उग्रवादियों को निष्क्रिय किया और अपनी टुकड़ी को सुरक्षित रखा. 

नायब सूबेदार दोलेश्वर सुब्बा (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
11 अप्रैल 2025 को किश्तवाड़ के जंगलों में आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान उन्होंने भारी फायर के बीच आगे बढ़ते हुए एक विदेशी आतंकवादी को नजदीक से मार गिराया और दूसरे को भी निष्क्रिय किया. उनका साहस और धैर्य असाधारण रहा. 

शौर्य चक्र

लेफ्टिनेंट कर्नल घटगे आदित्य श्रीकुमार (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा पर सटीक अभियान की प्‍लानिंग और नेतृत्व किया, जिसमें एक उग्रवादी शिविर नष्ट किया गया और 9 आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया. 

मेजर अंशुल बलटू (32 असम राइफल्स)
29 अप्रैल 2025 को असम के दीमा हसाओ जिले में मुठभेड़ के दौरान व्यक्तिगत साहस दिखाते हुए एक उग्रवादी को ढेर किया और कुल तीन आतंकवादी मारे गए. 

मेजर शिवकांत यादव (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
12–13 मई 2025 की रात शोपियां में कठिन परिस्थितियों में आतंकवादियों का पीछा करते हुए एक खतरनाक आतंकवादी को नजदीकी मुकाबले में मार गिराया. 

मेजर विवेक (42 राष्ट्रीय राइफल्स)
15 मई 2025 को पुलवामा में तलाशी अभियान के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक ‘ए+ श्रेणी' के आतंकवादी को मार गिराया. 

मेजर लैशांगथेम दीपक सिंह (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
अपहृत नागरिकों को छुड़ाने के बेहद जोखिम वाले अभियान में साहस दिखाया और आतंकवादियों को नजदीक से निष्क्रिय किया और एक निर्दोष नागरिक को सुरक्षित बचाने में कामयाब रहे. 

कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
21 जुलाई 2025 को उधमपुर के बसंतगढ़ क्षेत्र में घात लगाकर किए गए अभियान में एक कुख्यात जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी को मार गिराया. 

सूबेदार पीएच मोसेस (1 असम राइफल्स)
14 मई 2025 को भारी गोलीबारी के बीच रेंगते हुए बेहतर मोर्चा संभाला और कई आतंकवादियों को निष्क्रिय किया.

लांस दफादार बलदेव चंद (42 राष्ट्रीय राइफल्स) – मरणोपरांत
19 सितंबर 2025 को किश्तवाड़ में आतंकवादियों से आमने-सामने की लड़ाई में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अंत तक लड़ते रहे और सर्वोच्च बलिदान दिया. 

राइफलमैन मंगलेम सांग वैफेई (3 असम राइफल्स)
9 जून 2025 को मणिपुर में घुसपैठ-रोधी अभियान के दौरान तीन सशस्त्र उग्रवादियों को मार गिराया और अपनी टुकड़ी को सुरक्षित रखा. 

राइफलमैन धुर्बा ज्योति दत्ता (33 असम राइफल्स)
19 सितंबर 2025 को बाढ़ राहत से लौटते समय हुए हमले में घायल होने के बावजूद वाहन को खतरे से बाहर निकालकर आठ साथियों की जान बचाई. 

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