Republic Day 2026: आज 26 जनवरी को भारत पूरे गर्व और उत्साह के साथ अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. इस दिन बच्चों से लेकर बड़ों तक, सबके हाथ में लहराता हुआ तिरंगा नजर आता है.तिरंगा सिर्फ भारत का राष्ट्रीय ध्वज ही नहीं, बल्कि इसके हर रंग और चिन्ह के पीछे गहरा अर्थ छिपा है. तिरंगे के केसरिया, सफेद और हरे रंग को तो सभी पहचानते हैं, लेकिन इसके बीच बने अशोक चक्र और उसकी 24 तीलियों का मतलब अक्सर कम लोग जानते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको तिरंगे पर बने अशोक चक्र की 24 तिलियों का अर्थ बताने जा रहे हैं.
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प्राचीन संस्कृति और इतिहास से जोड़ता अशोक चक्र
भारतीय झंडे के सफेद पट्टी के बीच नीले रंग का जो चक्र बना होता है, उसे अशोक चक्र कहा जाता है. यह चक्र हमें भारत की प्राचीन संस्कृति और इतिहास से जोड़ता है. इसे धर्मचक्र भी कहा जाता है, जो सत्य, धर्म और न्याय का प्रतीक है. अशोक चक्र की प्रेरणा सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से ली गई है, जिसे आज भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है. जानकारी के लिए बता दें, कि 22 जुलाई 1947 को जब तिरंगे को आधिकारिक रूप से अपनाया गया, तब अशोक चक्र को उसमें शामिल किया गया. यह सिर्फ एक डिजाइन नहीं है, बल्कि यह लगातार आगे बढ़ते रहने, कर्तव्य और जीवन में संतुलन का संदेश देता है. चक्र की 24 तीलियां हमें जीवन के अलग‑अलग मूल्यों और निरंतर प्रगति की सीख देती हैं.
अशोक चक्र में बनी हर तीली का मतलब
1. पहली तीली - संयम
2. दूसरी तीली - आरोग्य
3. तीसरी तीली - शांति
4. चौथी तीली - त्याग
5. पांचवीं तीली - नैतिकता
6. छठी तीली - सेवा
7. सातवीं तीली - क्षमा
8. आठवीं तीली - प्रेम
9. नौवीं तीली - मैत्री
10. दसवीं तीली - बंधुत्व
11. ग्यारहवीं तीली - संगठन
12. बारहवीं तीली - कल्याण
13. तेरहवीं तीलीं - समृद्धि
14. चौदहवीं तीली - उद्योग
15. पंद्रहवीं तीली - सुरक्षा
16. सोलहवीं तीली - जागरूकता
17. सत्रहवीं तीली - समता
18. अठारहवीं तीली- अर्थ
19. उन्नीसवीं तीली- नीति
20. बीसवीं तीली - न्याय
21. इक्कीसवीं तीली - सहयोग
22. बाईसवीं तीली - कर्तव्य
23. तेईसवीं तीली - अधिकार
24. चौबीसवीं तीली - बुद्धि
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