- श्रीनगर के लाल चौक पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक व्यक्ति ने पूरे बदन को तिरंगे के रंगों से रंगा
- इस व्यक्ति ने एक हाथ में तिरंगा झंडा और दूसरे हाथ में ब्रह्मोस का छोटा मॉडल रखा था
- गुजरात के अहमदाबाद से आए इस पर्यटक ने जमा देने वाली ठंड के बावजूद देशभक्ति के नारे लगाए
दिल में जब देशभक्ति का जज्बा हो, तो जमा देने वाली ठंड की गर्म लगने लगती है. गणतंत्र दिवस के अवसर पर श्रीनगर के लाल चौक पर एक ऐसा ही नजारा देखने को मिला. यहां एक शख्स पूरे बदन पर तिरंगे को रंग लाल चौक स्थित प्रतिष्ठित घंटाघर पर नजर आया. इस शख्स के एक हाथ में तिरंगा झंडा था, तो दूसरे हाथ में ब्रह्मोस का एक छोटा मॉडल. इसके साथ ही वह देशभक्ति के नारे लगाता नजर आया. इस शख्स का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
#WATCH | J&K: A tourist from Gujarat's Ahmedabad, paints himself in colours of the Tricolour, carries a mini model of BrahMos, waves the National Flag and chants 'Bharat Mata ki jai' as he celebrates the Republic Day at the iconic Ghanta Ghar at Lal Chowk in Srinagar. pic.twitter.com/CMtU96GZ5N
— ANI (@ANI) January 26, 2026
कश्मीर में जमा देने वाली ठंड के बीच गुजरात के अहमदाबाद से आए इस पर्यटक ने श्रीनगर के लाल चौक स्थित प्रतिष्ठित घंटाघर में गणतंत्र दिवस मनाते हुए खुद को तिरंगे के रंगों से रंगा, ब्रह्मोस का एक छोटा मॉडल लिया, राष्ट्रीय ध्वज लहराया और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए. इसके सीने पर भारत लिखा हुआ है. इस शख्स की देशभक्ति की भावना देख गर्व महसूस होता है. हालांकि, देश की आती है, तो हर शख्स में कुछ ऐसा ही जज्बा देखने को मिलता है.
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PM मोदी को मैसेज
मेरा नाम मदुन हरियाणवी है और मैं अहमदाबाद गुजरात से आया हूं. सबसे पहले मैं गणतंत्र दिवस की सभी को शुभकामनाएं देना चाहता हूं. मैं साल 2022 से यहां लगाता आ रहा हूं. आज मैं भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक मैसेज देना चाहता हूं. आज का युवा सिर्फ सपने ही नहीं देखता, बल्कि उन्हें अपनी आंखों के आगे पूरा होते हुए देखता है. मैं एक बार नरेंद्र मोदी जी से मिलना चाहता हूं.'

पहले चुनौती था, अब लाल चौक पर झंडा फहराने से डर नहीं लगता
श्रीनगर के लाल चौक को ही मदुन हरियाणवी ने क्यों चुना? उन्होंने बताया, 'एक समय था जब श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा लहराना किसी चुनौती से कम नहीं था. आतंकियों का डर था, लेकिन अब यहां के हालात बिल्कुल अलग है. बता दूं कि सबसे पहले यहां 1992 में नरेंद्र मोदी ने ही तिरंगा लहराया था, उस समय हालात बेहद खराब थे. लेकिन अब मैं यहां अकेला झंडा फहराने आता हूं और मुझे कोई डर नहीं लगता है. प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद ये बदलाव आया है. मैं चाहता हूं कि देश के हर हिस्से में ऐसे ही अमन और शांति बनी रहे.'
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