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पिता नहीं हैं, भाई मजदूरी करके चलाता है घर, अब दोबारा देंगे NEET; 19 साल का मग्गा राम, जो बनना चाहता है डॉक्टर

राजस्थान के 19 साल के मग्गा राम की जिंदगी जितनी चुनौती भरी है, उससे ज्यादा प्रेरणा उनकी कहानी से मिलती है. मग्गा राम के पिता नहीं है. भाई मजदूरी करके गुजारा चलाता है. मग्गा खुद डॉक्टर बनना चाहते हैं.

पिता नहीं हैं, भाई मजदूरी करके चलाता है घर, अब दोबारा देंगे NEET; 19 साल का मग्गा राम, जो बनना चाहता है डॉक्टर
मग्गा राम का दावा है कि नीट में उन्हें 600 नंबर मिले थे.
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बाड़मेर:

'मेरे गांव में अगर कोई बीमार हो जाता है तो उन्हें बहुत दूर जाना पड़ता है इलाज के लिए. इसलिए मैं नीट की पढ़ाई करके परीक्षा में सफल होकर डॉक्टर बनना चाहता हूं'

ये कहानी बाड़मेर के रेतीले धोरों के बीच खट्टू गांव के मग्गा राम की है. सिर्फ अपने सपने ही नहीं उनके छोटे से गांव की उम्मीदों का बोझ भी लेकर वो बाड़मेर की कोचिंग संस्थान 'विलेजर्स फिटी' में पहुंचे हैं मेडिकल की तैयारी करने के लिए.

19 साल के मग्गा राम पहली बार नीट की परीक्षा दे रहे हैं. 3 मई की परीक्षा में 600 से ऊपर नंबर आए थे और अब दोबारा परीक्षा में अच्छे नंबर लाने का दृढ़ लक्ष्य है.

बचपन में पिता की मौत हो गई थी. मग्गा राम 4 भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं. परिवार के पास 10 बीघा जमीन है, जिसमें सिर्फ बरसात में खेती हो पाती है. बाकी पिता मजदूरी करके बच्चों को पालते थे. जब पिता की मौत हो गई तो बड़े भाई राजेंद्र ने घर को संभाला.

राजेंद्र ने 10वीं तक पढ़ाई की लेकिन फिर पढ़ाई छोड़नी पड़ी क्योंकि परिवार, 2 बहनें और मां और छोटे भाई मग्गा राम की जिम्मेदारी उन पर आ गई थी. राजेंद्र कहते हैं, 'मग्गा राम पढ़ाई में बहुत अच्छा है. मेहनती भी है. मेरी तो पढ़ाई छूट गई लेकिन इसको पढ़ाना है ताकि ये आगे जा कर कुछ बन सके, हम बहुत उम्मीद लगा कर बैठे थे कि नीट में इस बार सफल हो जाएगा लेकिन पेपर ही लीक हो गया.'

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परिवार के सामने कई चुनौतियां आई हैं. संघर्ष जीवन का हिस्सा ही रहा. मग्गा राम ने आठवीं तक पढ़ाई गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खट्टू नारेबा बेरा में ही की. घर से पांच किलोमीटर रोज पैदल चल कर स्कूल जाते थे. पढ़ाई में अच्छे नंबर लाते थे तो भाई ने दसवीं के लिए 16 किलोमीटर दूर पचपदरा में दाखिला करा दिया.

बड़े भाई राजेंद्र ने बेलदारी और गुजरात की कारखानों  में मजदूरी करके छोटे भाई को पढ़ाया. फिर 11वीं में उससे कहा की विलेजर्स फिफ्टी में दाखिला लेने की कोशिश कर लो. 2012 में स्थापित विलेजर्स फिफ्टी एक निजी संस्थान है जो गांव के गरीब बच्चों को कोचिंग देता है. इस संस्थान ने अब तक 355 बच्चों को कोचिंग दी है, जिनमें से 135 मेडिकल फील्ड में है और 53 सरकारी कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं.

मग्गा राम ने इस संस्थान के लिए आवेदन किया. परीक्षा  पास की और फिर उनकी घर की आर्थिक स्थिति का वेरिफिकेशन किया गया, जिसके बाद उन्हें बाड़मेर में रहने, पढ़ने और कोचिंग की जगह मिली. 

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मग्गा राम के परिवार में मां और दो बहनें और एक भाई है. घर में मोटरसाइकिल या साइकिल तक की सुविधा नहीं है. परिवार पूरी तरह से या तो भाई की कमाई या खेती की फसल पर अपना गुजारा करने के लिए निर्भर है. घर में एक गाय और पांच बकरियां हैं. लेकिन घर की इन चुनौतियों के बावजूद मग्गा राम पढ़ाई में अच्छे नंबर लाने की क्षमता रखता था. 10वीं में 87% नंबर लेकर आया. मग्गा राम ने 12वीं में 93% अंक हासिल किए.

मग्गा राम का दावा है कि इस बार नीट की परीक्षा में 600 से ज्यादा अंक आ गए थे. अब परीक्षा दोबारा देनी पड़ रही है तो ये भी चुनौती स्वीकार है. मन लगाकर पढ़ना है क्योंकि पढ़ाई का रास्ता एक बेहतर जिंदगी का रास्ता है. मग्गा कहते हैं, 'मेरी मम्मी कहती है कि अगर ये पढ़ कर डॉक्टर बन गया तो इसके भाई को इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. पापा के गुजर जाने के बाद मेरे भाई ने बहुत मेहनत की है. हम सब को संभाला है.'

मग्गा के भाई राजेंद्र गुजरात के गांधीधाम में नमक की क्यारी में काम करते हैं. दो या डेढ़ महीने में एकाध बार घर आते हैं. 15 हजार रुपये महीने के कमा लेते हैं, जिससे घर का गुजारा होता है. लेकिन मग्गा राम का मकसद अब सिर्फ रीनीट देना है. 17-17 घंटे पढ़ाई कर रहे हैं. 

पश्चिमी राजस्थान के इस कठोर मरुस्थल में, जहां संघर्ष और मेहनत जीवन का हिस्सा हैं, मग्गा राम की कहानी सिर्फ एक बेटे के डॉक्टर बनने के सपने की नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद और प्रेरणा की मिसाल है, जो कठिन हालात के बीच भी अपने बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य का सपना देखना नहीं छोड़ते.

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