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बच्चों की काबिलियत को पहचानिए, साथ खड़े रहिए, सफलता कदम चूमेगी: अंजू बॉबी जॉर्ज

अंजू ने बच्चों से कहा कि खूब सपने देखो. लड़खड़ाने, गिरने पर भी सोचो You are good enough. So, dream & dream. सफलता ज़रूर कदम चूमेगी.

बच्चों की काबिलियत को पहचानिए, साथ खड़े रहिए, सफलता कदम चूमेगी: अंजू बॉबी जॉर्ज
नई दिल्ली:

बच्चों की काबिलियत को पहचानने निखारने में पेरेंट्स की भूमिका सबसे अहम होती है. अंजू बॉबी जॉर्ज को दुनिया इसलिए जान पाई क्योंकि पेरेंट्स का साथ मिला. मां का साथ मिला. 5 साल की उम्र में ट्रेनिंग शुरू हुई. आस पड़ोस के लोग कहने लगे क्योंकि स्पोर्ट्स में भेज रही हो? मेरी मां ने उनसे कहा  I can see her potential in sports. और बिना लोगों की परवाह किए बगैर वो मेरे साथ खड़ी रही. जब तक ट्रेनिंग होती थी वो दिन भर धूप में खड़ी होती थी. पेरेंट्स का साथ और उनके समर्पण के दम पर मैंने मुकाम हासिल किया. अंजू की इन बातों में भाव साफ छिपा था, बच्चे को समझिए, उसमें छुपे हुनर को पहचानिए. उसके साथ खड़े रहिए. फिर मंजिल उसके लिए दूर नहीं. ये बातें  सेठ आनंदराम जैपुरिया स्कूल के 21वें स्थापना दिवस पर पूर्व भारतीय एथलीट, ओलंपियन, अर्जुना, खेल रत्न पुरस्कार विजेता पद्मश्री अंजू बॉबी जॉर्ज ने कही. 

सेठ आनंदराम जैपुरिया ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष शिशिर जैपुरिया ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा शैक्षिक दर्शन नए युग की शिक्षा के तीन स्तंभों पर आधारित है: प्रासंगिकता, कर्मठता और चिंतन. हम विद्यार्थियों में नेतृत्व और भविष्य के लिहाज़ से उनको तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं." 

सेठ आनंदराम जैपुरिया ग्रुप की निदेशक ध्वनि जैपुरिया ने कहा हर बच्चा यूनीक है. हर में कुछ न कुछ अलग टैलेंट है. इसका ख्याल हम हमेशा रखते हैं. हम इस बात का भी ख्याल रखते हैं कि पेरेंट्स की भी जानकारी में उनके बच्चों का रिकॉर्ड रहे. संवाद स्कूल और उनके बीच हमेशा हो क्योंकि parents spectator नहीं, बल्कि स्कूल के पार्टनर हैं. ध्वनि ने कहा कि हमारे स्कूल में स्टूडेंट को सिर्फ करियर के लिहाज़ से तैयार नहीं किया जाता, लाइफ के मायने भी समझाए जाते हैं. 

स्कूल की डायरेक्टर प्रिंसिपल शालिनी नांबियार ने इस साल का रिपोर्ट कार्ड साझा किया. बताया कि किस तरह अलग अलग तरह की व्यवस्थाएं हमने स्कूल में समय समय पर बढ़ाई है. सफलता की गाथा लिखते छात्रों का ज़िक्र और समय के साथ साथ स्कूल में इनोवेशन पर खासा ध्यान उनके संबोधन में शामिल रहा. 

कार्यक्रम के दौरान छात्रों का मनोबल बढ़ाने को लेकर अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2004 की अपनी असफलता का का एक वाकया का ज़िक्र किया जिसमें बीमार होने के चलते भारत के लिए पदक लाने से वो चूक गई थीं, पर लगी रहीं और अगली बार गोल्ड उनकी झोली में आया. अंजू ने बच्चों से कहा कि खूब सपने देखो. लड़खड़ाने, गिरने पर भी सोचो You are good enough. So, dream & dream. सफलता ज़रूर कदम चूमेगी. साथ ही बच्चों से अंजू ने आह्वान किया कि जो भी हासिल करें. सीखें. समाज को लौटाएं. Giving बैक टू द सोसाइटी की भावना होनी चाहिए.
 

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