- एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है और अब कार्रवाई की संभावना है
- मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मंदिर से जुड़े लोगों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश एसआईटी ने दिया है
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोपों को साजिश करार दिया और एसआईटी से सत्य सामने लाने की बात कही है
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी जानकारी सामने आई है. SIT ने इस मामले में सीएम योगी से मुलाकात की है. अब सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि SIT किसी भी समय सीएम योगी को अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. माना जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में कड़ी कार्रवाई हो सकती है. आपको बता दें कि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी.
सीएम से मिलने के लिए आने से पहले एसआईटी ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मंदिर से जुड़े लोगों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश दिया है. ट्रस्ट में अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका जांच के दायरे में है.
इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि अयोध्या को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) सच्चाई सामने लाएगा. अयोध्या के श्री मणिराम दास छावनी में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की 88 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक समारोह में आदित्यनाथ ने राम मंदिर में दान राशि के दुरुपयोग के आरोपों की एसआईटी जांच के बीच यह टिप्पणी की.
15 दिन इंतजार करने की अपील
विवाद का जिक्र करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘अयोध्या को बदनाम करने और श्री राम जन्मभूमि के बारे में सवाल उठाने के प्रयास किए जा रहे हैं. जब भी भारत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ा है, साजिशकर्ताओं की नींद उड़ गई है और वे साजिश रचने लगे हैं. वही साजिश फिर से शुरू हो गई है. जो लोग कभी अयोध्या नहीं आए, वे आज राम भक्ति के बारे में बात कर रहे हैं. जिन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया और राम भक्तों की आस्था का अपमान किया, वे अब राम भक्ति के बारे में बात कर रहे हैं. हमने 500 साल इंतजार किया. क्या हम 15 दिन इंतजार नहीं कर सकते? हमें किसी की साजिश में नहीं फंसना चाहिए. एसआईटी का गठन किया गया है और यह दूध का दूध एवं पानी का पानी अलग कर देगी. अगर किसी के पास सबूत है तो उन्हें इसे एसआईटी को सौंपना चाहिए और इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहिए. जो भी आरोप लगाएगा उसे नोटिस मिलने पर सबूत देना होगा.''
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