राहुल गांधी के भगवान शिव को लेकर दिए गए बयानों पर पहले से ही चर्चा होती रही है. संसद में एक बार बोलते हुए राहुल गांधी ने भगवान शिव की तस्वीर भी दिखाई थी. राहुल गांधी भगवान शिव को अपना आराध्य मानते हैं और इसके बारे में बोलते भी रहे हैं.
एक बार कैलाश मानसरोवर की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था कि 'शिव ही ब्रह्माण्ड है'. अभी तक आपको लग रहा होगा कि मैं राहुल गांधी और भगवान शिव की बात यहां क्यों कर रहा हूं.
इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि 'ये शिव की बारात है, इसमें कोई भी आ सकता है हम रोकेंगे नहीं.'
राहुल गांधी के इस बयान के कई मतलब लगाए जा रहे हैं. इसका एक अर्थ ये था कि कनॉट प्लेस में लंच पर जो दो बार इंडिया गठबंधन के सांसद जुटे थे उसके बाद मीडिया में ये खबरें आईं कि आज समाजवादी पार्टी के लोग नहीं थे,उद्धव ठाकरे की शिवसेना नाराज है.
इसी को देखते हुए राहुल गांधी को शिव की बारात वाली बात कहनी पड़ी कि अब किसी को न्यौता नहीं जो भी आना चाहे आ जाए. दूसरा ये मतलब लगाया गया कि यह न्योता कॉकरोच जनता पार्टी के लिए भी हो सकता है.
राहुल गांधी के बयान के बाद अभिजीत दीपके का बयान आया कि 'जरूरी है सारे देश को इकट्ठा होकर ऐसे प्रोटेस्ट करने की'
यही नहीं दीपके ने यह भी कहा कि 'कल जो इंडिया ब्लॉक का दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हुआ, उसकी मैं इंडिया ब्लॉक को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं. काफी बड़ा प्रोटेस्ट था और बहुत जरूरी प्रोटेस्ट था. जरूरी है सारे देश को इकट्ठा होकर ऐसे प्रोटेस्ट करने की और खास करके इंडिया ब्लॉक को, क्योंकि वो अपोजिशन में है. और आगे भी ऐसे ही प्रोटेस्ट चलते रहेंगे देश भर में, जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होता, इसकी हम उम्मीद करते हैं.'
कहने का मतलब है कि अभिजीत दीपके को भी पता है कि देश भर में आंदोलन चलाने के लिए विपक्षी दलों का समर्थन लेना जरूरी होगा. वहीं कांग्रेस नेतृत्व को यह लगता है कि यदि युवाओं खासकर जेन जी को आंदोलन में जोड़ना है तो कॉकरोच जनता पार्टी को भी अपने साथ जोड़ना पड़ेगा.
हालांकि इंडिया गठबंधन के कई नेताओं का यह भी मानना है कि कॉकरोच जनता पार्टी यदि चुनाव में उतरती है तो नुकसान विपक्ष का ही होगा क्योंकि विपक्ष के वोटों का और बंटवारा होगा. मगर इन सब बहस के बावजूद राहुल गांधी का ये बयान सटीक बैठता है कि विपक्ष का आंदोलन शिव की बारात है जिसको भी शामिल होना है आ सकता है.
अभी फिलहाल त्योहारों को देखते हुए इंडिया गठबंधन ने धरना प्रदर्शनों पर कुछ दिनों के लिए विराम लगाया है. वैसे कांग्रेस और अन्य दलों के छात्र संगठन धरना प्रदर्शन करते रहेंगे जबकि इंडिया गठबंधन का पूरा फोकस 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली पर है क्योंकि उसे विपक्ष के शक्ति परीक्षण के तौर पर देखा जाएगा.
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