- जंतर-मंतर को डी-नोटिफाई किए जाने के बाद प्रोटेस्ट की कोशिश करने पर सीजेपी के सौरव और आशुतोष को जेल.
- आशुतोष रांका और सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया है.
- राहुल गांधी बोले- सभी प्रोटेस्ट एक हैं, जंतर-मंतर भारत के लोगों का है, हम वापस लेंगे.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में पहली बार सार्वजनिक रूप से बोलते हुए, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट की वजह से पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी की आलोचना की. इस समर्थन के बाद सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने थोड़ी ही देर में राहुल की पोस्ट पर धन्यवाद दिया. केंद्र सरकार द्वारा जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई करने के बाद, वहां बिना इजाजत घुसने के आरोप में CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को बुधवार सुबह पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
इसके बाद, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है. इसके लिए युवाओं को जेल में डालना कायरतापूर्ण काम है."
Waving the Tricolour at Jantar Mantar in a peaceful protest is not a crime. Jailing youth for it is an act of cowardice. Students. Youth. Journalists. The INDIA bloc. Different banners, one cause. All protests are one: citizens demanding their constitutional rights. Jantar Mantar belongs to the people of India. We will reclaim it.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 14, 2026
राहुल ने कहा कि अलग-अलग सिविल सोसाइटी ग्रुप, छात्रों और INDIA ब्लॉक के विरोध-प्रदर्शन असल में एक ही आंदोलन का हिस्सा हैं, भले ही उनके बैनर अलग-अलग हों. छात्र, युवा, पत्रकार, INDIA ब्लॉक... बैनर अलग-अलग हैं, लेकिन मकसद एक है. सभी विरोध-प्रदर्शन एक ही हैं: नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं.
CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने समर्थन के लिए राहुल गांधी का शुक्रिया अदा किया.
Thank you, LoP @RahulGandhi sir, for speaking out against the illegal arrest of @AshutoshRanka & @SauravDassss
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) October 14, 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अलग-अलग गुटों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, राहुल गांधी यह कहते रहे हैं कि ये सभी विरोध प्रदर्शन एक ही हैं.
यह बात ऐसे वक्त में सामने आई है, जब राहुल गांधी के जुलाई की शुरुआत में और हालिया विरोध प्रदर्शन के दौरान CJP नेतृत्व के साथ मंच साझा करने से बचने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

इस धारणा को गलत साबित करने के लिए, राहुल गांधी ने सोमवार को दिल्ली में मार्च के दौरान AISA की लीडर नेहा बोरा को अपने और प्रियंका गांधी के साथ मार्च में चलने के लिए बुलाया. उन्हें मंगलवार को राहुल गांधी की चाय पार्टी में भी बुलाया गया था, जिसमें कई अन्य सिविल सोसाइटी ग्रुप भी शामिल थे. हालांकि, सीजेपी को इस सभा में नहीं बुलाया गया था.
मंगलवार सुबह सीजेपी नेताओं सहित 14 लोगों को हिरासत में लिया गया, क्योंकि वे गेट और बैरिकेड्स फांदकर जंतर-मंतर में घुस गए थे. इसके बाद उन्होंने तिरंगा लहराया और नारे लगाए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया. उन पर बिना इजाजत जंतर-मंतर इलाके में घुसने और जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया. उन्होंने ये शर्तें एक दिन पहले ही मानी थीं, जब 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए दिल्ली पहुंचने पर उन्हें उनके विमान से हिरासत में लिया गया था.
Cockroaches with the Tiranga sneaked into Jantar Mantar early this morning before they were picked up by Delhi Police. @AshutoshRanka, @SauravDassss, @AjinkyaCJP along with other team members have been detained. You cannot denotify the resistance, @narendramodi https://t.co/x7B40akCVO
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) October 13, 2026
सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके, पार्टी नेता आशुतोष रांका और सौरव को इस शर्त पर जमानत मिली थी कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे. पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर उनके अचानक किए गए विरोध प्रदर्शन ने उनकी जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया.
अपने साथियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने कहा: "मुझे देश की चिंता है. इस देश में तिरंगा लहराना कब से शांति भंग करना हो गया है?"
सीजेपी नेताओं को और भी कई सियासी नेताओं का भी समर्थन मिला है. आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने CJP नेताओं को जेल भेजने को बेतुका बताया. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "क्या अपने ही देश में अपना झंडा लहराना अपराध है? यह बिल्कुल बेतुका है."
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी भी सीजेपी के समर्थन में सामने आए हैं और इसके सदस्यों को जेल में डालने की निंदा की है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "तथाकथित सबसे बड़े राष्ट्रवादी अब अपने ही देश में तिरंगा फहराने और लहराने के लिए भारतीयों को गिरफ्तार कर रहे हैं, जो केंद्र सरकार के मुताबिक शांति का उल्लंघन है."
डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन और यूबीटी सेना नेता आदित्य ठाकरे ने भी सीजेपी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की निंदा की.
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