राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी सामने आई. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिकायतकर्ता पक्ष से कहा कि यदि वह मामले की शीघ्र सुनवाई चाहता है तो इसके लिए औपचारिक आवेदन दाखिल करे. अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के समक्ष सभी व्यक्ति समान हैं और निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है. मामला राहुल गांधी की दिसंबर 2022 में भारतीय सेना और भारत-चीन सीमा तनाव को लेकर की गई टिप्पणी से जुड़ा हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ के समक्ष इस मामले का जिक्र किया गया. शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि राहुल गांधी की याचिका करीब पांच महीने से सूचीबद्ध नहीं हो पाई है. उन्होंने दलील दी कि राहुल गांधी कोई वीवीआईपी नहीं हैं और मामले की सुनवाई में देरी हो रही है.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह भी कहा कि उचित आवेदन दाखिल किए जाने पर अदालत उस पर विचार करेगी.
क्या है पूरा मामला?
ये मामला राहुल गांधी के 16 दिसंबर 2022 के एक बयान से जुड़ा है. राहुल गांधी ने भारत-चीन सीमा पर 9 दिसंबर 2022 को हुई झड़प के संदर्भ में कहा था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं. इस बयान को लेकर सीमा सड़क संगठन (BRO) के पूर्व निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव ने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी. उनका आरोप है कि यह टिप्पणी भारतीय सेना की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली और मानहानिकारक थी. श्रीवास्तव की रैंक सेना के कर्नल के समकक्ष थी.
निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
शिकायत पर सुनवाई करते हुए लखनऊ की एक अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था. इसके खिलाफ राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया. इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ मामले में उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा चुकी है.
पहले भी उठा था बयान पर सवाल
मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया था कि राहुल गांधी ने यह मुद्दा संसद के बजाय सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर क्यों उठाया. अदालत ने यह भी पूछा था कि क्या उनके बयान किसी विश्वसनीय सामग्री या तथ्यात्मक आधार पर आधारित थे.
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