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13 करोड़ नाम हटाने के आरोप; CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'सुप्रीम' सुनवाई 5 अक्टूबर को, SIR और ECINet को चुनौती

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 5 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. याचिकाओं में SIR प्रक्रिया, ECINet-ERONet में बदलाव, आयोग की निर्णय प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है.

13 करोड़ नाम हटाने के आरोप; CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'सुप्रीम' सुनवाई 5 अक्टूबर को, SIR और ECINet को चुनौती
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 5 अक्टूबर को
अल्टर्ड बाय NDTV
  • सुप्रीम कोर्ट में 5 अक्टूबर को सुनवाई, SIR और ECINet फैसलों पर उठे सवाल
  • 13 करोड़ नाम हटाने के आरोपों पर SIT जांच की मांग
  • मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दो याचिकाएं, सुप्रीम कोर्ट में होगी अहम सुनवाई
नई दिल्ली:

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल दो महत्वपूर्ण याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 5 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. याचिकाओं में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान, ECINet और ERONet प्लेटफॉर्म में कथित तकनीकी बदलाव, निर्वाचन आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ताओं ने कुछ फैसलों को असंवैधानिक घोषित करने, ECINet-ERONet का फॉरेंसिक ऑडिट कराने, 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच के लिए SIT या न्यायिक आयोग गठित करने तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को चुनावी व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

तीन सदस्यीय बेंच करेगी सुनवाई

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी दोनों याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार 5 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित की गई है.

मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ करेगी.

याचिकाकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग से जुड़े कई प्रशासनिक, तकनीकी और वैधानिक फैसलों की न्यायिक समीक्षा की मांग की है.

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शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में क्या मांग हैं?

पहली याचिका शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और निर्वाचन आयोग की महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कुछ फैसले और दिशा-निर्देश कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लागू किए गए.

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि ऐसे सभी निर्णयों, निर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक और शून्य घोषित किया जाए.

14 आपत्तियों का किया गया जिक्र

याचिका में आरोप लगाया गया है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 अवसरों पर लिखित आपत्तियां या असहमति दर्ज कराई थीं. याचिकाकर्ता का दावा है कि इन आपत्तियों के बावजूद संबंधित फैसलों को निर्वाचन आयोग के निर्णय के रूप में लागू किया गया. हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया है कि संबंधित पत्राचार एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति से जुड़ा था और उसका नीति या आईटी मामलों से कोई संबंध नहीं था.

ECINet और ERONet की फॉरेंसिक जांच की मांग

याचिका में ECINet और ERONet प्लेटफॉर्म से जुड़े तकनीकी बदलावों की फॉरेंसिक जांच कराने की भी मांग की गई है. इसके तहत सर्वर लॉग, डेटाबेस, संचार रिकॉर्ड और मेटाडेटा को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि इन प्रणालियों में किए गए परिवर्तनों की स्वतंत्र तकनीकी जांच आवश्यक है.

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Form-6 में बदलाव को भी चुनौती

याचिका में मतदाता पंजीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले Form-6 में कथित बदलावों को भी चुनौती दी गई है. आरोप है कि ECINet पोर्टल पर ऐसे अतिरिक्त विवरण मांगे गए जो आवेदक या उसके परिवार के सदस्य की पूर्व SIR मतदाता सूची में मौजूदगी से संबंधित थे. याचिकाकर्ता ने मूल वैधानिक Form-6 को बहाल करने की मांग की है.

13 करोड़ नाम हटाने के आरोप की जांच की मांग

याचिका में SIR के दौरान लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) या न्यायिक जांच आयोग गठित करने की मांग की गई है. साथ ही ECINet और ERONet डेटाबेस का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग उठाई गई है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े कथित 16.10 लाख अपील मामलों की परिस्थितियों की जांच की भी मांग की गई है.

आपराधिक कार्रवाई की मांग

याचिका में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत ज्ञानेश कुमार, मनीष गर्ग, सीमा खन्ना और जांच में दोषी पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई या अभियोजन शुरू करने की भी मांग की गई है. मामले में प्रतिवादी के तौर पर केंद्र, निर्वाचन आयोग, ज्ञानेश कुमार, कैबिनेट सचिव, मनीष गर्ग और सीमा खन्ना को नामित किया गया है.

दूसरी याचिका में आयोग की सामूहिक शक्ति का मुद्दा

दूसरी याचिका राकेश कुमार सिंह ने दायर की है. इसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण किसी एक व्यक्ति को नहीं बल्कि निर्वाचन आयोग को एक संस्था के रूप में दिया गया है. याचिकाकर्ता के मुताबिक CEC आयोग के अध्यक्ष हैं, लेकिन आयोग की सामूहिक शक्ति का अकेले इस्तेमाल करने का अधिकार उन्हें नहीं है.

CEC से अधिकार का आधार बताने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मांगे गए हैं और इसके तहत CEC ज्ञानेश कुमार से यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का इस्तेमाल किया और कर रहे हैं. 

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से निर्वाचन आयोग के मूल रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग, बैठक के एजेंडे और कार्यवृत्त, मंजूरी संबंधी दस्तावेज, पत्राचार तथा अन्य रिकॉर्ड मंगाने की भी मांग की है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि विवादित फैसले संविधान और 2023 के कानून के अनुरूप लिए गए थे या नहीं.

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि निर्वाचन आयोग के नाम से जारी होने वाले पत्र, आदेश, निर्देश और अपील आयोग के विधि-सम्मत निर्णय के आधार पर ही जारी हों. इसके अलावा आयोग की बैठकों के एजेंडे पहले से प्रसारित करने और बैठकों के बाद कार्यवृत्त दर्ज करने की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता के मुताबिक, मतभेद की स्थिति में आयोग का निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाना चाहिए, जैसा कि 2023 के कानून की धारा 18 में प्रावधान है.

SIR प्रक्रिया को भी दी गई चुनौती

राकेश कुमार सिंह की याचिका में देशभर में चल रहे SIR अभियान और उससे संबंधित कार्रवाइयों को भी चुनौती दी गई है. मांग की गई है कि यदि रिकॉर्ड की जांच में यह पाया जाता है कि SIR से जुड़े निर्णय आवश्यक संवैधानिक या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए गए, तो उन्हें शुरू से ही शून्य घोषित किया जाए.

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि मामले की सुनवाई लंबित रहने तक ज्ञानेश कुमार को CEC की शक्तियों का उपयोग करने से रोका जाए.

साथ ही अंतरिम अवधि में आयोग का कामकाज अन्य दो चुनाव आयुक्तों के माध्यम से संचालित कराने की मांग की गई है. इसके अलावा SIR से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक रिकॉर्ड, डेटाबेस, ऑडिट ट्रेल, सर्वर लॉग और आईटी एक्सेस रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की भी मांग की गई है.

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