70 साल के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल, घर का सूना कमरा और बिस्तर पर खून से लथपथ पड़ी लाश. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुए इस हाईप्रोफाइल कत्ल को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन कातिल अब भी पुलिस की पकड़ से दूर खुली हवा में सांस ले रहा है.चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस का शक किसी और पर नहीं, बल्कि उस कातिल 'मेल नर्स' वरुण पर जाकर टिका है, जिसे खुद अग्रवाल साहब ने अपनी स्लिप डिस्क के दर्द से राहत पाने के लिए वारदात से महज 72 घंटे पहले ही काम पर रखा था. इस खौफनाक हत्याकांड के बाद पुलिस की टीमें चार राज्यों के जंगलों और शहरों की खाक छान रही हैं. इस बीच पुलिस के हाथ एक बहुत बड़ी कामयाबी लगी है. कातिल भागते समय राकेश अग्रवाल का जो मोबाइल फोन अपने साथ लूटकर ले गया था, उसे पुलिस ने भोपाल से करीब 524 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के आगरा से बरामद कर लिया है. सूत्रों का कहना है कि इस हत्याकांड में 5 करोड़ के निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का भी एंगल है लेकिन फिलहाल भोपाल पुलिस इसे कन्फर्म नहीं कर रही है.

Rakesh Agrawal murder: रिटायर्ड IAS अशोक अग्रवाल की हत्या के बाद केयरटेकर वरुण घर से भागते हुए CCTV में केद हुआ.
कब और कैसे हुई थी यह वारदात?
यह वारदात 30 सितंबर 2026 की रात भोपाल के पॉश इलाके सूरजनगर में स्थित राकेश अग्रवाल के बंगले में हुई. 1982 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल रात में जब अपने कमरे में सो रहे थे, तभी धारदार हथियार से उनका गला रेतकर बेरहमी से कत्ल कर दिया गया.वारदात के बाद अलमारियों के ताले तोड़कर लूटपाट भी की गई. कातिल ने हत्या के सबूत मिटाने के लिए किचन में रखे एलपीजी सिलेंडर का पाइप निकाल दिया और पास में ही गर्म इलेक्ट्रिक प्रेस चालू छोड़ दी, ताकि गैस फैलने से घर में आग लग जाए और पूरा मामला हादसा लगे.अगली सुबह करीब 5:30 बजे जब उनकी पत्नी निशि अग्रवाल सुबह की सैर के लिए उठीं, तो घर का मुख्य दरवाजा बाहर से बंद मिला. इसके बाद घरेलू सहायक की मदद से गेट खोला गया, तब कमरे में राकेश अग्रवाल का खून से लथपथ शव बरामद हुआ.

Rakesh Agrawal murder: रिटायर्ड IAS अशोक अग्रवाल की हत्या का मुख्य आरोपी वरुण ने अपना पैन कार्ड भी दिया था नौकरी के दौरान. उसका कैरेक्टर सर्टिफिकेट पटियाला की एक एंजेसी ने जारी किया था.
10 दिनों में बदले गए थे तीन केयरटेकर
जांच में सामने आया है कि रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल काफी समय से स्लिप डिस्क की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे. इसी वजह से उन्हें लगातार फिजियोथेरेपी और मेडिकल केयर की जरूरत रहती थी. हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले 10 दिनों के भीतर ही वे दो केयरटेकर बदल चुके थे. उनका पहला केयरटेकर महज 4 दिन में ही काम छोड़कर चला गया था और दूसरा केयरटेकर भी सिर्फ 3 दिन ही टिका था. आरोपी वरुण कुमार इस घर में आने वाला तीसरा केयरटेकर था, जिसे पटियाला की एक प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था.
भोपाल से पटियाला तक फैली जांच
पुलिस को तफ्तीश के दौरान आरोपी वरुण कुमार के बारे में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं. बताया जा रहा है कि वरुण कुमार ने पिछले साल 1 मई 2025 को पंजाब के पटियाला से अपना पुलिस कैरेक्टर सर्टिफिकेट यानी चरित्र प्रमाण पत्र बनवाया था. इस जानकारी के मिलते ही भोपाल पुलिस की एक विशेष टीम पंजाब के पटियाला भी पहुंच चुकी है. पुलिस वहां उस प्लेसमेंट एजेंसी और उन लोगों से पूछताछ कर रही है, जिन्होंने वरुण को इस नौकरी के लिए रिकमेंड किया था.
बीना और आगरा के रास्ते भागा आरोपी
हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वरुण कुमार खुद राकेश अग्रवाल का ही मोबाइल फोन जेब में डालकर भागा था. पुलिस की टेक्निकल टीम और साइबर सेल ने जब मोबाइल की लोकेशन को ट्रेस करना शुरू किया, तो पता चला कि कातिल भोपाल से भागने के बाद सबसे पहले बीना रेलवे स्टेशन पहुंचा था. इसके बाद वह ट्रेन पकड़कर आगरा की तरफ रवाना हो गया. पुलिस टीमों ने इसी लोकेशन के आधार पर उत्तर प्रदेश के आगरा से राकेश अग्रवाल का मोबाइल फोन तो बरामद कर लिया है, लेकिन आरोपी वरुण अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.
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5 करोड़ की धोखाधड़ी और कोर्ट में गवाही का एंगल
बताया जा रहा है कि राकेश अग्रवाल ने पिछले 11 महीनों में दो लोगों के खिलाफ निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने के मुकदमे दर्ज कराए थे. इनमें से एक मामला परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ 1 करोड़ रुपये का है, जबकि दूसरा केस एक अन्य निवेशक पर 4 करोड़ रुपये की ठगी का है. इन दोनों ही मामलों की कोर्ट में सुनवाई जारी है और अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही राकेश अग्रवाल की अहम गवाही दर्ज होनी थी. हांलांकि मामले की जांच में जुटी इसकी पुष्टि नहीं कर रही है. जानकार ये भी आशंका जताई जा रहे हैं कि इसी गवाही को रोकने या किसी पुराने वित्तीय विवाद के चलते इस वारदात की पटकथा लिखी गई होगी. बहरहाल जो भी हो वरुण की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरी साजिश का असली सच सामने आ पाएगा ऐसा पुलिस मान रही है.
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