- राघव चड्ढा ने NEET पेपर लीक मामले पर अब तक चुप रहने का कारण सदन में विस्तार से बताया
- उन्होंने कहा कि पेपर लीक की समस्या का स्थायी समाधान मीडिया साउंडबाइट्स से नहीं बल्कि संस्थागत सुधार से होगा
- राघव ने कहा कि विपक्ष में सवाल उठाना उनका काम था, अब सत्ता पक्ष में समाधान देना उनकी जिम्मेदारी है
NEET पेपर लीक मामले पर राघव चड्ढा की चुप्पी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे. गुरुवार को उन्होंने इस मामले पर चुप्पी तोड़ दी. साथ ही राघव ने ये भी बताया कि वे अब तक इस पर चुप क्यों थे. इस बात का जवाब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को सदन में दिया. उन्होंने सदन में बताया कि NEET पेपर लीक के जिस मुद्दे ने पूरे देश में हलचल मचा दी है, वे अब तक चुप क्यों रहे?
एंटी पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान जोरदार भाषण में पूर्व AAP नेता ने छात्रों का दर्द महसूस करने की बात करते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी सीरियस बीमारी का परमानेंट इलाज करना होगा. उन्होंने कहा कि जिस तरह कैंसर का इलाज क्रोसिन खिलाकर नहीं किया जा सकता वैसे ही पेपर लीक जैसी बीमारी का इलाज "मीडिया साउंडबाइट्स" से नहीं, बल्कि "संस्थागत समाधान" से होगा, हो आज हमारी सरकार इस बिल के माध्यम से करने जा रही है.
VIDEO | Delhi: "Paper leaks cannot be addressed through media soundbites but require an institutional solution, which govt is bringing through the Bill," says BJP MP Raghav Chadha in Rajya Sabha during debate on anti-paper leak Bill.
— Press Trust of India (@PTI_News) July 30, 2026
(Source: Sansad TV) pic.twitter.com/jackRKi73M
मैं नीट छात्रों का दर्द समझता हूं
वहीं नीट स्टूडेंट्स के गुस्से पर राघव ने कहा कि ये गुस्सा जस्टिफाइड है. आपका दर्द रियल है. राघव ने नीट स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए सदन से कहा कि एग्जामिनेशन सिस्टम से आपकी जो भी शिकायत है वह जेनुअन है. आपकी आवाज मायने रखती है. आपने जब चिंता जताई औपर अपना दर्द बताया तो पीएम मोदी ने गार्डियन और परिवार के मुखिया की तरह उस बात को सुना और एक्शन भी लिया. उन्होंने कहा कि जब एक छात्र नीट जैसे पब्लिक एग्जाम की तैयारी करता है तो वह अकेला तैयारी नहीं करता बल्कि उसका पूरा परिवार भी तैयारी करता है. मां अपनी छोटी-छोटी जरूरतें रोक देती है और घर का बजट कम करती है. पिता परिवार की सेविंग्स को कोचिंग फीस, रेंट और टेस्ट सीरीज पर खर्च करता है.
इतना ही नहीं लोन भी लेना पड़ता है.
छात्र नीट की तैयारी के लिए दिन रात मेहनत करते हैं
छात्र घर से दूर जाकर कोटा, जयपुर, चंडीगढ़, दिल्ली, पटना जैसे शहरों में रहते हैं और दिन में अठारह-अठारह घंटे पढ़ते हैं. रात को भी वे दो बजे तक पढ़ाई करते हैं. फिर अलार्म लगाकर सुबह पांच बजे क्लास के लिए उठ जडाते हैं. परिवार से दूर कोई सोशल लाइफ नहीं कोई त्यौहार फेस्टिवल नहीं, सोशल मीडिया से दूर और अपनी स्लीप और अपनी हेल्थ से भी कॉम्प्रोमाइज करते हैं. क्यों कि वे ये बात जानते हैं कि जब वह पेपर लिखेगा तो सिर्फ पेपर नहीं अपनी फैमिली के लिए अच्छा फ्यूचर लिखने जा रहा है. फिर एक दिन एग्जाम की तारीख पर उसे पता लगता है कि तीन साल से वो जिस पेपर की तैयारी कर रहा था उस पेपर को किसी ने पहले ही पैसे देकर हासिल कर लिया, यानी कि पेपर लीक हो गया.
पेपर लीक से छात्र टूट जाता है
राघव ने कहा कि इस समय सर सिर्फ पेपर लीक नहीं होता, उस छात्र की मेहनत, उसके सपने, उसका खुद पर से विश्वास, उसका ट्रस्ट, उसकी एस्परेशन ये सब लीक होता है. इसका असर उनकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर भी होता है. उन्होंने कहा कि वे इस दर्द को अच्छी तरह समझ सकते हैं, क्यों कि कुछ साल पहले वे देश के एक पब्लिक एग्जामिनेशन सिस्टम, चार्टेड अकाउंटेंसी के स्टूडेंट थे.
'अब मेरी भूमिका बदल गई है'
राघव ने कहा कि कई लोगों ने उनके चुप रहने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उन्होंने देश के नागरिकों की समस्याओं के बारे में सवाल उठाकर ईमानदारी से अपना काम किया, लेकिन अब उनकी भूमिका बदल गई है. उनका ध्यान अब समस्या का समाधान खोजने पर है. पहले जब वे विपक्ष में थे तो सवाल उठाना उनका काम थ, जिसे उन्होंने ईमानदारी से किया. अब मैं सत्ता पक्ष में हैं तो अब जिम्मेदारी सवाल पूछना नहीं, बल्कि समाधान देना है.उन्होंने कहा कि सुर्खियों में रहने या कैमरों के सामने बोलकर अपने आप को दिखाने की उनको जरूरत नहीं है. उनको मतलब है सिर्फ नतीजे से.
राघव ने कहा कि उन्होंने खुद से वादा किया था कि वह संसद में इस मामले पर तभी बोलेंगे, जह इसका कोई समाधान निकाल लिया जाएगा. जब सिस्टम को ठीक किया जा रहा होगा।और आज वही ऐतिहासिक दिन है जब सिस्टम को ठीक किया जा रहा है.
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