उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के बीच आई 'खड़े हनुमान' की प्रतिमा को हटाने का तरीका अब IIT इंदौर की टीम ढूंढेगी. दरअसल कटर और भारी मशीनों से प्रतिमा को हटाने की कोशिशें एक तो सफल नहीं हुई और दूसरा श्रद्धालुओं ने भी इसका विरोध किया. अब उज्जैन नगर निगम ने IIT इंदौर से मदद मांगी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रतिमा जमीन में कितनी गहराई तक है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए दूसरी जगह कैसे स्थापित किया जा सकता है ? नगर निगम का कहना है कि प्रतिमा हटेगी या नहीं और हटेगी तो कैसे, इसका फैसला IIT इंदौर की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा.
IIT इंदौर की टीम ने किया निरीक्षण
उज्जैन नगर निगम (UMC) आयुक्त अभिलाष मिश्रा के मुताबिक मंदिर के पुजारी के अनुरोध पर IIT इंदौर की टीम को बुलाया गया था. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है या नहीं, इसका आकलन किया जा रहा है. प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया और तारीख IIT की रिपोर्ट आने के बाद तय होगी. IIT इंदौर की टीम ने मंगलवार को विशेष उपकरणों की मदद से प्रतिमा की गहराई और उसके आसपास की मिट्टी का अध्ययन किया. अधिकारियों के मुताबिक परमार वंश काल की बड़ी प्रतिमाएं अक्सर इंटरलॉकिंग तकनीक से स्थापित की जाती थीं. खड़े हनुमान की प्रतिमा मालवा क्षेत्र के मजबूत बेसाल्ट पत्थर से निर्मित बताई जा रही है.
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रोड चौड़ीकरण परियोजना में आ रहा मंदिर
कांठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है, जिसके तहत सड़क की चौड़ाई लगभग 15 मीटर बढ़ाई जानी है. यह मंदिर परियोजना की जद में आ रहा है. नगर निगम ने पहले कटर और भारी मशीनों की मदद से प्रतिमा को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन श्रद्धालुओं ने विरोध जताया और आशंका व्यक्त की कि ऐसा करने से प्रतिमा को नुकसान पहुंच सकता है. मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने प्रशासन से आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की मदद से प्रतिमा का परीक्षण कराने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रतिमा को पूरी जांच के बाद ही स्थानांतरित किया जाना चाहिए. स्थानीय लोगों ने भी इसी मांग को लेकर नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा था.
फिलहाल प्रतिमा को ढककर सुरक्षित रखा गया
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिमा को हटाना आसान नहीं है क्योंकि यह आस्था से जुड़ा विषय है. फिलहाल प्रतिमा की सुरक्षा के लिए उसके ऊपर एक अस्थायी शेड (कैनोपी) लगाया गया है. अब सभी की निगाहें IIT इंदौर की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.
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