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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर नोएडा के छात्र को मिला 5 लाख का नोटिस, फिर लिया वापस

GBU Student 5 Lakh Notice: गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के छात्र को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल होने और छात्रों को उकसाने के आरोप में नोटिस जारी किया गया था, जिसे दो दिन बाद वापस भी ले लिया गया.

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर नोएडा के छात्र को मिला 5 लाख का नोटिस, फिर लिया वापस
गौतमबुद्धनगर यूनिवर्सिटी के छात्र को पुलिस ने जारी किया था नोटिस

ग्रेटर नोएडा में गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के एक छात्र को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लेने को लेकर 5 लाख रुपये का नोटिस जारी किया गया. ग्रेटर नोएडा एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की तरफ से ये नोटिस जारी किया गया था, जिसमें शांति बनाए रखने को लेकर पांच लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड को भरने की बात कही गई थी. इस नोटिस के मिलने के बाद अब छात्र ने सामने आकर आरोपों को खारिज किया है और बताया है कि उसने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और इस दौरान यूनिवर्सिटी में क्लासेस नहीं चल रही थीं. 

पांच लाख रुपये के बॉन्ड का नोटिस

4 सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत ये नोटिस जारी किया गया था. नोटिस में अक्षत त्रिपाठी नाम के छात्र से कहा गया कि 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और दो स्थानीय सक्षम व्यक्तियों से उतनी ही राशि की जमानत देने का आदेश क्यों न दिया जाए. इस मामले में 5 सितंबर को सुनवाई तय की गई थी. हालांकि अब पुलिस ने बताया है कि 4 सितंबर को ही नोटिस को रद्द कर दिया गया था.

छात्र पर क्या लगाए गए आरोप? 

इकोटेक-1 (Ecotech-1) थाने के सब-इंस्पेक्टर शिवा पांडे की तरफ से सौंपी गई पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, अक्षत त्रिपाठी मूल रूप से प्रयागराज के झूंसी का रहने वाला है और फिलहाल इकोटेक-1 क्षेत्र में रहकर GBU में पढ़ाई कर रहा है. पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि अक्षत एक राजनीतिक दल के प्रदर्शन में शामिल हुआ और इसके लिए उसने यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों को उकसाया. साथ ही भ्रामक और सरकार विरोधी बातें फैलाने का जिक्र भी रिपोर्ट में था. पुलिस ने दावा किया कि छात्र के इस रवैये से कैंपस में तनाव का माहौल बन गया था और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका थी.

छात्र ने बताया क्या है सच

नोटिस जारी होने के बाद अब  छात्र ने सामने आकर बताया है कि उस पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं. उसने बताया कि जब प्रदर्शन किया गया, तब यूनिवर्सिटी करीब तीन महीने से बंद थी. ऐसे में छात्रों को भड़काने या माहौल बिगाड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता है. अक्षत ने बताया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पुलिस के लाठीचार्ज में उसे चोट भी लगी थी. 

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