राज्यसभा में गुरुवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 यानी एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान माहौल गर्म हो गया. शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर शुरू हुई बहस कुछ ही देर में जाति और मनुस्मृति के मुद्दे तक पहुंच गई. नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का जिक्र कर साधा निशाना
बहस की शुरुआत करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में पहली बार शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा धीरे-धीरे कारोबार बनती जा रही है. उनका कहना था कि निजी शिक्षण संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसका सबसे ज्यादा असर गरीब परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है.
खरगे ने कहा कि देश में 70 हजार से ज्यादा उच्च शिक्षण संस्थानों में करीब 4 करोड़ 50 लाख छात्र पढ़ रहे हैं. इसके बावजूद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों का नामांकन राष्ट्रीय औसत से कम है. उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांग छात्रों की भागीदारी सिर्फ 0.12 प्रतिशत है. उनके मुताबिक यह स्थिति बराबरी वाली शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है.
मनुस्मृति का जिक्र करते ही बढ़ा विवाद
अपने भाषण के दौरान खरगे ने कहा कि शिक्षा में भेदभाव की सोच का जिक्र मनुस्मृति में भी मिलता है. उन्होंने कहा कि वह मनुस्मृति का एक श्लोक पढ़ना चाहते हैं लेकिन संस्कृत अच्छी तरह नहीं पढ़ पाने की वजह से उसका हिंदी अनुवाद पढ़ेंगे.
इतना कहते ही सत्ता पक्ष के सदस्य अपनी सीटों पर खड़े हो गए और विरोध शुरू कर दिया. सदन में शोर-शराबा बढ़ गया. इस दौरान सभापति ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अगर किसी सदस्य को आपत्ति है तो उस पर विचार किया जाएगा लेकिन चर्चा को विचाराधीन विधेयक तक सीमित रखा जाए. बाद में भी जब खरगे ने मनुस्मृति के कथित अंश का उल्लेख करना शुरू किया तो फिर से विरोध शुरू हो गया.
जेपी नड्डा ने कहा- समाज में द्वेष फैलाने वाला बयान
नेता सदन जेपी नड्डा ने खरगे के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान समाज में द्वेष और अशांति का माहौल पैदा कर सकते हैं. नड्डा ने कहा कि जिस मनुस्मृति का हवाला दिया गया है पहले यह साबित होना चाहिए कि वह मूल और प्रमाणिक पाठ है. उन्होंने सभापति से आग्रह किया कि इस तरह के संदर्भ को सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनाया जाए.
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा- प्रमाणिकता साबित करें
खरगे के बयान के बाद भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी भी बहस में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि मनुस्मृति का जिस संदर्भ में उल्लेख किया जा रहा है, पहले उसकी प्रमाणिकता साबित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सर विलियम जोन्स ने भी इस विषय पर टिप्पणी की थी और उनके समय से पहले मनुस्मृति का कोई प्रमाणित मूल पाठ उपलब्ध नहीं माना जाता.
त्रिवेदी ने कहा कि शाकुंतलम् और मनुस्मृति जैसे ग्रंथ तो उपलब्ध हैं, लेकिन जिस उद्धरण का हवाला दिया जा रहा है, उसका प्रमाणिक स्रोत सामने नहीं रखा गया है. उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तक ‘Who Were the Shudras?' का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें भी लिखा गया है कि आधुनिक अनुसूचित जातियों का वैदिक शूद्रों से सीधा संबंध नहीं है.
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