- राघव चड्ढा समेत सात आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में विलय को राज्यसभा सभापति की मंजूरी मिली है
- कांग्रेस ने बीजेपी पर पंजाब के जनादेश की अवहेलना करते हुए राज्यसभा में अधिक सीटों पर कब्जा जमाने का आरोप लगाया
- कांग्रेस सांसद अजय माकन ने आम आदमी पार्टी को अरबपतियों की पार्टी बताते हुए अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है
राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों के आम आदमी पार्टी से अलग होकर बीजेपी में विलय को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन की मंजूरी मिलने के बाद इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अजय माकन ने आरोप लगाया कि बीजेपी के इस कदम से पंजाब में अलगावादी ताकतों को बल मिलेगा.
अजय माकन ने बीजेपी पर पंजाब के जनादेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए कहा कि 2021 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी को केवल 6.6 प्रतिशत वोट मिले थे और दो सीटें मिली थीं. लेकिन अब पंजाब से राज्यसभा के सात में छह सांसदों के आम आदमी पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल होने के बाद पंजाब में 86 प्रतिशत राज्यसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा हो गया है.
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद माकन ने कहा कि सरहदी सूबा पंजाब देशविरोधी ताकतों के निशाने पर रहा है. वहां अलगाववादी ताकतें दुष्प्रचार में जुटी रहती हैं कि उन्हें न्याय नहीं मिलता, सुनवाई नहीं होती. बीजेपी ने वही किया है जो पंजाब में अलगाववादी ताकतें साबित करना चाहती हैं.
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अरबपतियों की पार्टी है AAP: माकन
माकन ने इसके साथ ही आम आदमी को अरबपतियों की पार्टी बताते हुए अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी पार्टी के पुराने नेताओं को छोड़ अमीर लोगों को राज्यसभा की सीटें दी. बीजेपी में शामिल हुए आप के सात राज्यसभा सांसदों में चुनावी हलफनामों का हवाला देते हुए माकन ने दावा किया कि इनकी औसत आय 818 करोड़, 50 लाख, 35 हज़ार 420 रुपए है.
अजय माकन ने आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह और शीला दीक्षित से मुक़ाबले के लिए बीजेपी ने आम आदमी पार्टी को एक मुखौटे के रूप में उतारा. कांग्रेस का वोट काटने के लिए आम आदमी पार्टी उन्हीं राज्यों में चुनाव लड़ती है जहां कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुक़ाबला होता है. लेकिन अब केजरीवाल और आम आदमी पार्टी का मुखौटा उतर गया है.
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AAP के साथ चुनाव क्यों लड़ा? माकन ने बताया
इंडिया गठबंधन की बैठकों में आम आदमी पार्टी की मौजूदगी को लेकर पूछे गए सवाल पर माकन ने कहा कि कांग्रेस के दिल्ली के नेता शुरू से आम आदमी पार्टी के खिलाफ मुखर रहे हैं. लेकिन 2013 में पार्टी के कुछ नेताओं की राय के कारण कांग्रेस ने केजरीवाल सरकार को बाहर से समर्थन दिया था और फिर बीते लोकसभा चुनाव में सहयोगी दलों के दबाव में कांग्रेस ने केजरीवाल के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा. लेकिन अब गठबंधन के घटक दलों को समझना चाहिए कि केजरीवाल का मुखौटा उतर गया है. अन्ना आंदोलन में आरएसएस ने काम किया था.
हालांकि आम आदमी पार्टी पहले ही खुद को इंडिया गठबंधन से बाहर कर चुकी है लेकिन व्यावहारिक रूप से वह केवल कांग्रेस से दूर है और टीएमसी से लेकर डीएमके तक सबके करीब है. मौजूदा विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल, स्टालिन और ममता बनर्जी का प्रचार करने भी पहुंचे. ऐसे में देखना होगा कि क्या केजरीवाल के मुद्दे पर कांग्रेस इंडिया गठबंधन में अलग-थलग तो नहीं पड़ जाएगी. शायद यही वजह है कि अजय माकन ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि यदि आप सांसद किसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस के समर्थन में आते हैं तो उन्हें भगाया नहीं जाएगा बल्कि स्वागत ही किया जाएगा.
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