80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को कई महत्वपूर्ण संदेश दिए. उन्होंने जहां पारसी समुदाय को नवरोज की शुभकामनाएं दीं, वहीं शिक्षा, युवाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और नक्सलवाद के मुद्दों पर भी विस्तार से अपनी बात रखी. राष्ट्रपति मुर्मू ने पारसी नव वर्ष ‘नवरोज' की पूर्व संध्या पर देश और विदेश में रहने वाले सभी नागरिकों, विशेषकर पारसी समुदाय को हार्दिक बधाई दी. उन्होंने कहा कि नवरोज नई शुरुआत और नई उम्मीद का प्रतीक है.
उन्होंने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि यह पवित्र त्योहार सभी नागरिकों को एक समावेशी और विकसित भारत बनाने की दिशा में मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करेगा. यह त्योहार सभी के लिए खुशियां, शांति और समृद्धि लेकर आए.” राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पारसी समुदाय ने अपनी उद्यमशीलता और परोपकार की भावना के माध्यम से भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
परीक्षा सुधार पर सरकार के प्रयासों का जिक्र
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए व्यापक सुधार कर रही है.
उन्होंने कहा, “सार्वजनिक परीक्षाएं, विद्यार्थियों के लिए अवसरों के द्वार खोलती हैं. इसलिए, सरकार इन परीक्षाओं में सुधार के लिए व्यापक कदम उठा रही है. इन सुधारों का उद्देश्य है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से अंकुश लगे, परीक्षा प्रणाली और अधिक पारदर्शी तथा युवाओं के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद बने.” उन्होंने कहा कि छात्रों के वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा.
युवाओं को बताया देश की सबसे बड़ी ताकत
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आज के युवा नौकरी तलाशने की बजाय रोजगार देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने युवाओं की शारीरिक और मानसिक सेहत को देश के भविष्य की मजबूत नींव बताया. उन्होंने परिवारों और समाज से युवाओं को सही दिशा देने की अपील की. साथ ही ‘खेलो इंडिया' कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि खेल युवाओं के विकास और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है.
ऑपरेशन सिंदूर और सेना के पराक्रम की सराहना
राष्ट्रपति ने भारतीय सशस्त्र बलों के अतुल्य साहस और पराक्रम की सराहना की. उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर' ने आतंकवाद के खिलाफ सटीक कार्रवाई करने की भारत की क्षमता को दुनिया के सामने साबित किया है.
उन्होंने कहा, “आतंकियों और उनके समर्थकों को यह कड़ा संदेश दिया गया कि वे चाहे कहीं भी जाकर छिप जाएं, लेकिन उन्हें अपने किये की सजा जरूर मिलेगी. आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ अतीत में की गई सिंधु जल संधि को निलंबित करना हमारे देश के, विशेषकर किसानों के हित में एक निर्णायक कदम है.” राष्ट्रपति ने कारगिल विजय दिवस और ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ का भी स्मरण किया.
नक्सलवाद के खात्मे को बताया बड़ी उपलब्धि
आंतरिक सुरक्षा पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद देश के लिए गंभीर चुनौती बना रहा. उन्होंने कहा, “भारत को नक्सल मुक्त बनाना एक बड़ी उपलब्धि है. अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उत्साह का वातावरण है तथा विकास की सर्वस्पर्शी धारा प्रवाहित हो रही है.” उन्होंने बस्तर ओलिंपिक और ‘बस्तर पंडुम' जैसे आयोजनों में स्थानीय लोगों की भागीदारी का भी उल्लेख किया.
न्याय सबके लिए सुलभ हो
राष्ट्रपति मुर्मू ने न्यायपालिका और न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि संसाधनों की कमी के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे. उन्होंने कहा कि विशेषकर वंचित वर्गों को सम्मान के साथ समय पर न्याय मिलना चाहिए. अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्' की भूमिका को भी याद किया और इसे जन-जन को प्रेरित करने वाला गीत बताया.
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