भारत 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रा दिवस मनाने जा रहा है. हर साल इस खास दिन पर स्कूलों में तिरंगा लहराता है, देशभक्ति के गीत गूंजते हैं और हर तरफ आजादी के जश्न का माहौल नजर आता है. बॉलीवुड इंडस्ट्री ने भी इस दिन को संगीत के नजरिए से खास बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. इनमें कुछ गीत ऐसे हैं, जो सिर्फ गाने नहीं बल्कि देश के लिए मर-मिटने के जज्बे की पहचान बन चुके हैं. पीढ़ियां बदल गईं, संगीत का अंदाज बदल गया, लेकिन इन गीतों की गूंज आज भी वैसी ही है.बॉलीवुड के एक ऐसे ही गीत को अलग-अलग दौर की फिल्मों में अलग अंदाज और आवाज के साथ पेश किया गया और हर बार दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया. 1965 से लेकर 2000 के दशक तक इसका जादू कायम रहा. 15 अगस्त पर हर स्कूल में सुनाई देने वाला वही गीत है 'मेरा रंग दे बसंती चोला.'
1965 में पहली बार पर्दे पर गूंजा था ये अमर गाना
1965 में आई फिल्म शहीद में 'मेरा रंग दे बसंती चोला' ने देशभक्ति के गीतों की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई. फिल्म में गीत को प्रेम धवन ने लिखा और संगीत भी उन्होंने ही दिया था. इस वर्जन को महेंद्र कपूर, मुकेश और राजेंद्र मेहता ने अपनी आवाज दी थी. गीत के बोलों में शहादत का जोश और मातृभूमि के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने की भावना थी. यही वजह रही कि यह गाना जल्द ही देशभक्ति के सबसे यादगार गीतों में शामिल हो गया.
भगत सिंह की कहानियों में फिर लौटा वही अमर गीत
बॉलीवुड ने सालों बाद जब भगत सिंह की जिंदगी और शहादत पर फिल्में बनाईं, तो ‘मेरा रंग दे बसंती चोला' फिर सुनाई दिया. '23 मार्च 1931: शहीद' में इस गीत को उदित नारायण और भूपिंदर सिंह ने आवाज दी. इसका संगीत आनंद राज आनंद ने तैयार किया था, जबकि गीत के बोल देव कोहली ने लिखे थे.
इसके बाद 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' में भी इस गीत को नए संगीत और अंदाज के साथ पेश किया गया. इस वर्जन में सोनू निगम और मनमोहन वारिस की आवाजें सुनाई दीं. गीत के बोल समीर अंजान ने लिखे थे और संगीत ए.आर. रहमान ने ही दिया था.
15 अगस्त पर क्यों बढ़ जाता है इसका क्रेज?
'मेरा रंग दे बसंती चोला' की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं रह गया. स्कूलों के स्वतंत्रता दिवस समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और देशभक्ति इवेंट्स में आज भी इसकी गूंज सुनाई देती है. गीत में ‘बसंती चोला' शहादत और बलिदान की भावना का प्रतीक बनकर सामने आता है. भगत सिंह और उनके साथियों की कुर्बानी से जुड़ने के कारण इसकी भावनात्मक ताकत और बढ़ जाती है.
2026 में भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, लेकिन 6 दशक से ज्यादा पुराना यह गाना आज भी उतनी ही मजबूती से देशभक्ति का जज्बा जगाता है. तीन अलग-अलग फिल्मों में अलग संगीतकारों और गायकों ने इसे अपने अंदाज में पेश किया, मगर हर बार इसकी आत्मा वही रही.
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