विज्ञापन

रसिक दुलारी की मौत के बाद पहली बार बोले प्रेमानंद महाराज- मीरा और प्रह्लाद को भी देनी पड़ी थी परीक्षा

रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद प्रेमानंद महाराज का 23 मिनट का प्रवचन सामने आया है. उन्होंने घटना का सीधा जिक्र नहीं किया, लेकिन निंदा, अपमान, विपत्ति और धैर्य को लेकर दिए संदेश की चर्चा हो रही है.

मशहूर संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई मौत के बाद पहली बार खुद प्रेमानंद महाराज का प्रवचन सामने आया है. 23 मिनट के इस प्रवचन का प्रसारण  उनके आधिकारिक चैनल 'भजन मार्ग' पर सार्वजनिक किया गया है. जिसमें बेहद मार्मिक और गहरा आध्यात्मिक संदेश सामने आया है, जो भक्तों के दिलों को ढांढस बंधा रहा है. प्रेमानंद ने अपने संदेश में सीधे तौर पर अपने शिष्य का नाम या उसकी मौत के विवाद का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन उनका पूरा प्रवचन विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखने और बिना किसी अपराध के होने वाली 'निंदा' व 'अपमान' पर ही केंद्रित रहा. इस वजह से वृंदावन के गलियारों में यह माना जा रहा है कि महाराज जी का यह संदेश सीधे तौर पर इस पूरे विवाद से ही जुड़ा हुआ है.

'जब निर्दोष की निंदा हो तो समझना भगवान की कृपा है'

प्रवचन के दौरान महाराज ने जो बातें कहीं, वे सीधे तौर पर मौजूदा विवाद और आरोपों की तरफ इशारा करती लगती हैं. प्रेमानंद ने कहा कि जब कोई व्यक्ति पूरी तरह निर्दोष होता है, और फिर भी समाज में उसकी निंदा की जाती है या उस पर लांछन लगाए जाते हैं, तो यह असल में उस पर भगवान की विशेष कृपा का संकेत है. उन्होंने भक्तों को समझाते हुए कहा कि ऐसे अत्यधिक कठिन और संकटपूर्ण समय में व्यक्ति को अपना धैर्य बिल्कुल नहीं खोना चाहिए और अपना सब कुछ ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए.

निंदा और अपमान को बताया भगवान का पुष्प

प्रेमानंद महाराज ने वृंदावन में चल रहे आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच कहा कि प्रतिकूलता, अपमान और निंदा वास्तव में कोई बुरी चीजें नहीं हैं, बल्कि यह ईश्वर द्वारा अपने भक्तों को दिए जाने वाले पुष्प हैं. उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि मीरा बाई और भक्त प्रहलाद जैसे महान संतों को भी समाज के लोगों और अपनों से ही असहनीय कष्ट और अपमान झेलना पड़ा था, लेकिन वे सब ईश्वर की इच्छा का हिस्सा थे. इसलिए अपमान को भगवान की सुगंध मानकर स्वीकार करना चाहिए.

विपत्ति के समय झूठ और क्रोध से बचने की दी गंभीर चेतावनी

वृंदावन में चल रहे इस पूरे घटनाक्रम और रसिक दुलारी शरण की मौत के पीछे छिपे सच को लेकर प्रेमानंद महाराज ने अपने शिष्यों और भक्तों को 20 बेहद अहम हिदायतें दीं. उन्होंने विशेष रूप से सचेत करते हुए कहा कि जब चारों तरफ विपत्ति और विवाद का माहौल हो, तब किसी भी व्यक्ति को कभी झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए और न ही किसी दूसरे की निंदा या बुराई में अपनी ऊर्जा बर्बाद करनी चाहिए. महाराज जी ने कहा कि दूसरों की गलतियों पर क्रोध करने या मन में ईर्ष्या पालने के बजाय उन्हें क्षमा कर देना चाहिए, क्योंकि सत्य का फैसला अंततः भगवान ही करते हैं.
ये भी पढ़ें: प्रेमानंद महाराज के आश्रम में जाने से डर लगता है... रसिक दुलारी के परिजनों ने ऐसा क्यों कहा ?

वृंदावन में क्यों गरमाया है रसिक दुलारी शरण की मौत का मुद्दा?

आपको बता दें कि प्रेमानंद महाराज जी के शिष्य रसिक दुलारी शरण का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था, जिसके बाद से ही उनके प्रशंसकों और परिजनों ने इस मौत को सामान्य मानने से इंकार कर दिया था. सोशल मीडिया पर लगातार यह अभियान चलाया जा रहा है कि रसिक दुलारी शरण की मौत के पीछे कोई बड़ी साजिश है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. वृंदावन के स्थानीय लोगों और भक्तों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि आखिर महाराज जी के सक्रिय शिष्य की असमय मौत कैसे हो गई. 
ये भी पढ़ें: विराट कोहली को लेकर 5 करोड़ का दावा पड़ा भारी, फलाहारी बाबा ने प्रेमानंद महाराज से बिना शर्त मांगी माफी

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Premanand Maharaj, Rasik Dulari Sharan Death Case, Premanand Maharaj Pravachan, Vrindavan News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com