- 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी की सजा दी थी.
- PM नरेन्द्र मोदी ने कहा कि उनके न्याय, देशभक्ति और भयमुक्त संघर्ष के आदर्श आज भी जोश भरते हैं.
- वहीं CM योगी ने कहा कि उनका साहस, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना सदियों तक हमें प्रेरणा देती रहेगी.
देश की आजादी के लिए आज ही के दिन साल 1931 में भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें फांसी की सजा दी थी. 'शहीद दिवस' के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को याद करते हुए कहा कि उनके न्याय, देशभक्ति और भयमुक्त संघर्ष के आदर्श आज भी अनगिनत भारतीयों में जोश भरते हैं और उन्हें प्रेरणा देते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि कम उम्र में उन्होंने असाधारण साहस और भारत की स्वतंत्रता के लिए अडिग प्रतिबद्धता दिखाई.
उन्होंने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि आज हम भारत माता के वीर पुत्र भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं. राष्ट्र के लिए उनकी शहादत हमारी सामूहिक स्मृति में हमेशा अंकित रहेगी.
Today, we bow in reverence to the brave sons of Bharat Mata, Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev. Their martyrdom for the nation remains etched in our collective memory.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 23, 2026
At a young age, they displayed extraordinary courage and an unshakable commitment to the cause of India's… pic.twitter.com/ZrTxC8PoTI
देश को जीवन से ऊपर रखा: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि औपनिवेशिक शासन की ताकत से न डरते हुए उन्होंने बलिदान का रास्ता चुना और अपने जीवन से ऊपर देश को रखा. उन्होंने कहा कि उनके न्याय, देशभक्ति और भयमुक्त संघर्ष के आदर्श आज भी अनगिनत भारतीयों में जोश भरते हैं और प्रेरणा देते हैं.
भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय: सीएम योगी
इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने ‘शहीद दिवस' के अवसर पर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सोमवार को कहा कि उनका त्याग भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है. योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि इंकलाब की ज्योति प्रज्वलित करने वाले अमर बलिदानी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का त्याग भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है.
उन्होंने कहा कि उनका साहस, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना सदियों तक हमें राष्ट्र सर्वोपरि की प्रेरणा देती रहेगी. साथ ही कहा कि आज बलिदान दिवस पर वीर हुतात्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि.
फांसी के समय 25 साल से भी कम थी उम्र
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर षड्यंत्र मामले में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद आज ही के दिन अंग्रेजी हुकूमत द्वारा फांसी दी गई थी, इसलिए उनकी शहादत को नमन करने लिए 23 मार्च को ‘शहीद दिवस' के रूप में मनाया जाता है, जिस समय तीनों स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई, तब उनकी उम्र 25 वर्ष से कम थी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं