- सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर गंभीर सवाल उठाए.
- कोर्ट ने PIL को पब्लिसिटी, प्राइवेट, पैसा और राजनीतिक हितों से प्रेरित लिटिगेशन में बदलने की चिंता व्यक्त की.
- न्यायाधीशों ने पूछा कि वकीलों के संगठन का हिंदू मंदिर जैसे धार्मिक मामले में PIL दाखिल करने का अधिकार कैसे है.
सबरीमाला मामले में 9 जजों की संविधान पीठ ने 11वें दिन की सुनवाई पर याचिका पर गंभीर सवाल उठाए. अदालत ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ये संगठन कौन है, जिसने याचिका दाखिल की. इस याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर देना चाहिए था. सर्वोच्च अदालत ने कहा, PIL अब “पब्लिसिटी इंटरेस्ट, प्राइवेट इंटरेस्ट, पैसा इंटरेस्ट और पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन ' में बदल गई है. अदालत ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए यह भी कहा कि क्या आपके पास कोई और काम नहीं है.
धार्मिक मुद्दे पर PIL क्यों दायर की?
पीठ ने पूछा कि एक वकीलों के संगठन ने मंदिर में प्रवेश जैसे धार्मिक मुद्दे पर PIL क्यों दायर की? यह भी सवाल उठा कि एक ऐसे संगठन ने हिंदू मंदिर से जुड़े मामले में याचिका कैसे दायर की? इस पर एसोसिएशन के वकील ने कहा कि यह PIL संगठन की महिला सदस्यों की ओर से दायर की गई थी.
इसे कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए...
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, ऐसे दस्तावेज़ को तो सीधे कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए था. अगर कोई कदाचार था, तो कोर्ट को ट्रायल का आदेश देना चाहिए था. इस मामले में PIL सुनने का आधार क्या था? कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर खबर किसी पुजारी के कथित कदाचार की थी, तो उससे आपको PIL दाखिल करने का अधिकार कैसे मिल गया?
PIL अब पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन में बदल गई
जस्टिस BV नागरत्ना ने कहा कि हम वास्तविक कारणों के लिए PIL सुनते हैं. आजकल खबर छपवाना बहुत आसान है. हर दिन CJI को हजारों पत्र मिलते है. क्या उन सभी को PIL में बदल दिया जाए? जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि PIL अब कई बार “पब्लिसिटी इंटरेस्ट, प्राइवेट इंटरेस्ट , पैसा इंटरेस्ट और पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन ' में बदल गई है.
एसोसिएशन के वकील ने क्या कहा?
एसोसिएशन के वकील ने कहा PIL में व्यक्तिगत हित नहीं होना चाहिए. एक बार कोर्ट PIL पर संज्ञान ले ले, तो यह केवल याचिकाकर्ता का मामला नहीं रह जाता. कोर्ट को यह देखना होता है कि कानून या नियम सही है या नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि “संवैधानिक नैतिकता” एक ऐसा सिद्धांत है, जो व्यक्ति-व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकता है.
CJI ने कहा कि जब कोर्ट किसी कानून को रद्द करने पर विचार करता है, तो कई पक्ष प्रभावित होते हैं—इसलिए PIL भी विरोधात्मक हो सकती है. वकील ने जवाब दिया कि कोर्ट केवल पक्षकारों को नहीं सुनता, बल्कि कानून की वैधता की भी जांच करता है.
संघ की महिला वकील ने दायर की है याचिका
वकील ने यह भी दलील दी कि महिला वकील भगवान अय्यप्पा और मंदिर से जुड़े मुद्दे को लेकर चिंतित थीं. एक खबर आई थी कि मंदिर के तंत्री (मुख्य पुजारी) को कथित रूप से एक आपत्तिजनक स्थिति में पाया गया. उन्होंने कहा कि यह भी भगवान अय्यप्पा के हित का सवाल है कि ऐसे व्यक्ति को मंदिर में कैसे नियुक्त रहने दिया गया?
क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैंः सीजेआई
लेकिन जस्टिस नागरत्ना ने कहा, आप कौन हैं? आपको इससे क्या लेना-देना है. CJI सूर्यकांत ने पूछा कि क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं? कोर्ट ने फिर पूछा कि एक वकीलों का संगठन ऐसे धार्मिक मामलों से क्यों जुड़ा है. अदालत ने यह भी सवाल किया कि क्या एक कानूनी संस्था की कोई धार्मिक आस्था हो सकती है.
वकील ने जवाब दिया, कि (हमारी महिला सदस्य) पहले एक महिला हैं, फिर हिंदू हैं और उसके बाद कुछ और. मेरी स्त्रीत्व पर हमला हुआ है. और आप भगवान अय्यप्पा के नाम पर शब्द डाल रहे हैं कि उन्हें युवा महिलाएं पसंद नहीं हैं??
क्या संघ के पास कोई और काम नहीं...
जस्टिस नागरत्ना ने जवाब दिया कि क्या यंग लॉयर्स एसोसिएशन के पास और कोई काम नहीं है? क्या वे बार के कल्याण या न्याय व्यवस्था में मदद नहीं कर सकते? बार के लिए काम कीजिए, युवा वकीलों के लिए काम कीजिए, जो ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं और शहरों में संघर्ष करते हैं. उनके लिए काम कीजिए, बजाय ऐसे मामलों में समय लगाने के. फिलहाल, मामले की सुनवाई जारी है.
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