Sabarimala Mandir Verdict
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'क्या आपके और कोई काम नहीं', सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमकर धोया
- Tuesday May 5, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: प्रभांशु रंजन
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, ऐसे दस्तावेज़ को तो सीधे कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए था. अगर कोई कदाचार था, तो कोर्ट को ट्रायल का आदेश देना चाहिए था. इस मामले में PIL सुनने का आधार क्या था?
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सबरीमाला रिव्यू पिटीशन, 7 अप्रैल से रेगुलर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की संविधान पीठ का होगा गठन
- Monday February 16, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव
Sabrimala Temple Case Review Petition: सबरीमाला केस मामले में सुप्रीम कोर्ट 7 अप्रैल से रेगुलर सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस इस मामले में 9 जजों की बेंच का गठन करेंगे.
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Sabarimala Temple Case: अब सभी महिलाओं के लिए खुला सबरीमाला मंदिर का दरवाजा, सुप्रीम कोर्ट ने प्रवेश पर से बैन हटाया
- Friday September 28, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव
केरल के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple Case) में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ आज यानी शुक्रवार को फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से अपने फैसले में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर लगे बैन को हटा दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सबरीमाला मंदिर के दरवाजे सभी महिलाओं के लिए खोल दिये गये. फिलहाल 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं थी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आठ दिनों तक सुनवाई करने के उपरांत 1 अगस्त को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन और अन्य ने इस प्रथा को चुनौती दी है. उन्होंने यह कहते हुए कि यह प्रथा लैंगिक आधार पर भेदभाव करती है, इसे खत्म करने की मांग की है. याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि यह संवैधानिक समानता के अधिकार में भेदभाव है. एसोसिएशन ने कहा है कि मंदिर में प्रवेश के लिए 41 दिन से ब्रहचर्य की शर्त नहीं लगाई जा सकती क्योंकि महिलाओं के लिए यह असंभव है.
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'क्या आपके और कोई काम नहीं', सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमकर धोया
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, ऐसे दस्तावेज़ को तो सीधे कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए था. अगर कोई कदाचार था, तो कोर्ट को ट्रायल का आदेश देना चाहिए था. इस मामले में PIL सुनने का आधार क्या था?
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Sabarimala Temple Case: अब सभी महिलाओं के लिए खुला सबरीमाला मंदिर का दरवाजा, सुप्रीम कोर्ट ने प्रवेश पर से बैन हटाया
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- Reported by: आशीष भार्गव
केरल के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple Case) में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ आज यानी शुक्रवार को फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से अपने फैसले में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर लगे बैन को हटा दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सबरीमाला मंदिर के दरवाजे सभी महिलाओं के लिए खोल दिये गये. फिलहाल 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं थी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आठ दिनों तक सुनवाई करने के उपरांत 1 अगस्त को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन और अन्य ने इस प्रथा को चुनौती दी है. उन्होंने यह कहते हुए कि यह प्रथा लैंगिक आधार पर भेदभाव करती है, इसे खत्म करने की मांग की है. याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि यह संवैधानिक समानता के अधिकार में भेदभाव है. एसोसिएशन ने कहा है कि मंदिर में प्रवेश के लिए 41 दिन से ब्रहचर्य की शर्त नहीं लगाई जा सकती क्योंकि महिलाओं के लिए यह असंभव है.
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