- संसद के मॉनसून सत्र में अगले सप्ताह सरकार बड़े बिल लाने की तैयारी में
- कांग्रेस पार्टी ने भी कसी कमर, सांसदों के लिए जारी किया व्हिप
- FCRA बिल पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जवाब देंगे
संसद के मॉनसून सत्र का तीसरा सप्ताह भी सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध में समाप्त हो गया. हालांकि सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए हैं लेकिन अब नजरें दो बिलों पर टिक गईं हैं. परिसीमन और महिला आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक और विदेशी चंदे को लेकर एफसीआरए संशोधन विधेयक। इनके लिए सरकार के पास केवल एक सप्ताह का समय बचा है। सरकार ने अपने सभी सांसदों से कहा है कि वे अगले सप्ताह सदन में ही रहें. वहीं काग्रेस ने अपने सभी सांसदों के लिए तीन दिनों की व्हिप जारी कर दी है.
FCRA और परिसीमन बिल पर कांग्रेस-सरकार में ठनी
दरअसल FCRA और परिसीमन विधेयकों को लेकर कांग्रेस और सरकार में ठनी हुई है. सरकार के सूत्रों के अनुसार कांग्रेस पर कुछ ईसाई संगठनों का दबाव है. वे चाहते हैं कि कांग्रेस एफसीआरए का विरोध करे और इसे किसी भी सूरत में पारित न होने दें. सरकारी सूत्रों का दावा है कि परिसीमन विधेयक का विरोध करने के मुद्दे पर कांग्रेस में एक राय नहीं है. यही कारण है कि संसद का गतिरोध दूर करने के लिए वह सरकार के साथ सहमति नहीं बना पा रही है.
DMK मान जाएगी!
सरकार के कुछ मंत्रियों का मानना है कि डीएमके परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है. यह एक बड़ा घटनाक्रम होगा क्योंकि ऐसे में दक्षिण भारतीय दलों के हाथ से विरोध का मुद्दा खत्म हो सकता है. डीएमके ने सरकार के सामने कुछ शर्तें रखी हैं जिन पर विचार किया जा रहा है. पचास प्रतिशत सीटें बढ़ाने का प्रावधान बिल में रखने की बात गृह मंत्री कह चुके हैं. जबकि परिसीमन को जनगणना से अलग करने का प्रस्ताव भी है. ऐसे में डीएमके को बिल का समर्थन करने में परेशानी नहीं आनी चाहिए.
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विजय का क्या होगा प्लान?
डीएमके के साथ आने से दक्षिण भारत में परिसीमन विधेयक का विरोध खत्म हो सकता है. इसे मुद्दा बनाने की कोशिश भी कामयाब नहीं हो सकेगी. लेकिन तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता इस मुद्दे को बनाए रखना चाहते हैं. यही कारण है कि उनके दखल के बाद डीएमके पर दबाव बनाने के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने शनिवार को इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई है. डीएमके संभवतः इस बैठक से दूर रहे. अगर वह इसमें हिस्सा लेती भी हैं तो शायद ही अपना रुख बैठक में स्पष्ट करे. सरकार के सूत्रों के अनुसार विजय के पास लोक सभा में कोई सांसद नहीं है ऐसे में उनके लिए परिसीमन बिल पर स्टैंड लेना आसान है ताकि वे इस मुद्दे को डीएमके को घेरने के लिए जिंदा रख सकें.
गतिरोध सुलझाने का प्रयास
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीन बार लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात की है. सरकार के सूत्रों के अनुसार ऐसा लगता है कि राहुल गांधी गतिरोध सुलझाने के लिए गंभीर नहीं हैं. अमूमन ऐसे गतिरोध पर गिव एंड टेक होता है. यानी कुछ बातें सरकार की मानी जाएं और कुछ विपक्ष की. लेकिन वर्तमान गतिरोध में दोनों ही कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं.
अमित शाह ही देंगे जवाब
कांग्रेस का कहना है कि बीस जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर बयान दें. सरकार को लगता है कि विपक्ष की मंशा ठीक नहीं है. उसके सांसद गृह मंत्री को वैसे ही घेरने का प्रयास कर सकते हैं जैसे प्रधानमंत्री मोदी के साथ करने की कोशिश की गई थी. सरकार का यह भी कहना है कि एफसीआरए बिल पर चर्चा का जवाब अमित शाह ही देंगे. ऐसे में कांग्रेस को अपनी मांग पर जोर नहीं देना चाहिए.
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FCRA में संशोधन में सरकार का इनकार
विपक्ष के नेताओं के अनुसार गतिरोध का हल तब निकल सकता है जब एक बिल पर सरकार झुके. तभी दूसरे बिल के पारित होने का रास्ता बन सकता है. इसके लिए एफसीआरए बिल में संशोधन करने या फिर इसे जेपीसी को भेजने का सुझाव दिया गया है. ऐसा करने पर परिसीमन विधेयक पारित होने का माहौल तैयार हो सकता है. लेकिन सरकारी सूत्र एफसीआरए में संशोधन की संभावना से इनकार कर चुके हैं. सरकार के सूत्रों के अनुसार अगर कांग्रेस के विरोध के बावजूद दोनों बिल पारित हो जाते हैं तो कांग्रेस के लिए ईसाई संगठनों को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा. वे कांग्रेस से पूछेंगे कि उसने एफसीआरए बिल रोकने के लिए मेहनत क्यों नहीं की.
सरकार की क्या तैयारी
दूसरी ओर सरकार अभी इंतजार कर रही है. कहा गया है कि अगले दो दिनों में रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा. सोमवार तक तय हो जाएगा कि कौन सा बिल कब लाना है. सूत्रों के अनुसार एफसीआरए बिल इसी सत्र में लाने और परिसीमन बिल के लिए विशेष सत्र बुलाने का विकल्प भी खुला है.
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