कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय राजनीति, युवाओं, शिक्षा, संसद की कार्यवाही और विपक्ष की भूमिका पर खुलकर अपनी राय रखी. इस दौरान उन्होंने अपनी ही पार्टी कांग्रेस को भी नसीहत दी और कहा कि केवल विरोध के सहारे राजनीति नहीं चल सकती.
संसद में हंगामे पर कांग्रेस को नसीहत
शशि थरूर ने संसद में लगातार होने वाले हंगामे और कार्यवाही बाधित होने पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, "सड़क का काम सड़क पर और सदन का काम सदन में होना चाहिए." थरूर ने माना कि संसद को ठप करने की राजनीति से विपक्ष का भी नुकसान होता है. उन्होंने कहा कि पहले विपक्ष में रहते हुए बीजेपी ऐसा करती थी और अब कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं.
राहुल गांधी के अभियान पर क्या बोले?
युवाओं के मुद्दों पर बोलते हुए थरूर ने कहा, "राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' के जरिए युवाओं के मुद्दे उठाए लेकिन उनका व्यापक असर नहीं हुआ, कांग्रेस को जनता की नब्ज़ पहचानने की सख्त ज़रूरत है." उन्होंने कहा कि युवाओं की उम्मीदें तेजी से बदल रही हैं और राजनीतिक दलों को भी अपनी सोच बदलनी होगी.
2029 के चुनाव और युवा वोटर
थरूर ने कहा कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में GEN Z देश का सबसे बड़ा वोटर वर्ग होगा. उनके अनुसार अब पुरानी राजनीतिक शैली प्रभावी नहीं रहेगी और पार्टियों को युवाओं की आकांक्षाओं के अनुसार खुद को ढालना होगा.
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को युवाओं से वास्तविक जुड़ाव बढ़ाने की जरूरत है. "विपक्ष को भी अब नींद से जागना होगा; सच्चाई यह है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले युवाओं को हम अपनी पार्टियों में जगह नहीं दे पाए."
बीजेपी और आरएसएस पर साधा निशाना
बीजेपी और आरएसएस पर हमला बोलते हुए शशि थरूर ने कहा, "मोहन भागवत का बयान इस बात का सबूत है कि बीजेपी को अब मतदाताओं पर अपनी पकड़ खोने का डर सता रहा है."
उन्होंने दावा किया, "पिछले छह महीनों में देश में बहुत कुछ बदला है, अब शिवसेना और टीएमसी जैसी पार्टियों को तोड़ने के हथकंडे काम नहीं आएंगे. देश में राजनीतिक हवा का रुख बदल रहा है और लोग अब खुलकर बोलने लगे हैं, भारत का लोकतंत्र एक बार फिर से सक्रिय हो गया है."
दलबदल और सिद्धांतों की राजनीति पर टिप्पणी
दलबदल करने वाले नेताओं पर टिप्पणी करते हुए थरूर ने कहा कि राजनीति सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बिना इस्तीफा दिए और जनता के बीच दोबारा गए बिना पार्टी बदलना राजनीतिक मूल्यों की कमी को दर्शाता है.
प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए थरूर ने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ पांच साल में एक बार होने वाले चुनाव तक सीमित नहीं है. सरकार को बीच-बीच में भी जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए.
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