केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक अमेरिकी सांसद की ओर से प्रस्तावित 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट (FCRA) बिल' पर की गई टिप्पणी का जवाब दिया. सरकार ने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और अमेरिका भी अपने देश में आने वाले विदेशी फंड को रेगुलेट करता है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमने FCRA पर की गई टिप्पणियां देखी हैं. भारत से जुड़े विधायी मामले हमारे आंतरिक मामले हैं, जिन पर देश की संसद फैसले लेती है. मैं यह भी बताना चाहूंगा कि अमेरिका सहित कई देश विदेशी फंड के प्रवाह को रेगुलेट करते हैं.'
अमेरिकी सांसद ने उठाया था सवाल
यह प्रतिक्रिया अमेरिकी कांग्रेस सदस्य राइली मूर द्वारा प्रस्तावित FCRA बिल, 2026 पर चिंता जताने के बाद आई है. मूर ने आरोप लगाया था कि इसके कुछ प्रावधानों से भारतीय सरकार चर्चों और धार्मिक चैरिटी का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे से नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंधों पर असर पड़ सकता है.
Christians have been in India since St. Thomas the Apostle traveled to the Malabar Coast just decades after the resurrection of our Lord Jesus Christ.
— Rep. Riley M. Moore (@RepRileyMoore) August 4, 2026
But despite this long Christian history, India's Parliament is considering amending Foreign Contribution Regulation Amendment…
वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य मूर ने मंगलवार को 'एक्स' पर एक पोस्ट में प्रस्तावित संशोधनों की आलोचना की. उन्होंने लिखा, 'ईसाई भारत में तब से हैं जब सेंट थॉमस द एपोस्टल ने हमारे प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशकों बाद मालाबार तट की यात्रा की थी. लेकिन इतने लंबे ईसाई इतिहास के बावजूद, भारत की संसद FCRA नियमों में संशोधन करने पर विचार कर रही है ताकि सरकार चर्चों और धार्मिक चैरिटी का नियंत्रण अपने हाथ में ले सके.'
FCRA को ईसालियों पर हमला बताया
इस प्रस्ताव को ईसाइयों पर सीधा हमला बताते हुए मूर ने कहा कि अगर यह कानून अपने मौजूदा रूप में आगे बढ़ता है, तो यह भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी चिंता का विषय बन जाएगा.
क्या है FCRA?
FCRA यह तय करता है कि भारत में काम करने वाले संगठन विदेशी चंदा कैसे प्राप्त करते हैं और उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं. इसमें कई तरह की संस्थाएं शामिल हैं. इसमें चैरिटी, शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक निकाय और NGO हैं, जो विदेशों से फंड प्राप्त करते हैं.
मौजूदा कानून में प्रस्तावित संशोधन का मकसद उन तरीकों में बदलाव करना है जिनसे संस्थान विदेशी चंदा प्राप्त करते हैं. इसमें NGO, ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थान और धार्मिक निकाय शामिल हैं.
बिल के सबसे विवादास्पद प्रावधानों में से एक केंद्र सरकार को एक नामित प्राधिकरण बनाने का अधिकार देता है. यह प्राधिकरण विदेशी चंदे और उस चंदे से बनाई गई संपत्तियों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लेगा, यदि किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाता है, सरेंडर कर दिया जाता है या रिन्यू न होने के कारण खत्म हो जाता है. गृह मंत्रालय के अनुसार, 2019 और 2022 के बीच 13,520 संगठनों को कुल 55,741 करोड़ रुपये का विदेशी योगदान मिला.
यह भी पढ़ें: FCRA, परिसीमन बिल.. अगले सप्ताह संसद में होगा घमासान, बीजेपी और कांग्रेस ने कसी कमर, सांसदों को व्हिप
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं