दुर्गा पूजा की धूम पूरे देश में देखने को मिल रही है. मां दुर्गा के इस पावन पर्व पर देश के तमाम हिस्सों और शक्तिपीठों में पूजा-पाठ का दौर चलता है. अलग-अलग राज्यों में लोग अपनी आस्था और परंपराओं के साथ उत्सव मनाते हैं. लेकिन जब बात दुर्गा पूजा की होती है, तो सबसे पहले पश्चिम बंगाल और बंगाली समाज का ख्याल आता है. बंगाली समाज मां दुर्गा को अपनी बेटी मानता है और उनके आगमन का उत्सव पूरे उल्लास के साथ मनाता है. अगर आप इस दौरान कोलकाता नहीं जा सकते और दिल्ली-NCR में हैं, तो बंगाली संस्कृति और जायके का आनंद नोएडा में भी ले सकते हैं. नोएडा के सेक्टर-26 स्थित कालीबाड़ी मंदिर में इस साल भी दुर्गा पूजा के लिए भव्य पंडाल सजाया गया है. यहां मां दुर्गा के साथ देवी लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश की प्रतिमाएं विराजमान हैं. पंडाल को गांव के परिवेश जैसा रूप दिया गया है. कालीबाड़ी मंदिर के भीतर मां काली की भी प्रतिमा स्थापित है, जिनकी सुबह-शाम पूजा-अर्चना की जाती है.

फुचका से मछली तक, बंगाली जायके का आनंद
पंडाल के पास खाने-पीने के स्टॉल भी लगाए जाते हैं, जहां बंगाली व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकता है. फुचका, घुगनी और बंगाली काठी रोल जैसे लोकप्रिय व्यंजनों के साथ मछली सहित कई मांसाहारी पकवान भी मिलते हैं. जहां नवरात्रि के दौरान देश के कई हिस्सों में सात्विक भोजन की परंपरा देखने को मिलती है, वहीं बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान खानपान की अपनी अलग विविधता नजर आती है.

1983 से जुड़ा है नोएडा की दुर्गा पूजा का इतिहास
नोएडा में पहली बार अक्टूबर 1983 में सेक्टर-27 स्थित नोएडा क्लब में बंगाली समुदाय ने श्रीश्री दुर्गा पूजा का आयोजन किया था. नोएडा बंगाली कल्चरल एसोसिएशन (NBCA) का गठन 1982 में हुआ और फरवरी 1984 में इसका रजिस्ट्रेशन कराया गया. मई 1985 में नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-26 में एसोसिएशन को जमीन आवंटित की. मई 1986 में जमीन का कब्जा मिलने के बाद 16 अगस्त 1986 को यहां पूजा से जुड़ी गतिविधियां शुरू हुईं. तब से यह स्थान दुर्गा पूजा के आयोजन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
दिल्ली-NCR में भी महसूस करें बंगाल का उत्सव
अगर आप दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली संस्कृति, परंपराओं और खानपान को करीब से एक्सपीरिएंस करना चाहते हैं, तो नोएडा के कालीबाड़ी के अलावा दिल्ली के चित्तरंजन पार्क (सीआर पार्क) और सफदरजंग एन्क्लेव का रुख कर सकते हैं. दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि देश की विविध संस्कृतियों को एक साथ जोड़ने वाला उत्सव भी है. यही वजह है कि बंगाल की परंपराओं में रचा-बसा यह पर्व दिल्ली-एनसीआर में भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
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