- मरीजों को गुमराह करने वाले मेडिकल विज्ञापनों पर सख्त कार्रवाई
- NMC ने कहा- मरीजों की तस्वीर और सफलता की कहानी से नहीं होगा प्रचार
- ‘No.1’, ‘बेस्ट डॉक्टर’ जैसे दावे नहीं कर सकेंगे, AI प्रचार पर भी रोक
मरीजों को गुमराह करने वाले दावों को लेकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने सख्ती की है. इसके तहत आयोग ने मेडिकल संस्थानों, अस्पतालों और रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के लिए एथिकल एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक कम्युनिकेशन को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की है. गाइडलाइन्स के तहत डॉक्टर या अस्पताल खुद को सर्वश्रेष्ठ, नंबर 1, सबसे विश्वसनीय, शीर्ष, अग्रणी या इसी तरह के तुलनात्मक शब्दों के साथ प्रमोट नहीं कर सकते, जब तक ऐसे दावों को स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से सत्यापित करने की ठोस व्यवस्था न हो और वे लागू कानून के तहत अनुमत न हों.
सक्सेस स्टाेरी नहीं कर सकेंगे इस्तेमाल
आयोग ने स्पष्ट किया है कोई डॉक्टर की सफलता, इलाज के परिणाम या मरीजों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर भी पेश नहीं कर सकता. इसके अलावा डॉक्टरों को अपने प्रचार के लिए मरीजों के प्रशंसा-पत्र, समर्थन, समीक्षाएं या सफलता की कहानियां का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी. इतना ही नहीं, मरीज के इलाज के परिणाम को सामान्य या निश्चित परिणाम के तौर पर पेश करना भी प्रतिबंधित है.
गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि डॉक्टर अपनी सेवाओं को इस तरह प्रमोट नहीं कर सकते कि मरीजों को उनकी योग्यता, अनुभव या विशेषज्ञता के बारे में गलत धारणा बने.

मरीजों की तस्वीर, वीडियो और मेडिकल रिकॉर्ड के इस्तेमाल पर रोक
गाइडलाइंस में मरीजों की फोटो, वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड और क्लिनिकल इमेजेज के इस्तेमाल को लेकर भी सख्ती की गई है. इनका इस्तेमाल विज्ञापन के लिए तभी किया जा सकता है जब कानून के तहत इसकी अनुमति हो और जरूरी कंसट तथा सुरक्षा उपाय अपनाए गए हों. आयोग ने स्पष्ट किया है कि मरीज की सहमति को किसी प्रशंसा-पत्र, समर्थन या प्रचार-प्रसार की गतिविधि के लिए इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता जिससे मरीज की निजता और गरिमा प्रभावित हो.
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी नियम
नई गाइडलाइंस केवल पारंपरिक विज्ञापनों तक सीमित नहीं हैं. इनमें सोशल मीडिया, वेबसाइट, डिजिटल मार्केटिंग, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, पॉडकास्ट, ब्लॉग, वीडियो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार कंटेंट और अन्य डिजिटल माध्यमों को भी शामिल किया गया है. आयोग के मुताबिक, किसी भी माध्यम से ऐसी जानकारी का प्रचार या प्रसार, जिसका उद्देश्य प्रोफेशनल सेवाओं, विशेषज्ञता, योग्यता, उपलब्धियों, सुविधाओं या व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना हो, विज्ञापन के दायरे में आ सकता है.
AI से बने प्रमोशनल कंटेंट पर सख्ती
गाइडलाइन्स के मुताबिक आरएमपी या अस्पताल मरीजों को आकर्षित करने के लिए एआई-जनरेटेड या एआई-असिस्टेड कंटेंट का इस्तेमाल नहीं कर सकते, अगर इससे उनकी सेवाओं, क्लिनिकल परिणामों, प्रोफेशनल योग्यता, मरीजों के अनुभव या स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में गलत या अविश्वसनीय जानकारी पेश होती हो.
इसके अलावा AI से तैयार या बदली गई सामग्री अगर दर्शकों को डॉक्टर, मरीज या किसी चिकित्सा परिणाम को लेकर भ्रमित कर सकती है, तो उसका इस्तेमाल भी प्रतिबंधित है. मरीजों की जानकारी को आर्टिफिशल इंटेलीग्रान्स सिस्टम में इस्तेमाल करते समय गोपनीयता, गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और पेशेवर नैतिकता का पालन करना होगा.
मरीजों को लुभाने के लिए डिस्काउंट और ऑफर पर रोक
RMPs और अस्पतालों को ऐसे डिस्काउंट्स , सीमित समय के ऑफ़र, प्रतियोगिताएं, कूपन, उपहार, कैशबैक, रेफ़रल फ़ायदे या इसी तरह के प्रलोभनों का इस्तेमाल करने से रोका गया है, जो मरीजों को किसी विशेष चिकित्सा सेवा, जांच या प्रक्रिया की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से दिए जाएं.
पेड रैंकिंग पर भी रोक
NMC के अनुसार, डॉक्टर या अस्पताल ऐसे भुगतान या व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन सकते जिससे किसी डॉक्टर या संस्था की रैंकिंग, विजिबिलिटी या सर्च पोजीशन को कृत्रिम तरीके से बढ़ाया जाए और इससे मरीजों को डॉक्टर की प्रोफेशनल प्रतिष्ठा के बारे में गलत धारणा बने. गाइडलाइन्स में कहा गया है कि मेडिकल प्रैक्टिशनर्स स्वास्थ्य शिक्षा और सामान्य जानकारी देने के लिए लेख, पुस्तिकाएं, पैम्फलेट या अन्य शैक्षणिक सामग्री भी तैयार कर सकते हैं. लेकिन ऐसी सामग्री में मरीजों को किसी खास अस्पताल या डॉक्टर के पास जाने के लिए प्रेरित करने या अस्पताल की सुपीरियर क्वालिटी का दावा करने से बचना होगा.
मेडिकल प्रक्रिया के प्रसारण पर भी नियम
गाइडलाइंस के अनुसार, लाइव ब्रॉडकास्ट या कमर्शियल प्रचार के लिए सर्जरी या अन्य मेडिकल प्रक्रियाओं का प्रसारण इस तरह नहीं किया जा सकता जो NMC के नियमों के अनुरूप न हो या मरीज की प्राइवेसी और सहमति का उल्लंघन करे.
नियम तोड़ने पर होगा एक्शन
NMC ने गाइडलाइंस के उल्लंघन पर ग्रेडड डिसिप्लिनरी एक्शन का प्रावधान किया है. उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर चेतावनी, अनिवार्य एथिक्स ट्रेनिंग , निलंबन और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी कार्रवाई की जा सकती है. गंभीर उल्लंघन के मामलों में रजिस्ट्रेशन के निलंबन या अन्य कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है. दोहराए गए या गंभीर मामलों में कार्रवाई की अवधि बढ़ सकती है और जरूरत पड़ने पर रजिस्टर से नाम हटाने या आर्थिक दंड जैसी कार्रवाई भी संबंधित कानून और नियमों के तहत की जा सकती है.
शो-कॉज नोटिस के बाद कार्रवाई
गाइडलाइन के मुताबिक, किसी चिकित्सका या संस्था पर दंड लगाने से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था को कारण बताओ नोटिस दिया जाएगा. उसे अपना पक्ष रखने और आरोपों का जवाब देने का अवसर मिलेगा. इसके बाद संबंधित राज्य मेडिकल कॉउन्सिल मामले के तथ्यों और जवाब के आधार पर फैसला ले सकती है.
अपील का भी प्रावधान
यदि किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर्स को राज्य मेडिकल परिषद के फैसले से आपत्ति है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत 60 दिनों के भीतर अपील कर सकता है. अपील की जांच संबंधित अपीलीय प्राधिकरण द्वारा की जाएगी और दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्णय लिया जाएगा.
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