भारतीय जनता पार्टी के मुखिया नितिन नबीन इन दिनों राजस्थान दौरे पर हैं. इसी दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के घर पर बुलाई गई इस सुबह की बैठक में नितिन नबीन ने पार्टी के विधायक, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं को सत्ता की पार्टी होने से क्या नुकसान हो सकता है, इसे लेकर स्पष्ट संदेश दिया. “हम ऐसी पार्टी में हैं जो सत्ता में है, यानी सरकार में है.” उन्होंने नेताओं को आगाह किया कि सत्ता के साथ आने वाली सुविधाओं और प्रभाव से सावधान रहना जरूरी है. लोगों से उसी विनम्रता के साथ मिलें, जैसे आप पहले मिला करते थे, क्योंकि सत्ता का अहंकार और उसका प्रभाव खतरनाक हो सकता है.
उन्होंने चेतावनी दी, “जब सत्ता विरोधी माहौल बनना शुरू होगा, तब सत्ता में बैठे लोगों को इसका एहसास तक नहीं होगा.” उन्होंने सत्ता के अहंकार को “संकटपूर्ण” बताते हुए चेताया.
नाश्ते की बैठक में तीखा राजनीतिक संवाद
जयपुर में सुबह 9:50 बजे मुख्यमंत्री भजनलाल के आवास पर आयोजित नाश्ते की इस बैठक में सभी वरिष्ठ नेता मौजूद थे. नाश्ते में पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन परोसे गए, कचौरी, पकौड़े और जलेबी, लेकिन राजनीतिक संवाद तीखा था. सुबह 9:50 बजे से 11:30 बजे तक चली बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक, नितिन नबीन ने नेताओं को कोई रियायत नहीं दी. शहरी निकाय चुनाव जीत लिए गए हैं, लेकिन अब पंचायत चुनावों की तैयारी का समय है.
टिकट की सिफारिश के साथ जिम्मेदारी भी
शहरी निकाय चुनावों से एक महत्वपूर्ण सीख यह रही कि टिकट वितरण में विधायकों और स्थानीय नेताओं का प्रभाव प्रमुख रहा. लेकिन नबीन ने बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों से कहा कि उन्हें “अपनी जिम्मेदारियां भी स्वीकार करनी होंगी.” यदि किसी उम्मीदवार को किसी नेता की सिफारिश पर टिकट दिया गया है और बाद में वह उम्मीदवार पार्टी के खिलाफ चला जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित विधायक या सांसद की ही होगी. नबीन ने स्पष्ट किया कि सिफारिश के आधार पर टिकट दिलाने वाले नेताओं को चुनाव के बाद अपने उम्मीदवारों के आचरण और उनके फैसलों के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. बोर्ड और निगमों के गठन के दौरान होने वाले मतदान को लेकर भी नबीन ने नेताओं को सख्त चेतावनी दी.
मूंडवा का उदाहरण दिया
हाल ही में भाजपा के लिए ऐसा ही एक झटका नागौर की मूंडवा नगरपालिका में देखने को मिला. यहां भाजपा 10 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की आधिकारिक उम्मीदवार गीता देवी को एक भी वोट नहीं मिला, जबकि आरएलपी (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी) बोर्ड बनाने में सफल रही. माना जाता है कि भाजपा के कुछ पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की.
पार्टी नेताओं को नबीन की सलाह में इस बात पर भी जोर दिया गया कि नेताओं का व्यक्तिगत आचरण ही पार्टी के प्रति लोगों की धारणा को प्रभावित करता है. उन्होंने कहा कि इस समय “सादगी”, दिखावे से दूरी और जनता के साथ जमीनी स्तर पर जुड़ाव बेहद जरूरी है.
दौरे का मकसद पंचायत चुनावों की तैयारी
नितिन नबीन का राजस्थान का एक दिवसीय दौरा ऐसे समय हुआ है जब राज्य में शहरी निकाय चुनाव पूरे हो चुके हैं और अब पंचायत चुनाव होने हैं. उनके दौरे का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की अगली चुनावी परीक्षा के लिए पार्टी में गति और माहौल तैयार करना था. बैठक में विधायक, सांसद, वरिष्ठ पार्टी नेता, चुनाव प्रभारी, जिला अध्यक्ष और संभाग प्रभारी सभी मौजूद थे. राजस्थान के लिए हाल ही में नियुक्त प्रभारी संजय भाटिया और कविता पाटीदार भी मौजूद रहीं.
राजस्थान में 309 शहरी निकायों के चुनाव हाल ही में पूरे हुए हैं और अब 14,403 ग्राम पंचायतों की बारी है. ये चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि राजस्थान के 72.16 प्रतिशत मतदाता इनमें मतदान करेंगे.
भजनलाल सरकार की अगली परीक्षा
राजस्थान में कुल 5.17 करोड़ मतदाताओं में से शहरी निकाय क्षेत्रों में लगभग 1.44 करोड़ मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का 27.84 प्रतिशत हैं. लेकिन भजनलाल सरकार के लिए असली परीक्षा ग्रामीण इलाकों में होगी, जहां 3.73 करोड़ ग्रामीण मतदाता पंचायत चुनावों में अपना जनादेश देंगे. माना जाता है कि नबीन ने पंचायत चुनावों के लिए जातीय समीकरणों को साधने और सामाजिक समीकरणों पर काम करने को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण हिंदी बेल्ट राज्य में पार्टी की राजनीतिक धारणा और संगठन को मजबूत करने के लिए ये चुनाव बेहद अहम हैं.
युवाओं के बीच भाजपा की पकड़ का दावा
शहरी निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव ऐसे समय हो रहे हैं जब हाल ही में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक, नबीन ने कहा कि राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में भाजपा के प्रदर्शन और दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनावों ने यह स्पष्ट किया है कि मतदाताओं, विशेष रूप से युवाओं के बीच, भाजपा से दूर जाने की कोई बड़ी प्रवृत्ति दिखाई नहीं दी है.
केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान के चुनावों पर करीबी नजर रख रहा है. इस महीने की शुरुआत में बी.एल. संतोष के दौरे के बाद अब नितिन नबीन के पंचायत चुनावों को लेकर स्पष्ट निर्देशों से यह संकेत मिला है कि पार्टी के लिए सही राजनीतिक नैरेटिव तैयार करना कितना महत्वपूर्ण है.
लगातार बैठकों का दौर
शहरी निकाय चुनावों से पहले बी.एल. संतोष ने लगातार कई बैठकें की थीं. इसके बाद पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी जयपुर दौरे में इसी तरह का पैटर्न अपनाया. अल्बर्ट हॉल में फोटो-ऑप, जेन-जी के साथ संवाद और नवनिर्वाचित पार्षदों में उत्साह भरने के लिए एक जनसभा के बाद असली काम शुरू हुआ, पंचायत चुनावों की रणनीति को लेकर सांसदों, विधायकों, चुनाव प्रभारियों, जिला अध्यक्षों और प्रमुख पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ महत्वपूर्ण और लंबी बैठकों का दौर.
सफलता पर नहीं, अगले लक्ष्य पर ध्यान
शहरी निकाय चुनावों में पार्टी के अपेक्षाकृत अच्छे प्रदर्शन के बाद नेताओं को उस सफलता पर आराम न करने की सलाह देते हुए, माना जाता है कि नबीन ने इस बात पर जोर दिया कि सभी पार्टी नेताओं को एकजुट होकर पंचायत चुनावों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयास पार्टी संगठन को “मजबूत करने” की दिशा में भी काम करेगा और पूरे देश में भाजपा का एक नैरेटिव बनाएगा, जो जेन-जी के प्रोटेस्ट के बाद चुनौती का सामना करता दिखाई दे रहा था.
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