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पहलगाम हमला: कहां रुके, किसने की मदद और किस रास्ते से आए? NIA की चार्जशीट में बड़ा खुलासा

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर NIA की चार्जशीट में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनमें आतंकियों के ठहरने की जगह, उन्हें मिली स्थानीय मदद और भारत में दाखिल होने के रास्तों का विस्तार से खुलासा किया गया है.

पहलगाम हमला: कहां रुके, किसने की मदद और किस रास्ते से आए? NIA की चार्जशीट में बड़ा खुलासा
  • NIA की चार्जशीट में पहलगाम आतंकी हमले में शामिल 3 पाकिस्तानी आतंकियों की पहचान और मारे जाने की जानकारी है.
  • जांच में पाया गया कि आतंकियों को स्थानीय सहयोगी बशीर अहमद और परवेज अहमद ने रास्ते और ठिकाने की मदद दी थी.
  • आतंकियों ने हमले से पहले बैसरन घाटी के पास एक ढोक में छिपकर योजना बनाई और रेकी की तैयारी की थी.
नई दिल्ली:

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर NIA की चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम की साजिश, आतंकियों की तैयारी, स्थानीय सहयोगियों की भूमिका और सुरक्षा बलों के ऑपरेशन की विस्तृत तस्वीर स्पष्ट होती है. जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में हमले में शामिल तीनों पाकिस्तानी आतंकियों की तस्वीरों को भी रिकॉर्ड में शामिल किया है. बताया गया है कि ये सभी आतंकी बाद में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन महादेव' में मारे गए थे. यह चार्जशीट एनडीटीवी के पास उपलब्ध है.

चार्जशीट के मुताबिक हमले में शामिल आतंकियों की पहचान फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हमजा अफगानी और हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान भाई के रूप में हुई है. जांच एजेंसी का दावा है कि ये तीनों आतंकवादी पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क से जुड़े हुए थे और इन्हें पहले से पहलगाम इलाके की रेकी, रास्तों और स्थानीय मदद का पूरा इनपुट उपलब्ध कराया गया था. NIA ने चार्जशीट में इन आतंकियों की जिंदा रहते समय की तस्वीरों के साथ-साथ मुठभेड़ के बाद की तस्वीरें भी शामिल की हैं. तस्वीरों में आतंकियों के सिर और शरीर पर गोली लगने के निशान साफ दिखाई देते हैं. जांच एजेंसी के अनुसार सुरक्षा बलों ने इन्हें दाचीगाम के जंगलों में एक सटीक ऑपरेशन के दौरान मार गिराया था.

स्थानीय मददगारों की भूमिका पर बड़ा खुलासा

चार्जशीट में दो स्थानीय लोग-बशीर अहमद और परवेज अहमद  को आतंकियों का मददगार बताया गया है. NIA का आरोप है कि इन दोनों ने आतंकियों को न सिर्फ सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया बल्कि इलाके के रास्तों, सुरक्षा गतिविधियों और संभावित टारगेट के बारे में भी मदद पहुंचाई. एजेंसी के मुताबिक अगर इन दोनों ने आतंकियों को सहयोग नहीं दिया होता तो संभवत 26 लोगों की जान बचाई जा सकती थी.

NIA ने अपनी चार्जशीट में दोनों आरोपियों की तस्वीरें भी शामिल की हैं और दावा किया है कि पैसों और लालच में देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया. जांच में यह भी सामने आया है कि हमले से पहले आतंकियों ने कई दिनों तक इलाके में छिपकर मूवमेंट किया और इस दौरान स्थानीय नेटवर्क ने उनकी हर तरह से मदद की.

ढोक में छिपे थे आतंकी

जांच एजेंसी ने उस ढोक की तस्वीरें भी चार्जशीट का हिस्सा बनाया है, जहां हमले से पहले तीनों आतंकी रुके थे. यह ढोक पहलगाम की बैसरन घाटी से कुछ किलोमीटर दूरी पर स्थित बताया गया है. पहाड़ी इलाकों में बने ऐसे ढोक आमतौर पर अस्थायी ठिकानों के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं. NIA का कहना है कि आतंकियों ने इसी स्थान को अपने हाइडआउट के तौर पर इस्तेमाल किया और यहीं से हमले की अंतिम तैयारी की गई.
सैटेलाइट इमेज के जरिए जांच एजेंसी ने बैसरन घाटी और ढोक के बीच की दूरी और लोकेशन को भी दिखाया है. एजेंसी के मुताबिक यह दूरी ज्यादा नहीं थी और आतंकियों ने रणनीतिक रूप से ऐसा स्थान चुना था जहां से वे आसानी से हमला कर सकें और बाद में जंगलों के रास्ते भाग निकलें.

आम रास्ते से नहीं पहुंचे आतंकी

चार्जशीट का सबसे बड़ा खुलासा आतंकियों के मूवमेंट और ट्रेकिंग रूट को लेकर हुआ है. NIA के मुताबिक हमले वाले दिन आतंकियों ने बैसरन घाटी तक पहुंचने के लिए सामान्य रास्ते का इस्तेमाल नहीं किया था. वे कई किलोमीटर तक पहाड़ी और जंगल वाले कठिन ट्रैकिंग रूट से होकर घाटी तक पहुंचे थे ताकि स्थानीय लोगों और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बच सकें. NIA ने अपने दस्तावेजों में पूरे ट्रेकिंग रूट को सैटेलाइट इमेज और मैपिंग तकनीक के जरिए दिखाया है. जांच एजेंसी का मानना है कि आतंकियों ने पहले से इलाके की रेकी की हुई थी और उन्हें यह जानकारी थी कि किस रास्ते पर सुरक्षा बलों की निगरानी कम रहती है.

बैसरन घाटी में कैसे घुसे और कैसे निकले?

चार्जशीट में शामिल एक विस्तृत मैप के जरिए NIA ने आतंकियों की एंट्री और एग्जिट रूट को भी दिखाया है. एजेंसी के मुताबिक आतंकी बैसरन घाटी में पूर्वी दिशा से दाखिल हुए थे और हमला करने के बाद उत्तरी दिशा से निकल गए. इस मैप में यह भी दिखाया गया है कि आतंकियों ने किस दिशा में फायरिंग की, लोग कहां भागे और शव किन-किन स्थानों पर मिले.

जांच के अनुसार कुल 26 लोगों की मौत हुई थी. इनमें से 23 लोगों के शव बैसरन घाटी के अंदर मिले जबकि 3 शव घाटी के बाहर पाए गए. NIA का अनुमान है कि ये तीन लोग जान बचाने के लिए घाटी से बाहर की ओर भागे थे. लेकिन आतंकियों ने उन्हें भी निशाना बना लिया.

घटनास्थल से मिले 47 खाली कारतूस

फॉरेंसिक जांच में घटनास्थल से दो अलग-अलग प्रकार के हथियारों के इस्तेमाल के सबूत मिले हैं. NIA के अनुसार मौके से 5.56 एमएम और 7.62 एमएम के करीब 47 खाली कारतूस बरामद किए गए. जांच एजेंसी का कहना है कि इन कारतूसों की बैलिस्टिक जांच से आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों की पहचान और फायरिंग पैटर्न का पता चला है. चार्जशीट के मुताबिक आतंकियों ने सुनियोजित तरीके से फायरिंग की थी और हमले के दौरान उन्होंने अपनी पोजिशन लगातार बदली ताकि सुरक्षा बलों और लोगों को भ्रमित किया जा सके. घटनास्थल से मिले कारतूसों और शवों की लोकेशन को मैपिंग के जरिए जोड़कर NIA ने पूरे हमले की टाइमलाइन तैयार की है.

ऑपरेशन महादेव में हुआ अंत

हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया था. इसी दौरान दाचीगाम इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली जिसके बाद ऑपरेशन महादेव शुरू किया गया. सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर तीनों आतंकियों को मार गिराया. NIA की चार्जशीट में इस ऑपरेशन का भी विस्तार से जिक्र किया गया है.

जांच एजेंसी का कहना है कि पहलगाम हमला पूरी तरह से योजनाबद्ध आतंकी साजिश थी, जिसमें सीमा पार बैठे हैंडलर्स, स्थानीय मददगारों और प्रशिक्षित आतंकियों का पूरा नेटवर्क शामिल था. चार्जशीट में शामिल डिजिटल सबूत, सैटेलाइट इमेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट, हथियारों के सबूत और आरोपियों के बयान इस पूरी साजिश को जोड़ने का काम कर रहे हैं.

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