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आतंकियों को अपनों ने ही दी थी पनाह, हमले से पहले बैठकर खाना खाया और फिर...पहलगाम हमले पर चौंकाने वाले खुलासे

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं. आतंकियों को पहे पनाह दी गई ये जानते हुए भी कि वो आतंकी थे. पनाह देने के बाद अगले दिन भी आतंकियों की जानकारी नहीं दी गई.

आतंकियों को अपनों ने ही दी थी पनाह, हमले से पहले बैठकर खाना खाया और फिर...पहलगाम हमले पर चौंकाने वाले खुलासे
pahalgam terror attack
  • जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तान में बैठकर रची गई थी
  • आतंकियों ने स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई और पाकिस्तानी आतंकी साजिद जट्ट से संपर्क में रहकर रणनीति बनाई
  • आतंकियों ने स्थानीय निवासी परवेज अहमद की झोपड़ी में ठहरकर इलाके की रेकी की और हमले से पहले पांच घंटे वहीं थे
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नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम के बैसरन मैदान में 22 अप्रैल 2025 को हुए खूनी आतंकी हमले को लेकर NIA की चार्जशीट से एक-एक कर कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. आपको याद होगा कि इस हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय पोनी ऑपरेटर की जान चली गई थी. अब जांच एजेंसी ने अपनी विस्तृत चार्जशीट में दावा किया है कि इस पूरे हमले की साजिश पाकिस्तान में बैठकर रची गई थी और इसका मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा तथा उसके प्रॉक्सी संगठन TRF का आतंकी साजिद सैफुल्लाह जट्ट उर्फ लंगड़ा था. 

चार्जशीट के मुताबिक यह हमला सिर्फ अंधाधुंध फायरिंग नहीं था, बल्कि बेहद सुनियोजित और सैन्य रणनीति के तहत अंजाम दिया गया नरसंहार था.आतंकियों ने पहले इलाके की रेकी की, स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई, सुरक्षित ठिकाना लिया, फिर अगले दिन सही समय देखकर हमला किया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को निशाना बनाया जा सके. 

पाकिस्तान से मिल रहे थे निर्देश, मोबाइल चैट से खुले राज

NIA के अनुसार पाकिस्तान के कसूर में छिपा आतंकी साजिद जट्ट लगातार तीनों आतंकियों से संपर्क में था.जांच एजेंसी को आतंकियों के पास से मिले दो मोबाइल फोन से अहम डिजिटल सबूत मिले हैं.इन फोन में चैट रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट और लोकेशन डेटा मिला है. जांच में सामने आया कि साजिद जट्ट ने आतंकियों को बैसरन मैदान के सटीक को-ऑर्डिनेट्स भेजे थे. चार्जशीट में कहा गया है कि आतंकियों के फोन में Alpine Quest ऐप के स्क्रीनशॉट मिले, जिनमें बैसरन पार्क और उसके आसपास की लोकेशन मार्क की गई थीं.NIA ने यह भी दावा किया कि दोनों मोबाइल फोन पाकिस्तान में खरीदे गए थे और Xiaomi कंपनी के भारतीय डाटा से इसकी पुष्टि भी हुई. जांच एजेंसी का साफ कहना है कि हमला पाकिस्तान से रिमोट कंट्रोल तरीके से संचालित हो रहा था और पूरी कमांड लश्कर-ए-तैयबा तथा TRF के हाथों में थी. 

हमले से पहले स्थानीय लोगों के घर में रुके आतंकी

चार्जशीट के मुताबिक 21 अप्रैल की शाम करीब 4 बजे तीनों आतंकी बैसरन के पास मौजूद एक ढोक यानी पहाड़ी झोपड़ी तक पहुंचे. यह झोपड़ी स्थानीय निवासी परवेज अहमद की थी. वहां उनकी पत्नी ताहिरा और छोटा बच्चा भी मौजूद था. सबसे पहले आतंकियों को स्थानीय पोनी ऑपरेटर बशीर अहमद जठात ने देखा था. आतंकियों ने अल्लाह का नाम लेकर खाना और सुरक्षित जगह मांगी. जांच एजेंसी के अनुसार जठात आतंकियों को पहचान गया था, लेकिन उसने उनकी मदद की और उन्हें परवेज अहमद की झोपड़ी तक ले गया.

झोपड़ी में पहुंचते ही आतंकियों ने अपने हथियार छिपाने को कहा और फिर आराम से बैठकर खाना खाया. खाना खाते हुए वे अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों के कैंप, इलाके में सेना की मूवमेंट और पर्यटकों की संख्या के बारे में जानकारी जुटाते रहे.चार्जशीट के मुताबिक आतंकियों ने इसी दौरान पाकिस्तान में बैठे साजिद जट्ट से भी बातचीत की. करीब पांच घंटे तक वे वहीं रुके रहे. रात करीब 10 बजे निकलते समय उन्होंने ताहिरा से रोटियां बनवाईं और अपने साथ मसाले, कंबल, तिरपाल और खाना बनाने का बर्तन भी ले गए. जाते-जाते उन्होंने परवेज अहमद को 3 हजार रुपये दिए.

अगली सुबह फिर दिखे आतंकी, लेकिन किसी ने नहीं दी सूचना

NIA के मुताबिक 22 अप्रैल की सुबह बशीर अहमद और परवेज अहमद फिर से आतंकियों से मिले. इस बार तीनों आतंकी बैसरन पार्क के बाहर बैठे हुए थे,लेकिन इसके बावजूद दोनों ने न तो सुरक्षा बलों को सूचना दी और न ही वहां घूम रहे पर्यटकों या दूसरे पोनीवालों को सतर्क किया.चार्जशीट में कहा गया है कि आतंकी हमले से ठीक पहले एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम से खाना खा रहे थे. खाना खाने के बाद उन्होंने अपने बैग से कंबल निकाले और खुद को ढक लिया ताकि पहचान छिप सके. इसके बाद दो आतंकी उस जगह पहुंच गए जहां से एक छोटा नाला बैसरन पार्क में प्रवेश करता है. वहां बैठकर वे पार्क के अंदर लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने लगे. तीसरा आतंकी दूसरी दिशा में जाकर पोजिशन लेने लगा.

2 बजकर 23 मिनट पर शुरू हुआ नरसंहार

चार्जशीट के अनुसार दोपहर 2 बजकर 23 मिनट पर आतंकियों ने हमला शुरू किया. फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान के पास M4 कार्बाइन थी और उसके सिर पर GoPro कैमरा लगा हुआ था ताकि हमले की रिकॉर्डिंग की जा सके.बाकी दो आतंकी हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान भाई और हमजा अफगानी  AK-47 लेकर मैदान के मुख्य गेट की तरफ बढ़े. NIA के मुताबिक आतंकियों ने बेहद रणनीतिक तरीके से हमला किया. एक तरफ से मुख्य गेट पर फायरिंग हुई जबकि दूसरी तरफ से जिपलाइन एरिया के पास हमला किया गया. इससे बीच का पूरा मैदान एनक्लोज्ड किल जोन बन गया, यानी ऐसा इलाका जहां फंसे लोगों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था.

“कलमा पढ़ो…” नहीं पढ़ पाए तो मार दी गोली

चार्जशीट में बताया गया है कि आतंकियों ने कई लोगों की धार्मिक पहचान पूछी.जो लोग कलमा नहीं पढ़ पाए या जिन्होंने खुद को गैर-मुस्लिम बताया, उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी गई. जांच एजेंसी के अनुसार आतंकियों ने कई पीड़ितों को एक्जीक्यूशन स्टाइल में निशाना बनाया. फायरिंग के दौरान वे लगातार “मोदी को बोलो” चिल्ला रहे थे ताकि साफ संदेश दिया जा सके कि यह हमला भारत सरकार और देश के खिलाफ आतंकी संदेश देने के लिए किया गया है.NIA का कहना है कि यह हमला सिर्फ हत्या नहीं बल्कि वैचारिक और धार्मिक नफरत से प्रेरित आतंकवादी कार्रवाई थी.

भागते समय भी की “जश्न वाली फायरिंग”

चार्जशीट में कहा गया है कि हमला करने के बाद भी आतंकियों का आतंक खत्म नहीं हुआ.भागते समय उन्हें पार्क के बाहर पेड़ों के पीछे छिपे तीन नागरिक दिखे.आतंकियों ने उन्हें भी बेहद करीब से गोली मार दी. इसके बाद भागते हुए आतंकियों ने सेलिब्रेटरी फायरिंग यानी जश्न मनाते हुए गोलियां चलाईं.जांच एजेंसी के अनुसार इससे साफ है कि आतंकी इस नरसंहार को अपनी कामयाबी मान रहे थे.

गोप्रो कैमरा, M4 राइफल और आतंकी  तीनों निकले कॉमन

NIA की जांच में यह भी सामने आया कि पहलगाम हमला और अक्टूबर 2024 में श्रीनगर-लेह हाईवे पर हुए APCO कैंप हमले के बीच गहरा संबंध है. 20 अक्टूबर 2024 को गांदरबल जिले के जगंगीर इलाके में Z-Morh टनल प्रोजेक्ट पर काम कर रही APCO कंपनी के कैंप पर हमला हुआ था, जिसमें 7 कर्मचारियों की हत्या कर दी गई थी.

उस मामले में मारे गए आतंकी जुनैद अहमद भट के मोबाइल से GoPro कैमरे की तस्वीरें मिली थीं. बाद में यही GoPro कैमरा जुलाई 2025 में डाचीगाम जंगल में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ के बाद बरामद हुआ.जांच में पता चला कि APCO हमले में इस्तेमाल हुई M4 कार्बाइन भी वही थी जो पहलगाम हमले में इस्तेमाल हुई.इतना ही नहीं, दोनों हमलों में फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शामिल था. NIA ने कहा कि एक ही आतंकी, एक ही M4 कार्बाइन और एक ही GoPro कैमरे का दोनों घटनाओं में इस्तेमाल यह साबित करता है कि दोनों हमलों के पीछे वही पाकिस्तानी आतंकी मॉड्यूल था.

सोशल मीडिया से भी पाकिस्तान का कनेक्शन उजागर

हमले के कुछ ही घंटों बाद TRF से जुड़े माने जाने वाले Mastodon हैंडल “KashmirFight” ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत दुनिया भर से पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा, तो TRF ने Telegram Bot के जरिए नया प्रचार शुरू किया और कहा कि उनका इस हमले से कोई लेना-देना नहीं है. NIA ने तकनीकी जांच के जरिए दोनों सोशल मीडिया गतिविधियों के IP एड्रेस ट्रेस किए. जिम्मेदारी लेने वाला IP पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के बट्टारवाला इलाके का निकला, जबकि हमले से इनकार करने वाला IP रावलपिंडी से जुड़ा मिला. इसके अलावा कुछ फेसबुक अकाउंट और फोन नंबर भी रावलपिंडी और बहावलपुर से ऑपरेट होते पाए गए.

1113 गवाहों से पूछताछ, अभी भी जारी है जांच

NIA ने बताया कि इस केस की जांच अभी भी जारी है.एजेंसी अब ड्रोन के जरिए भेजे गए हथियार, नकदी और ड्रग्स के नेटवर्क की पड़ताल कर रही है.इसके अलावा आतंकियों के ओवरग्राउंड वर्कर्स, डिजिटल नेटवर्क और जैश-ए-मोहम्मद, अलकायदा, हमास जैसे दूसरे आतंकी संगठनों से संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है. इस केस में अब तक 1113 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है. इनमें ढोक में रहने वाले लोग, पोनीवाले, फोटोग्राफर, ढाबा कर्मचारी, टैक्सी ड्राइवर, दुकानदार और स्थानीय निवासी शामिल हैं.

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