Pahalgam Latest News: आज पहलगाम हमले का एक साल पूरा हो गया, देश उन बेकसूर नागरिकों की मौत को कभी नहीं भूलेगा, जिन्हें आतंकियों ने धर्म पूछकर गोली मार दी थी. कश्मीर का अनंतनाग जिला आतंकियों का ठिकाना रहा है और आतंकी संगठन कभी नहीं चाहते कि पहलगाम में सैलानियों का सैलाब आए और उनका एजेंडा नाकाम हो जाए. पहलगाम हमले (latest news on pahalgam attack) के बाद ऑपरेशन सिंदूर (operation sindoor) के जरिये भारत ने पाकिस्तान (india pakistan war) को कभी न भूलने वाला सबक सिखाया था.पहलगाम के इतिहास की बात करें तो यहां कभी हिंदू राजाओं का शासन था. कश्मीर की खूबसूरत घाटी में पहलगाम को पौराणिक ग्रंथों में प्राचीन ग्राम या पुराना गांव के तौर पर भी जाना जाता था.
पहलगाम का इतिहास
पहलगाम का इतिहास हिंदू पौराणिक कथाओं और भगवान शिव से गहरा संबंध है. हिंदू और बौद्ध काल में पहलगाम कश्मीरी शैव दर्शन का केंद्र था. कल्हण की राजतरंगिणी में भी लिद्दर घाटी (Lidder Valley) के इस इलाके का जिक्र मिलता है. यहां 800 साल से भी पुराना ममलेश्वर मंदिर है, जो शिव भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है. साथ ही ये अमरनाथ यात्रा का बेस कैंप भी है.

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अमरनाथ यात्रा का द्वार
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाने के लिए अमरनाथ गुफा ले जा रहे थे, तब उन्होंने अपने नंदी को इसी स्थान पर छोड़ा था. पहलगाम शब्द का एक अर्थ चरवाहों का गांव भी है. इस साल अमरनाथ यात्रा फिर शुरू होने वाली है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, आगे की यात्रा में उन्होंने 'चंदनवाड़ी' में अपने माथे से चंदन उतारा, शेषनाग झील में अपने गले के नागों को छोड़ा. पंचतरणी में पांच तत्वों का त्याग किया.सदियों से पहलगाम छड़ी मुबारक (पवित्र छड़ी) की यात्रा का पारंपरिक मार्ग रहा है. दशनामी अखाड़े के साधु और श्रद्धालु इसी मार्ग से गुफा की ओर बढ़ते रहे हैं.
पहलगाम का ममलेश्वर मंदिर
पहलगाम में विख्यात ममलेश्वर मंदिर है. यह 12वीं शताब्दी का एक प्राचीन शिव मंदिर है. इसे राजा जयसिंह के शासन में बना था और पूरी तरह पत्थर से बना है. ये पहलगाम के सबसे पुराने जीवित स्मारकों में से एक है. हिमालय के कोलाहोई ग्लेशियर से निकलने वाली लिद्दर नदी यहां की लाइफलाइन है. कहा जाता है कि भगवान गणेश ने इसी स्थान पर माता पार्वती के द्वारपाल की भूमिका निभाई थी, जिससे इस स्थान को ममल ( मत जाओ) नाम मिला. पहलगाम के पास मटंन का सूर्य मंदिर भी यहां हिंदू राजाओं के इतिहास की कहानी कहता है. यहां के स्थानीय पुरोहितों (कश्मीरी पंडित) के पास सदियों पुराने वंशावली रजिस्टर हैं, जो देश भर से आने वाले हिंदू परिवारों के इतिहास और पूर्वजों का रिकॉर्ड रखते हैं.

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गुज्जर और बकरवाल का ठिकाना
कश्मीर के सुल्तानों के शासन में 14वीं से 16वीं सदी के बीच पहलगाम खानाबदोश समुदाय गुज्जर और बकरवाल के लिए अहम ठिकाना था. फिर मुगल काल में बादशाहों को भी कश्मीर की घाटियों से लगाव रहा. मुगलों का मुख्य केंद्र श्रीनगर रहा. लिद्दर नदी के किनारे ये इलाका शिकार और गर्मी की छुट्टियों में आरामगाह के तौर पर इस्तेमाल होता था. मध्यकाल तक पहलगाम कश्मीरी शैव विद्वानों का निवास स्थान था, जहां वे प्रकृति के बीच ध्यान और शास्त्रों का अध्ययन करते थे,
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डोगरा महाराजाओं का शासन
पहलगाम को एक आधुनिक पर्यटन स्थल के तौर पर पहचान डोगरा महाराजाओं के समय मिली थी. महाराजा रणबीर सिंह और प्रताप सिंह के शासन में अमरनाथ यात्रा का बेहतर प्रबंध किया गया. पहलगाम अमरनाथ यात्रा का मुख्य पड़ाव (Base Camp) बना. महाराजा गुलाब सिंह और महाराजा हरि सिंह के शासन में भी मंदिरों का जीर्णोद्धार और विश्रामालय बनवाए गए.

Pahalgam Betab Valley
अंग्रेजों की आरामगाह, बेताब वैली
ब्रिटिश शासन में अंग्रेज पर्वतारोहियों और सैलानियों ने पहलगाम को दुनिया का सबसे खूबसूरत चरवाहा गांव बताया और ये दुनिया भर में मशहूर हुआ. 1947 के बाद पहलगाम का आयाम तेजी से बदला. 1970 और 80 के दशक में पहलगाम बॉलीवुड की सबसे पसंदीदा लोकेशन बना. फिल्म बेताब (1983) की शूटिंग के बाद यहाँ की एक घाटी का नाम ही बेताब वैली पड़ गया.
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पहलगाम में 80 फीसदी मुस्लिम आबादी
पहलगाम जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में है. यह जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर और श्रीनगर से लगभग 95 किमी दूर है. 2011 की जनगणना में पहलगाम की आबादी 10 हजार के करीब थी. यहां मुस्लिम आबादी 80 फीसदी और हिंदू 18 फीसदी हैं. बाकी सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन धर्म के लोग हैं.
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