- पश्चिम बंगाल में बाहरी लोगों को तटीय इलाकों में होटल बुकिंग से रोकने का आदेश जारी हुआ है
- यह प्रतिबंध दीघा, शंकरपुर, ताजपुर और मंदरमणि जैसे पर्यटन स्थलों में मतदान समाप्ति तक लागू रहेगा
- जलपाईगुड़ी जिले में भी मतदान से पहले 48 घंटे तक बाहरी व्यक्तियों को होटलों में ठहरने से रोका जाएगा
पश्चिम बंगाल में 9 दिनों तक शराब पर बैन के बाद अब एक और फैसले ने नई बहस छेड़ दी है. पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के ऑफिस ने नया आदेश जारी करते हुए बताया कि बाहरियों को होटल बुकिंग के लिए कमरे नहीं दिए जाएंगे. यहां बहरियों का अर्थ उन लोगों से है जो उस स्थानीय विधानसभा क्षेत्र के निवासी नहीं हैं. यह प्रतिबंध मंगलवार शाम 6 बजे से लागू होगा और मतदान समाप्त होने तक लागू रहेगा. इस फैसले का उद्देश्य बाहरी लोगों की आवाजाही पर नजर रखना और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित होने से रोकना बताया जा रहा है.
किनपर लागू होगा आदेश?
आदेश दीघा, शंकरपुर, ताजपुर और मंदरमणि जैसे तटीय पर्यटन क्षेत्रों में सख्ती से लागू किया गया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के दौरान केवल संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निवासी ही होटलों में ठहर सकेंगे.पूर्व मेदिनीपुर के जिला मजिस्ट्रेट और जिला निर्वाचन अधिकारी निरंजन कुमार ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि ये सभी पर्यटन स्थल रामनगर विधानसभा क्षेत्र में आते हैं.उन्होंने कहा, “इस विधानसभा क्षेत्र के निवासियों के अलावा किसी भी बाहरी व्यक्ति को किसी भी होटल में ठहरने की अनुमति नहीं दी जाएगी.” उन्होंने आगे बताया कि चुनाव आयोग के दिशा‑निर्देशों के अनुसार जिले के सभी होटलों को गैर‑निवासियों को कमरा देने से मना करने के निर्देश दिए गए हैं.
यह पाबंदी सिर्फ तटीय इलाकों तक सीमित नहीं है.जलपाईगुड़ी जिले में भी पुलिस ने होटलों को औपचारिक नोटिस जारी किए हैं. इन नोटिसों में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 और चुनाव आयोग की 72 घंटे की मानक प्रक्रिया (SOP) का हवाला दिया गया है. नोटिस में साफ निर्देश दिया गया है कि मतदान से पहले के आखिरी 48 घंटों में किसी भी बाहरी व्यक्ति को होटलों में ठहरने नहीं दिया जाएगा. हालांकि, इस फैसले को लेकर होटल उद्योग से जुड़े लोगों में चिंता जताई जा रही है. ग्रेटर सिलीगुड़ी होटलियर वेलफेयर एसोसिएशन ने इस आदेश पर स्पष्टता मांगते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को पत्र लिखा है. एसोसिएशन ने एक तरफ जहां आदर्श आचार संहिता (MCC) और चुनाव के दौरान सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत का सम्मान किया है, वहीं दूसरी तरफ कहा है कि इस आदेश से होटल संचालन में गंभीर दिक्कतें पैदा हो रही हैं. फिलहाल इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से और स्पष्ट निर्देश का इंतजार किया जा रहा है.
आदेश पर होटल वाले बोले-हमें परेशानी हो सकती है
एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि अगर होटलों से मेहमानों को निकालना पड़ा, तो इससे होटल संचालकों और पर्यटकों दोनों को भारी परेशानी हो सकती है.पत्र में कानूनी और व्यावहारिक समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया गया है. बताया गया है कि परिवारिक कार्यक्रमों से लेकर कॉर्पोरेट आयोजनों तक की कई बुकिंग महीनों पहले से की जा चुकी हैं.इसके अलावा, संघ ने यह भी चेतावनी दी कि ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए किए गए वादों और बुकिंग्स के चलते स्थिति और जटिल हो सकती है.
संघ ने अपने पत्र में लिखा,“हम आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि कृपया यह स्पष्ट करें कि क्या कोई औपचारिक अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें सिलीगुड़ी में होटलों को पूरी तरह खाली कराने और नए मेहमानों का चेक‑इन रोकने का आदेश दिया गया हो.”वहीं दूसरी ओर, आदर्श आचार संहिता (MCC) के तहत चुनाव आयोग के दिशा‑निर्देशों में यह प्रावधान है कि मतदान से पहले के अंतिम 48 घंटों में किसी विधानसभा क्षेत्र के बाहर से आने वाले राजनीतिक नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. इसका उद्देश्य प्रचार समाप्त होने के बाद अनुचित प्रभाव को रोकना और समान अवसर बनाए रखना है.
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