- महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने का नया नियम लागू किया है।
- मराठी न जानने वाले चालकों के लाइसेंस और परमिट रद्द किए जाने की संभावना है, जो एक मई से प्रभावी होगा।
- मुंबई डब्बेवाला एसोसिएशन और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इसका समर्थन करते हुए मराठी सीखने पर जोर दिया है।
Maharashtra Auto Taxi Marathi Rule: महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने का फैसला अब बड़े विवाद का रूप लेता जा रहा है. जहां एक ओर मुंबई डब्बेवाला एसोसिएशन और राज ठाकरे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने सरकार के इस कदम का पुरजोर समर्थन किया है. राज ठाकरे की पार्टी ने तो इस फैसले के समर्थन में अपने कार्यकर्ताओं को बाकायदा मैदान में भी उतार दिया है. वहीं दूसरी ओर ऑटो रिक्शा संगठनों ने इस आदेश के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. दरअसल कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाइक ने घोषणा की थी कि मराठी न जानने वाले ड्राइवरों के लाइसेंस रद कर दिए जाएंगे. 1 मई से लागू होने वाले इस नियम के खिलाफ महाराष्ट्र भर में ऑटो और टैक्सी चालकों ने 4 मई से राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है.
क्या है आदेश और क्यों है विवाद?
महाराष्ट्र परिवहन विभाग के नए नियमों के अनुसार, जो चालक मराठी भाषा की परीक्षा में विफल होंगे, उनके लाइसेंस और परमिट रद किए जा सकते हैं। इसको लेकर महाराष्ट्र भर में ऑटो और टैक्सी चालकों में भारी रोष है। यूनियन का दावा है कि मुंबई महानगर क्षेत्र के लगभग 75% ड्राइवर हिंदी भाषी हैं, और इस नियम से लाखों लोगों की रोजी-रोटी छिनने का खतरा पैदा हो गया है.

Maharashtra Auto Taxi Marathi: MNS कार्यकर्ताओं ने तो बाकायदा सड़कों पर क्लास लगा कर ऑटो चालकों को मराठी भी सिखाई
डबेवाला एसोसिएशन का समर्थन: 'महाराष्ट्र में है तो मराठी सीखें'
मुंबई डबेवाला एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष तळेकर ने परिवहन विभाग के इस निर्णय का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि रिक्शा चालकों को यह समझना चाहिए कि वे महाराष्ट्र में अपना व्यवसाय कर रहे हैं और उनका रोजाना का संपर्क मराठी भाषी लोगों से होता है, इसलिए उन्हें मराठी भाषा सीखनी ही चाहिए. तळेकर ने अपना उदाहरण देते हुए कहा, "मुंबई के डबेवाले खुद मराठी हैं, लेकिन काम के दौरान वे ग्राहकों की सुविधा के लिए हिंदी और गुजराती भी बोलते हैं. आखिर यह व्यवसाय का हिस्सा है." उन्होंने सलाह दी कि आंदोलन की भाषा अपनाने के बजाय रिक्शा चालकों को कम से कम मराठी का बुनियादी ज्ञान जरूर हासिल करना चाहिए.
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मनसे का 'मराठी बोलता हूं' कैंपेन
राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने भी इस फैसले के समर्थन में मुंबई के उपनगरों में मोर्चा संभाल लिया है. मनसे ने ऑटो रिक्शा पर स्टिकर लगाकर अभियान शुरू किया है, जिस पर लिखा है- "मैं मराठी बोलता हूं.. मैं मराठी समझता हूं.. आइए और मेरे रिक्शा में बैठिए.." मनसे की ट्रांसपोर्ट विंग के अध्यक्ष संजय नायक ने कहा कि सालों से मुंबई में रह रहे कई उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय लोग मराठी बोलना जानते हैं, लेकिन जो लोग इस नियम का विरोध कर रहे हैं, उन्हें 'मनसे स्टाइल' में सबक सिखाया जाएगा.
4 मई से 'चक्का जाम' की चेतावनी
दूसरी ओर, 'ऑटो-रिक्शा चालक-मालक संयुक्त कृती समिति, महाराष्ट्र' ने इस आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई है. संगठन ने घोषणा की है कि यदि 28 अप्रैल तक राज्य परिवहन विभाग इस आदेश को वापस नहीं लेता, तो 4 मई से रेलवे स्टेशनों, बस डिपो और रिहायशी इलाकों में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.शशांक राव के नेतृत्व वाली यूनियनों ने इस नियम को 'मनमाना' करार दिया है. परिवहन विभाग के अनुसार, 1 मई से प्रभावी होने वाले इस नियम का पालन न करने वाले ड्राइवरों का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है.
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