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महिला आरक्षण और परिसीमन पर नवीन पटनायक की शर्त, बोले- 'ओडिशा के अधिकारों से समझौता नहीं'

नवीन पटनायक ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि अगले 48 घंटों के भीतर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए और यह प्रस्ताव पारित किया जाए कि ओडिशा के राजनीतिक अधिकारों का 0.001% भी अन्य राज्यों द्वारा छीनने की अनुमति न दी जाए.

महिला आरक्षण और परिसीमन पर नवीन पटनायक की शर्त, बोले- 'ओडिशा के अधिकारों से समझौता नहीं'
  • ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर अपने संदेह व्यक्त किए हैं.
  • पटनायक ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी को पत्र लिखकर राज्य के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा की मांग की.
  • उन्होंने विधानसभा का सत्र बुलाकर ओडिशा के राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया.
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ओडिशा के पूर्व CM और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक का स्वागत केवल तभी किया जब ओडिशा के राजनीतिक अधिकार बरकरार रहें. पटनायक ने ओडिशा के मुख्यमंत्री से इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने की अपील की है.

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने CM मोहन चरण मांझी को एक पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने लिखा, 'हम परिसीमन विधेयक का स्वागत तभी करेंगे जब ओडिशा के राजनीतिक अधिकार बरकरार रहेंगे. यह मात्र संख्या का मामला नहीं है. यह विधेयक संविधान में निहित सहकारी संघवाद की भावना पर सीधा प्रहार करता है. राजनीतिक अधिकारों में किसी भी प्रकार की कमी ओडिशा और यहां की जनता की आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाएगी. ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में मैं आपसे इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की अपील करता हूं. आपके पास ऐसा करने का नैतिक और वैध अधिकार है.'

पत्र के जरिए नवीन पटनायक ने कहा, 'मामले की गंभीरता को देखते हुए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि अगले 48 घंटों के भीतर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए और यह प्रस्ताव पारित किया जाए कि ओडिशा के राजनीतिक अधिकारों का 0.001% भी अन्य राज्यों द्वारा छीनने की अनुमति न दी जाए. एक ओडिया नागरिक के रूप में मैं आपसे इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की अपील करता हूं. बीजेडी इस मामले में आपके साथ खड़ी रहेगी, क्योंकि यह हमारे प्रिय राज्य और मातृभूमि ओडिशा के भाग्य और भविष्य को प्रभावित करता है.'

बता दें कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए बृहस्पतिवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक और इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है.

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