मध्य प्रदेश की राजनीति में इस वक्त शाह परिवार दो अलग-अलग लेकिन उतने ही तीखे विवादों के केंद्र में है. एक ओर राज्य के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में हैं, तो दूसरी ओर उनके भतीजे और पहली बार कांग्रेस विधायक बने अभिजीत शाह मकड़ाई अपनी ही पार्टी के भीतर वैचारिक कटघरे में खड़े कर दिए गए हैं. मुद्दे अलग हैं, लेकिन राजनीतिक उथल-पुथल एक-सी तीव्र.
कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए “आतंकियों की बहन” वाले बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर फैसला लेने का निर्देश दिया है. इस आदेश ने न सिर्फ राज्य सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विजय शाह के खिलाफ संभावित ट्रायल की राह भी खोल दी है.
इसी बीच शाह परिवार का दूसरा चेहरा टिमरनी से कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह एक बिल्कुल अलग कारण से विवादों में घिर गया है. 31 वर्षीय विधायक ने हरदा जिले के राहतगांव में आयोजित एक हिंदू सम्मेलन में शिरकत की, जो आरएसएस से जुड़े आयोजनों की श्रृंखला का हिस्सा बताया जा रहा है. मंच से “जयतु जयतु हिंदू राष्ट्र” के नारे लगे, साधु-संतों के बीच अभिजीत शाह का सम्मान हुआ और बाद में उन्होंने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा भी किया. मंच के पीछे लिखा था “हिंदू संगठन ही सभी समस्याओं का हल है.”
यही तस्वीरें और संदेश कांग्रेस के भीतर असहजता का कारण बन गए. हरदा जिला कांग्रेस प्रवक्ता आदित्य गर्गव ने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर अभिजीत शाह पर कार्रवाई की मांग कर दी. पत्र में सवाल उठाया गया कि कांग्रेस टिकट पर चुना गया विधायक अगर आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेता है, तो क्या वह पार्टी की घोषित विचारधारा को कमजोर नहीं कर रहा। पत्र में यह भी पूछा गया कि अभिजीत शाह गांधी, नेहरू, पटेल और मौलाना आज़ाद की विचारधारा के साथ हैं या फिर आरएसएस की.
विडंबना यह है कि जिस समय एक ओर कुंवर विजय शाह सुप्रीम कोर्ट के दबाव और संभावित कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं, उसी समय उनके भतीजे को पार्टी के भीतर वैचारिक कसौटी पर परखा जा रहा है.
कौन हैं अभिजीत शाह
अभिजीत शाह मकड़ाई, दिवंगत राजा अजय शाह के बेटे और विजय शाह के भतीजे हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने ही चाचा और बीजेपी उम्मीदवार संजय शाह को मात्र 950 वोटों से हराकर राजनीतिक इतिहास रचा था. दिलचस्प तथ्य यह भी है कि 2013 में अभिजीत शाह ने संजय शाह का चुनाव अभियान संभाला था और लंबे समय तक उनका जुड़ाव बीजेपी व आरएसएस से रहा, बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा.
31 वर्ष की उम्र में विधानसभा पहुंचने वाले सबसे युवा विधायकों में शामिल अभिजीत शाह अब महज एक साल के भीतर ऐसे विवाद में फंस गए हैं, जो न सिर्फ उनके राजनीतिक भविष्य की परीक्षा है, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व के लिए भी एक कठिन वैचारिक चुनौती बनता दिख रहा है.
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