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मिडिल ईस्ट के डेटा सेंटर्स पर ड्रोन अटैक से उड़ानों से लेकर बैंकिंग तक सब ठप; जानें ये क्यों इतना खतरनाक

इजरायल-ईरान युद्ध के दौरान यूएई और बहरीन में एमेजॉन के तीन बड़े डेटा सेंटर्स ड्रोन हमलों की चपेट में आए हैं. इन हमलों की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में क्लाउड सर्विस और कंप्यूटिंग सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

मिडिल ईस्ट के डेटा सेंटर्स पर ड्रोन अटैक से उड़ानों से लेकर बैंकिंग तक सब ठप; जानें ये क्यों इतना खतरनाक
  • यूएई और बहरीन में एमेजॉन के तीन बड़े डेटा सेंटर ड्रोन हमलों की चपेट में आ गए, जिससे सेवाएं बाधित हुईं
  • इससे मिडिल ईस्ट में क्लाउड सर्विस और कंप्यूटिंग सुविधाओं पर असर पड़ा, बैंकिंग और डिजिटल सेवाएं प्रभावित हुईं
  • यूएई के शेयर बाजार को तकनीकी खराबी की वजह से दो दिन बंद रखना पड़ा, हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंस गए

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने अब नया खतरनाक मोड़ ले लिया है. एमेजॉन ने बताया है कि यूएई और बहरीन में उसके तीन बड़े डेटा सेंटर्स ड्रोन हमलों की चपेट में आए हैं. इन हमलों की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में क्लाउड सर्विस और कंप्यूटिंग सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. इसका बैंकिंग से लेकर रोजमर्रा की डिजिटल सेवाओं पर गहरा असर पड़ा है.

UAE, बहरीन के डेटा सेंटर पर हमले

एमेजॉन के मुताबिक, यूएई में दो डेटा सेंटर्स पर रविवार को सीधे ड्रोन अटैक हुए थे. हालांकि ये हमले किसने किए, ये नहीं बताया गया. इसके अलावा बहरीन स्थित कंपनी के डेटा सेंटर के पास हुए एक ब्लास्ट से इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है. कंपनी का कहना है कि नुकसान बहुत बड़ा है और रिपेयर करने का काम चल रहा है, लेकिन सर्विस पूरी तरह बहाल होने में लंबा वक्त लग सकता है.

शेयर मार्केट ठप, हवाई अड्डों पर यात्री फंसे

ये हमले कितने बड़े थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तकनीकी खराबी और इंटरनेट सेवाओं में अड़चन की वजह से यूएई के शेयर बाजार को सोमवार और मंगलवार दोनों दिन बंद रखना पड़ा. इतना ही नहीं, दुबई और कुवैत के हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंस गए क्योंकि अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) ठप होने से उड़ानों के संचालन और पैसेंजरों के डेटा मैनेजमेंट में भारी दिक्कतें आईं.

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युद्ध नीति में बड़ा बदलाव

ये हमले युद्ध नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अब हमले महज सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गए हैं. आज की दुनिया पूरी तरह इंटरनेट और डेटा पर डिपेंड है, ऐसे में डेटा सेंटर्स को निशाना बनाकर दुश्मन देश की अर्थव्यवस्था, सैन्य संचार और नागरिक सेवाओं को एक ही झटके में पंगु बनाया जा सकता है.

डेटा सेंटर्स पर ही निशाना क्यों?

  • डेटा सेंटर में एक ही जगह बड़ा तादाद में कंप्यूटिंग पावर होने के कारण वहां हमले से कई देशों का सिस्टम एक साथ क्रैश किया जा सकता है.
  • आधुनिक सेनाएं दुश्मन के ठिकानों पर हमले, इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स वगैरा के लिए इन्हीं डिजिटल नेटवर्कों का इस्तेमाल करती हैं.
  • डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के दौर में डेटा सेंटर ठप होने का मतलब है देश की अर्थव्यवस्था को तगड़ी चोट लगना.

युद्ध के सॉफ्ट टारगेट 

मिडिल ईस्ट जो अब तक केवल तेल सप्लाई का ग्लोबल सेंटर माना जाता था, अब टेक्नोलोजी और एआई में भारी निवेश की वजह से जंग के टारगेट पर है. एमेजॉन, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने इस इलाके में अरबों डॉलर का इन्वेस्टमेंट किया है और आगे भी करने जा रही हैं. सऊदी अरब और यूएई में बन रहे नए टेक्नोलोजी सेंटर अब युद्ध के सॉफ्ट टारगेट बन गए हैं, जिसने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है.

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