- उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा निदेशालय में मारपीट जैसी घटनाओं के बाद सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा सख्त कर दी है.
- सभी सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता के तहत FIR होगी.
- कार्यालय परिसर में पहचान पत्र अनिवार्य होगा और प्रवेश के लिए मेटल डिटेक्टर व शारीरिक जांच लागू की गई है.
उत्तराखंड के सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बढ़ती बदतमीजी और हिंसा की घटनाओं (विशेषकर शिक्षा निदेशालय में हुई हालिया मारपीट) को देखते हुए शासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम लागू किए हैं. ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से दुर्व्यवहार करने वालों पर अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर दर्ज होगी और उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा.
SOP में क्या लिखा गया है?
1.1. कार्यस्थल पर बाहरी आक्रामकता, अनावश्यक दबाव या हिंसा से लोक सेवकों को भौतिक और विधिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए एक सुदृढ़ तंत्र स्थापित करना.
1.2. यह SOP उत्तराखंड के समस्त सरकारी कार्यालयों (निदेशालयों, जिलाधिकारी परिसरों, ब्लॉक कार्यालयों, शिक्षण एवं चिकित्सा संस्थानों) पर लागू होगी. जिन कार्यालयों में पहले से विशेष सुरक्षा है (जैसे सचिवालय/विधानसभा), वहां यह प्रभावी नहीं होगी.
1.3. ये नियम आम जनता, ठेकेदारों, जनप्रतिनिधियों, समर्थकों और व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों (PSO) सहित सभी आगंतुकों पर समान रूप से लागू होंगे.
1.4. विभाग के सचिव सुरक्षा खतरों के आधार पर PSARA (पसारा) के तहत पंजीकृत एजेंसियों से निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर सकेंगे.
सरकारी ऑफिस परिसर में एंट्री के लिए SOP
2.1. समस्त नियमित एवं संविदा कर्मचारियों के लिए कार्यालय परिसर में पहचान पत्र स्पष्ट रूप से धारण करना अनिवार्य होगा.
2.2. परिसर में आम जनता के वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा. विशिष्ट व्यक्तियों या दिव्यांगजनों के वाहनों की सघन जांच (अंडर-व्हीकल मिरर द्वारा) के बाद ही प्रवेश मिलेगा.
2.3 प्रवेश द्वारों पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और सुरक्षा कर्मियों द्वारा शारीरिक जांच अनिवार्य होगी. दुर्व्यवहार करने वालों के लिए फोटो युक्त "नो एंट्री" पंजिका रखी जाएगी.
3. विजिटर्स को लेकर भी नया SOP
3.1. विजिटर की उच्च रिज़ॉल्यूशन फोटो और वैध सरकारी आईडी (आधार/वोटर कार्ड) का सत्यापन कर डिजिटल प्रविष्टि की जाएगी.
3.2. सत्यापन के बाद क्यूआर (QR) कोड या आरएफआईडी (RFID) बैज दिया जाएगा, जो आगंतुक को केवल निर्धारित 'मीटिंग जोन' तक ही सीमित रखेगा.
3.3. वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने के लिए पहले से समय लेना अनिवार्य होगा. बिना समय लिए आने वालों को प्रवेश द्वार से वापस किया जा सकेगा.
4. शिष्टाचार, व्यवहार एवं बैठक प्रोटोकॉल
4.1. शिष्ट भाषा: सरकारी कर्मियों के साथ बातचीत में अमर्यादित भाषा का प्रयोग वर्जित है. परिसर में नारेबाजी या उत्तेजक व्यवहार प्रतिबंधित है.
4.2. प्रवेश सीमा: अधिकारी के कक्ष में एक समय में केवल दो (2) व्यक्ति ही प्रवेश कर सकेंगे.
4.3. प्रतिनिधिमंडल: यदि संख्या 2 से अधिक है, तो बैठक 'कॉन्फ्रेंस रूम' में होगी, जिसमें सीसीटीवी और अलग निकास द्वार होना अनिवार्य है. निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ अधिकतम तीन (3) व्यक्ति ही जा सकेंगे.
4.4. शस्त्र प्रतिबंध: वीआईपी के साथ आने वाले सशस्त्र सुरक्षा कर्मी अपने शस्त्र रिसेप्शन पर घोषित करेंगे और निर्धारित प्रतीक्षा कक्ष में ही रुकेंगे.
5. सुरक्षा को लेकर भी SOP
5.1. प्रवेश द्वारों, गलियारों और अधिकारियों के कक्षों में ऑडियो रिकॉर्डिंग युक्त HD CCTV कैमरे लगेंगे. इनका बैकअप कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखा जाएगा.
5.2. अधिकारियों की डेस्क और रिसेप्शन के नीचे 'साइलेंट पैनिक अलार्म' बटन लगाए जाएंगे ताकि आपात स्थिति में तुरंत सूचना मिल सके.
6. गाली-गलौज करने पर केस दर्ज होगा
6.1. लोक सेवक के साथ धक्का-मुक्की, मारपीट या गाली-गलौज पर BNS (2023) की धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज होगी.
6.2. दोषी व्यक्तियों को तुरंत परिसर से निष्कासित कर भविष्य के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा.
6.3 ऐसी घटनाओं की जांच निरीक्षक (Inspector) स्तर के अधिकारी द्वारा दो महीने के भीतर पूरी की जाएगी.
6.4. घटनास्थल को तुरंत सील किया जाएगा ताकि सीसीटीवी फुटेज और अन्य भौतिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो.
7. महत्वपूर्ण सूचनाओं का प्रदर्शन
- कार्यालय के प्रमुख स्थानों पर निम्नलिखित जानकारियां चस्पा की जाएंगी:
- आगंतुकों के लिए आचार संहिता.
- दुर्व्यवहार की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाइयों की सूची.
- आपातकालीन संपर्क विवरण.
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