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This Article is From Feb 26, 2026

गुप्त कमरे, सखी, स्विमिंग पूल... अविमुक्तेश्वरानंद के मठ को लेकर लेखिका भूमिका द्विवेदी के सनसनीखेज आरोप

लेखिका भूमिका द्विवेदी ने दावा किया है कि अविमुक्तेश्वरानंद के वाराणसी मठ में आध्यात्मिक केंद्र जैसी सादगी के बजाय लग्जरी अधिक है. वहां एसी, एलईडी टीवी और महंगे कालीनों से सजा हुआ लग्जरी माहौल है. अंदर के हॉल इतने शानदार हैं कि आंखें चौंधिया जाएं.

गुप्त कमरे, सखी, स्विमिंग पूल... अविमुक्तेश्वरानंद के मठ को लेकर लेखिका भूमिका द्विवेदी के सनसनीखेज आरोप
  • लेखिका भूमिका द्विवेदी ने दावा किया कि अविमुक्तेश्वरानंद के मठ में लग्जरी माहौल और रहस्यमयी कमरे हैं
  • भूमिका ने बताया कि वह 2022 में वाराणसी के विद्या मठ में करीब 2 महीने रुकी थीं. वहां का कंट्रोल सखी के पास है
  • दावा किया कि स्वरूपानंद से मिलने की कोशिश करने पर पता चला कि वहां अविमुक्तेश्वरानंद का कड़ा पहरा है

यौन शोषण और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. 2022 में अविमुक्तेश्वरानंद के वाराणसी मठ में दो महीने रह चुकीं लेखिका भूमिका द्विवेदी ने अब सामने आकर कई सनसनीखेज दावे किए हैं. उन्होंने मठ के अंदर लग्जरी माहौल, स्विमिंग पूल और गुप्त व रहस्यमयी कमरे होने का दावा किया है, जिसका कंट्रोल 'स्वामी जी की सखी' के पास है और वहां किसी को जाने की इजाजत नहीं है.  

'मठ के अंदर इतनी लग्जरी कि आंखें चौंधिया जाएं'

लेखिका भूमिका द्विवेदी ने बताया कि वह साल 2022 में वाराणसी के विद्या मठ में करीब 2 महीने रुकी थीं. उनका उद्देश्य काशी और प्रयाग पर शोध करके लिखना था, जिसके लिए स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें प्रोत्साहित किया था. लेकिन उन्होंने मठ के अंदर जो कुछ देखा, उसने उनकी राय ही बदल दी थी. भूमिका ने दावा किया है कि मठ में किसी आध्यात्मिक केंद्र जैसी सादगी के बजाय लग्जरी अधिक है. वहां एसी, एलईडी टीवी और महंगे कालीनों से सजा हुआ लग्जरी माहौल है. मठ के अंदर के हॉल इतने शानदार हैं कि आंखें चौंधिया जाएं.

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'स्वामी जी की सखी के पास पूरा कंट्रोल'

उन्होंने दावा किया कि मठ का पूरा नियंत्रण सखी के पास है. एक महिला ने मुस्कुराते हुए स्वयं को स्वामी जी की 'सखी' बताया, जो वहां सर्वेसर्वा की तरह रहती हैं. मठ के भीतर कुछ ऐसे हिस्से और कमरे ऐसे हैं, जहां किसी को जाने की अनुमति नहीं है. इन्हें 'दीदी लोगों का क्षेत्र' कहा जाता है. वहां लिफ्ट से जाने का रास्ता है और आम लोगों की एंट्री पूरी तरह बैन है. 

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लेखिका भूमिका द्विवेदी के मुताबिक अविमुक्तेश्वरानंद के बनारस वाले विद्या मठ को संभालने वाली 'सखी' की तस्वीर

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गुप्त कमरे, गुप्त दरवाजा, स्विमिंग पूल

भूमिका के मुताबिक, मठ में कमरों के अलावा एक गुप्त भी दरवाजा है, जिसकी निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाती है. इस सुरक्षा तंत्र का पूरा एक्सेस सखी के पास ही रहता है. उन्होंने मठ परिसर में स्वीमिंग पूल होने का भी दावा किया, लेकिन कहा कि मठ में रहने वाले बच्चे या छोटे बटुक वहां नहीं नहाते हैं. 

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छोटे बच्चों से बहुत काम कराने का आरोप 

लेखिका का आरोप है कि बेहद गरीब घरों से संबंध रखने वाले छोटे बटुकों से मठ में बहुत काम कराया जाता है. मैनेजर और रसोइया उनके सामान तक चोरी तक कर लेते हैं. उन्होंने दावा किया कि 8 साल के एक सुंदर बटुक ने उनके फोटो खिंचवाने से यह कहकर मना कर दिया था कि 'स्वामी श्री' ने आदेश दिया है कि किसी बाहरी के साथ फोटो मत खिंचवाना.

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"हर पुरुष की अपनी जरूरत होती है"

मठों में आमतौर पर सुबह 4 बजे उठने और कड़े नियमों का पालन करने की परंपरा होती है, लेकिन भूमिका का दावा है कि इस मठ में लोग अपनी मर्जी से उठते हैं और उन्हें कोई सख्त धार्मिक दिनचर्या नहीं दिखी. उन्होंने दावा किया कि मठ के मैनेजर मिश्रा ने उनसे कथित तौर पर कहा था कि "हर पुरुष की अपनी जरूरत होती है, वह विश्राम के लिए यहां आते हैं. मैनेजर ने भी उस महिला को स्वामी जी की सखी बताया था. 

अविमुक्तेश्वरानंद के मठ में सबकुछ रहस्यमयी!

मई 2022 में बनारस मठ से आने वाली भूमिका ने दावा किया कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के कमरे में कोई भी जा सकता था, वहां सिर्फ किताबें और ग्रंथ मिलते थे, लेकिन यहां (अविमुक्तेश्वरानंद के समय) सब कुछ छुपा हुआ और रहस्यमयी है. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने स्वरूपानंद से मिलने की कोशिश की थी, तब जानकारी मिली कि वह बीमार हैं और बेंगलौर में इलाज चल रहा है.

Dwarka's Shankaracharya Swami Swaroopanand died on Sunday at the age of 99 due to a heart attack.

'स्वरूपानंद सरस्वती से मिलने नहीं देते थे'

उन्होंने आगे कहा कि जब उन्होंने स्वामी स्वरूपानंद से मिलने की कोशिश की, तब पता चला कि वहां अविमुक्तेश्वरानंद का कड़ा पहरा है. लेखिका ने आरोप लगाया कि जब स्वरूपानंद सरस्वती बीमार थे, तब अविमुक्तेश्वरानंद ने उनके करीबी शिष्यों (जैसे सहजानंद) तक को उनसे मिलने नहीं दिया. उनका कहना था कि जब गद्दी वाले नहीं मिल पाए तो मैं तो बहुत दूर हूं. 

भूमिका द्विवेदी का कहना है कि वह किसी दबाव में नहीं हैं और जो कुछ उन्होंने अपनी आंखों से देखा, वही बता रही हैं. उन्होंने सखी के साथ कई तस्वीरें होने का भी दावा किया. भूमिका के दावों में कितनी सच्चाई है, ये तो जांच के बाद ही सामने आ सकेगा, लेकिन उनके दावों ने मठ के अंदर की कथित गोपनीय गतिविधियों और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

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