- ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आगरा में करीब 598 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन अस्थायी रूप से अटैच की है.
- मामला Ansal Properties से जुड़ा है और इसकी जांच CBI ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू की थी.
- गुरुग्राम सेक्टर 58 से 63 और 65 से 67 की जमीनों को गलत तरीके से निजी बिल्डरों को हस्तांतरित किया गया.
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आगरा में करीब 598 करोड़ रुपये की जमीन अस्थायी रूप से अटैच कर ली है. यह कार्रवाई PMLA के तहत की गई है. मामलाAnsal Properties & Infrastructure Ltd. (APIL) से जुड़ा है. यह जांच CBI द्वारा 23 जनवरी 2019 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. यह एफआईआर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई थी. एफआईआर में आपराधिक साजिश (धारा 120-बी), धोखाधड़ी (धारा 420) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत कई सरकारी अधिकारियों और निजी बिल्डरों,कॉलोनाइज़रों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिनमें एपीआईएल का नाम भी शामिल था.
जांच के मुताबिक मामला हरियाणा के गुरुग्राम में सेक्टर 58 से 63 और 65 से 67 की जमीन से जुड़ा है. इन जमीनों को पहले सार्वजनिक उद्देश्य (जैसे HUDA द्वारा विकास और लैंड बैंक बनाने) के नाम पर अधिग्रहण के लिए नोटिफाई किया गया था. लेकिन बाद में कथित तौर पर एक मिलीभगत और फर्जी प्रक्रिया के जरिए ज्यादातर जमीन निजी बिल्डरों के पक्ष में छोड़ दी गई.
ईडी का कहना है कि इस प्रक्रिया में नियमों और पारदर्शिता की अनदेखी की गई, जिससे जमीन मालिकों को भारी नुकसान हुआ और निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा. ईडी की जांच में सामने आया कि एपीआईएल ने जिन जमीनों पर अधिग्रहण की नोटिस जारी हो चुकी थी, उन्हीं पर जमीन मालिकों से कोलैबोरेशन एग्रीमेंट और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) लिए.
ईडी के मुताबिक अधिग्रहण की नोटिस के बाद जमीन मालिकों की सौदेबाजी की ताकत कमजोर हो गई थी. ऐसे हालात में जमीन बाजार भाव से काफी कम कीमत पर निजी कंपनियों को ट्रांसफर की गई, जिससे कंपनी को फायदा और किसानों और जमीन मालिकों को नुकसान हुआ.
इन व्यवस्थाओं के आधार पर हरियाणा के डिपार्टमेंट ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने एपीआईएल को लाइसेंस जारी किए. कुल 142.306 एकड़ जमीन पर रिहायशी कॉलोनी विकसित करने की मंजूरी दी गई. इनमें से 42.751 एकड़ अधिग्रहण की प्रक्रिया से बाहर की गई जमीन थी. इसी जमीन पर Esencia और Versalia नाम से प्रोजेक्ट विकसित किए गए. चूंकि ये प्रोजेक्ट पूरी तरह विकसित होकर तीसरे पक्ष (घर खरीदारों) को बेचे जा चुके हैं, इसलिए अब जमीन अपनी मूल स्थिति में नहीं है.
जांच में सामने आया कि ये जमीनें सहयोगी कंपनियों और कुछ व्यक्तियों के नाम पर थीं, लेकिन असली फंडिंग, कंट्रोल और लाभ का अधिकार एपीआईएल के पास था. ईडी ने साफ किया है कि अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों को कानून के शिकंजे से बचने नहीं दिया जाएगा. मामले में आगे की जांच PMLA, 2002 के तहत जारी है और आने वाले समय में और भी कार्रवाई संभव है.
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