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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हैं 22 भारतीय झंडे वाले कार्गो जहाज, सभी 611 नाविक सुरक्षित: शिपिंग मंत्रालय

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पश्चिमी हिस्से में फंसे 22 भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज़ों पर मौजूद सभी 611 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं. शिपिंग मंत्रालय ने स्थिति पर लगातार निगरानी की पुष्टि की है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हैं 22 भारतीय झंडे वाले कार्गो जहाज, सभी 611 नाविक सुरक्षित: शिपिंग मंत्रालय
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे 22 भारतीय जहाजों पर मौजूद सभी 611 नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं
  • पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने जहाजों और नाविकों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है
  • भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत के बाद भारतीय जहाजों को वहां से निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई है
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नई दिल्ली:

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर भारत के लिए राहत भरी जानकारी सामने आई है. पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पश्चिमी हिस्से में फंसे 22 भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज़ों पर मौजूद सभी 611 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं. पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पश्चिमी भाग में 22 भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज़ अब भी फंसे हुए हैं.

शिपिंग मंत्रालय की पुष्टि, 22 जहाज़ों पर रखी जा रही लगातार नजर

सोमवार को पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने कहा, “वर्तमान में फारस की खाड़ी के पश्चिमी भाग में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज और 611 नाविक फंसे हुए हैं. जहाजरानी महानिदेशालय, जहाज़ मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के समन्वय से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.” राजेश सिन्हा के मुताबिक, इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों के दौरान भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई भी जहाज़ संबंधी घटना सामने नहीं आई है.

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जयशंकर‑अराघची की बातचीत ला रही रंग

पिछले कुछ दिनों में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच कई दौर की बातचीत हुई है. इसके बाद धीरे‑धीरे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में फंसे भारतीय कार्गो जहाज़ों को वहां से निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई है. रविवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया था कि कच्चे तेल, गैस, एलपीजी और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग व्यापार के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ अमेरिका और इसराइल को छोड़कर बाकी सभी देशों के लिए खुला हुआ है.

ईरान का बयान: अमेरिका‑इसराइल को छोड़ बाकी देशों के लिए खुला होर्मुज़

मीडिया प्लेटफॉर्म MS Now को दिए एक इंटरव्यू में ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जहाज़ों की आवाजाही के लिए खुला है। यह सिर्फ हमारे दुश्मन देशों और उनके सहयोगियों के टैंकरों और जहाज़ों के लिए बंद है, जो हम पर लगातार हमले कर रहे हैं. बाकी सभी देशों के लिए यह खुला हुआ है.” ईरान के विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के आसपास करीब 700 जहाज़ पिछले 17 दिनों से फंसे हुए हैं, क्योंकि मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से यह इलाका युद्ध क्षेत्र बना हुआ है.

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तेल सप्लाई प्रभावित, भारत पर संकट का सबसे ज्यादा असर

इस स्थिति के चलते मध्य पूर्व एशिया से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सप्लाई होने वाला करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं. इस संकट का सबसे अधिक असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल लगभग 40 देशों से आयात करता है. डीजी शिपिंग कंट्रोल रूम के सक्रिय होने के बाद वहां फंसे नाविकों, उनके परिवारों और अन्य स्टेकहोल्डर्स की ओर से 3,030 फोन कॉल और लगभग 5,497 ईमेल प्राप्त हुए हैं.

इनमें पिछले 48 घंटों के दौरान 310 से अधिक फोन कॉल और 597 ईमेल शामिल हैं. डीजी शिपिंग अब तक खाड़ी क्षेत्र से 286 भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी में सहायता कर चुका है, जिनमें पिछले 48 घंटों में 33 नाविकों की स्वदेश वापसी शामिल है.
 

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