मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से भारतीय एक्सपोर्टर को कई तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास भारत के करीब 25 कार्गो जहाज फंसे हुए हैं. इसकी वजह से भारत से एक्सपोर्ट होने वाले हजारों करोड़ों रुपए का एक्सपोर्ट का सामान मिडिल ईस्ट के देशों में नहीं पहुंच पा रहा है. अब संकट के इस दौर में भारत सरकार ने युद्ध से प्रभावित एक्सपोर्टरों के लिए राहत पैकेज लाने का फैसला किया है.
रिलीफ पैकेज का भेजा गया मसौदा
एनडीटीवी को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, वाणिज्य मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को रिलीफ पैकेज का एक मसौदा भेजा है, जिसमें कई मोर्चों पर युद्ध की मार झेल रहे एक्सपोर्टरों को राहत देने का प्रस्ताव है. वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, इस राहत पैकेज को जल्दी ही फाइनल किया जाएगा.
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कंसाइनमेंट पर चार्ज 500% से ज्यादा बढ़ा
भारत से मध्य एशिया के 7 से 8 देशों में एक्सपोर्ट होने वाले एक्सपोर्ट गुड्स की सप्लाई पर असर गहराता जा रहा है. शिपिंग कंपनियों ने भारत से एक्सपोर्ट होने वाले कंसाइनमेंट पर चार्ज 500% से ज्यादा बढ़ा दिया है. मार्च के पहले हफ्ते में ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को चिट्ठी लिखकर इस संकट से निपटने के लिए शिपिंग एजेंसियों और एक्सपोर्टरों की बैठक बुलाने की मांग की थी.
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महासचिव अजय भलोटिया ने एनडीटीवी से कहा था, "भारत से मध्य एशिया एक्सपोर्ट होने वाले कई बिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट गुड्स युद्ध की वजह से अलग-अलग देश के पोर्ट्स और कार्गो शिप में फंस गए हैं. शिपिंग एजेंसियों ने हर कंटेनर पर चार्ज 400 डॉलर से बढ़कर 2500 डॉलर कर दिया है. मध्य एशिया के जिन देशों में बड़े पोर्ट्स पर हमारे एक्सपोर्ट के कंसाइनमेंट फंसे हैं वहां प्रशासन हमसे अलग चार्ज देने की मांग कर रहा है. हमने वाणिज्य मंत्री और वाणिज्य सचिव को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि इस संकट का हल निकालने के लिए शिपिंग कंपनियों के साथ एक्सपोर्टरों की एक बैठक बुलाई जाए".
बासमती चावल के एक्सपोर्ट पर सबसे ज्यादा असर
भारत से एक्सपोर्ट होने वाले बासमती चावल का करीब 25% ईरान के बाजारों में पहुंचता है, जिसकी कुल कीमत 1.25 बिलियन डॉलर है. युद्ध शुरू होने भारत से एक्सपोर्ट होने वाला बासमती चावल का निर्यात लगभग ठप्प हो गया है. भारत से ईरान एक्सपोर्ट किए गए बासमती चावल का एक खेप अभी ट्रांजिट में है. मौजूदा माहौल में ईरानी आयातक इस बासमती चावल की डिलीवरी ले पाएंगे या नहीं इसको लेकर काफी अनिश्चितता है.
- भारत से बासमती चावल के कुल एक्सपोर्ट का 25% निर्यात ईरान को होता है जबकि इराक को 20% निर्यात किया जाता है.
- इन दोनों को मिलाकर 2 मिलियन टन से ज्यादा का बासमती का एक्सपोर्ट होता है जिसका वैल्यू दो बिलियन डॉलर से ज्यादा है.
- पिछले साल भारत से कुल 1.2 बिलियन डॉलर का बासमती चावल ईरान एक्सपोर्ट हुआ था.
- जंग की वजह से इराक एक्सपोर्ट होने वाला बासमती चावल का एक्सपॉपर्ट भी प्रभावित होगा.
- ईरान में युद्ध की अनिश्चितता का असर पूरा मध्य एशिया चावल के निर्यात पर पड़ेगा
भारत से ईरान चाय का एक्सपोर्ट भी प्रभावित होने की आशंका है. साल 2024-25 के दौरान भारत से करीब 700 करोड़ का चाय ईरान एक्सपोर्ट किया गया था. अब देखना होगा कि भारत सरकार कितनी जल्दी युद्ध के असर से जूझ रहे एक्सपोर्टरों के लिए राहत पैकेज का ऐलान करती है.
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