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"ईरान की सहमति के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना बेहद मुश्किल": NDTV से बोले फरीद जकारिया

जकारिया ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप जीत की घोषणा करने और इस संघर्ष को समाप्त करने का रास्ता खोजने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन अब जब अन्य ताकतें भी इसमें शामिल हो गईं हैं, तो ईरान संघर्ष जारी रख सकता है.

"ईरान की सहमति के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना बेहद मुश्किल": NDTV से बोले फरीद जकारिया
फरीद जकारिया ने एनडीटीवी के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल से मिडिल ईस्ट वार पर चर्चा की.
  • फरीद जकारिया ने कहा कि ईरान में युद्ध जारी रहेगा और अमेरिकी रुख के कारण तेल संकट और बढ़ने की संभावना है
  • होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान की सहमति के बिना खोलना मुश्किल होगा और ईरान कठोर रुख जारी रखेगा
  • ट्रंप ने यूरोपीय संघ और अरब देशों से जलडमरूमध्य खोलने में मदद मांगी, लेकिन सहयोगी अभी तक सहमत नहीं हुए हैं

विदेश नीति एक्सपर्ट फरीद जकारिया ने संकेत दिया है कि ईरान में युद्ध जारी रहेगा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे नहीं हटने के रुख के कारण तेल संकट बढ़ने की संभावना है. एनडीटीवी के एडिटर-इन-चीफ और सीईओ राहुल कंवल को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि "ईरान की सहमति के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना बेहद मुश्किल होगा" और ईरानी "कठोर रुख अपनाना जारी रखेंगे."

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जलडमरूमध्य को खोलने में मदद के लिए यूरोपीय संघ और अरब देशों से सहायता मांगी है, लेकिन सहयोगी अभी तक सहमत नहीं हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पर धमकी दी है, "यदि कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती है या नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है, तो मुझे लगता है कि यह नाटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा होगा."

जकारिया ने कहा कि भले ही डोनाल्ड ट्रंप "जीत की घोषणा करके इस संघर्ष को समाप्त करने" का रास्ता खोजने की कोशिश करें, लेकिन अन्य ताकतों के शामिल होने के बाद ईरान अपना विरोध जारी रख सकता है. उन्होंने कहा, "अगर ईरान, इन सीमित संसाधनों के साथ भी, होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करना जारी रखता है, तो युद्ध समाप्त नहीं होगा, संकट समाप्त नहीं होगा. दुनिया के बड़े हिस्से, विशेषकर भारत जैसे देशों के लिए जो समस्याएं पैदा हुईं हैं, वो समाप्त नहीं होंगी. इजरायल भी शायद युद्ध समाप्त न करे."

लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रंप एक तनाव बढ़ाने वाले खेल में फंस रहे हैं, जहां बड़ी शक्तियां, विशेष रूप से जब उन्हें लगता है कि उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, तो वे तनाव बढ़ाती हैं क्योंकि वे अपनी प्रतिष्ठा खोना नहीं चाहतीं. उन्होंने आगे कहा, "अब तक, ट्रंप जो करने की कोशिश कर रहे हैं, वह अन्य देशों को इसमें शामिल करना है, जिससे निश्चित रूप से संघर्ष और बढ़ेगा."

नेतन्याहू और ईरान

जब जकारिया से पूछा गया कि इस बढ़ते तनाव के जाल को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कैसे देख रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि इजरायलियों के लिए गणित अलग है. उन्होंने कहा, "नेतन्याहू ईरान को एक राष्ट्र के रूप में नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं. उनके नजरिए से, वे जो भी नुकसान पहुंचाएंगे, उससे ईरान की सभी आक्रमणकारी क्षमताएं नष्ट हो जाएंगी... वे मूल रूप से ईरान को इजरायल के शत्रु के रूप में खत्म कर रहे हैं."

यह बात ईरान के सैन्य कारखानों, सैन्य-औद्योगिक परिसर पर भी लागू होती है, जिन्हें फिर से बनाने में वर्षों लगेंगे और अगर इससे अराजकता फैलती है, तो यह इजरायल के लिए बेहतर है, क्योंकि "अराजकता का मतलब है कि वे अब कोई खतरा नहीं हैं."उन्होंने कहा, "नेतन्याहू की प्रतिभा यह थी कि उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका - उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप - को यह विश्वास दिला दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के हित एक ही हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है."

जकारिया ने कहा कि अमेरिका को व्यापार, स्थिरता, एकीकरण, तेल और अन्य वस्तुओं का निर्बाध प्रवाह चाहिए और इस क्षेत्र में उसके सहयोगी देशों - संयुक्त अरब अमीरात से लेकर सऊदी अरब और कतर तक - को भी यही सब चाहिए. उन्होंने आगे कहा, "इजरायलियों के लिए यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है. वे बस ईरान और हिजबुल्लाह को किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं और वे इसमें सफल भी हो गए हैं."

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